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: छिन सकती है लाल बत्ती : उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाने वाले लगभग तीन हजार करोड़ के एनएचआरएम घोटाले में सीबीआई के हाथ कई नेताओं के गिरेबान तक पहुंच सकती है. अब तक कई सफेदपोशों के नाम इस जांच में सामने आए तो कई लोगों पर सीधे-सीधे उंगली उठ रही है. इनमें से ही एक हैं बसपा एमएलसी तथा जनसंदेश चैनल के मालिक रामचंद्र प्रधान. पीसीएफ के चेयरमैन प्रधान एवं उनकी पत्नी की फर्म भी जांच के दायरे में हैं. समझा जा रहा है कि बाबूसिंह कुशवाहा के खास रहे प्रधान की भी बसपा से छुट्टी की जा सकती है.
पिछले सप्ताह इस मामले नया मोड़ तब आ गया था जब सीबीआई पूछताछ का सामना कर रहे एक ठेकदार नामित टंडन ने आत्महत्या करने की कोशिश की. हादसे में ठेकेदार की जान तो बच गई, लेकिन इससे एक बात खुलकर सामने आ गई कि ठेकदार पर चौतरफा दबाव है. वो बस एक मोहरा भर है असली खेल किसी और का है. सूत्रों का कहना है कि नामित टंडन रमा इंटरप्राइजेज के जरिए जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत पैक्सफेड से 27 एएनएम केंद्र बनवाने का काम लिया था. इस काम में बसपा एमएलसी की पत्नी अनिता प्रधान की फर्म श्रेया इंटरप्राइजेज भी शामिल है, जिस पर प्रधान के मित्र आगा रिजवान काम कर रहे थे.
सूत्रों का कहना है कि इस काम को दिलाने में एमएलसी रामचंद्र प्रधान में अपने रसूख का भरपूर इस्तेमाल किया था. प्रधान के करीबी आगा रिजवान इसमें मध्यस्थ की भूमिका में थे. सूत्र बताते हैं कि 22 फरवरी 2010 से दिसम्बर 2010 तक रमा इंटरप्राइजेज के खाते में एक करोड़ रुपये आए. इतना ही नहीं यह भी बताया जा रहा है कि नामित टंडन से पचास लाख रुपये नकद तथा 50 लाख रुपये के चेक घुमा फिराकर आगा रिजवान को सुपुर्द कर दिए. सीबीआई जांच में यह तथ्य सामने आया है कि सारा पैसा रामचंद्र प्रधान को मिला. इसी मामले को लेकर नामित टंडन से सीबीआई ने 28 नवम्बर एवं 2 दिसम्बर को गहन पूछताछ की.
दूसरी तरफ इस पूछताछ से परेशान नामित पर दूसरे पक्ष का भी जबर्दस्त दबाव था कि इनका नाम सामने ना आने पाए. इसी वजह से नामित ने आत्महत्या की कोशिश की. हालांकि इस मामले में प्रधान के नजदीकी आगा रिजवान का नाम ही आ रहा है. और बताया जा रहा है कि प्रधान आगा के साथ एक एग्रीमेंट भी किया था, पर कहा जा रहा है कि यह सब कयावद कानूनी पचड़ों से सीधे तौर पर बचने के लिए किया गया था. अब खबर है कि सीबीआई का शिकंजा कसने के बाद बसपा पार्टी के लिए विभीषण बन चुके बाबू सिंह कुशवाहा के नजदीकी रामचंद्र प्रधान को भी किनारे लगा सकती है. उनसे पीसीएफ की चेयरमैनी और लालबत्ती भी छिन सकती है.
हालांकि इस घोटाले में बसपा एमएलसी प्रधान के अलावा सीबीआई की लिस्ट में बसपा विधायक आरपी जायसवाल, सेवानिवृत्त डीजी एसपी राम, तत्कालीन प्रमुख सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य प्रदीप शुक्ला का नाम भी मौजूद है. सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी इन लोगों के खिलाफ कई पुख्ता सबूत जमा कर चुकी है. कुशवाहा के नजदीक माने जाने वाले दोनों विधायक रामचंद्र प्रधान एवं आरपी जायसवाल की संपत्ति का ब्योरा भी सीबीआई ने जुटा लिया है. विधायक आरपी जायसवाल पर एनआरएचएम योजनाओं के तहत कई दवा कंपनियों के मालिकों को मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा के संपर्क में लाने तथा आपूर्ति ठेका दिलाने के बदले बढि़या कमीशन लेने के आरोप भी लग रहे हैं.