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Dilip Mandal : सोशल मीडिया पर लिखने के कारण अपने इंस्टिट्यूट से सस्पेंड होने वाले रोहिन वर्मा देश के पहले स्टूडेंट हैं। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाले IIMC ने यह क़दम उठाया है। रोहिन अपने कॉलेज के श्रेष्ठ स्टूडेंट रहे हैं। रोहिन पर लिखने का आरोप है। रोहिन ने ऐसा क्या आपत्तिजनक लिख दिया है, वह IIMC को सार्वजनिक करना चाहिए।

प्रचारक ने कहा- लडका ख़तरनाक है। इसे इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्यूनिकेशन यानी IIMC से हटाओ। इसे लाइब्रेरी में तो क़तई न घुसने दो। क्यों? क्यों क्या? वह लिखता है। पत्रकार है और लिखता है। The Hoot और News Laundry में छपता है। जहाँ IIMC के सबसे बड़े अफ़सर और कई प्रोफ़ेसर तक अपना लिखा नहीं छपवा सके। नाम रोहिन वर्मा है। मैंने लड़के की टाइम लाइन देखी। ऐसा क्या लिख दिया बंदे ने। ख़ास कुछ नहीं है। यही कुछ संस्थान की बातें। सब संविधान के मौलिक अधिकार के दायरे में। अपनी माँ के साथ सेल्फी। कुछ खान पान की तस्वीरें। कुछ JNU वाले नजीब की अम्मा। एक ही ख़तरनाक चीज़ नज़र आई। सावित्रीबाई फुले। वह पत्र जो सावित्रीबाई ने ज्योतिबा फुले को लिखे थे।

Abhishek Ranjan Singh : रोहिन वर्मा पर भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) प्रशासन ने जो कार्रवाई की है. वह गलत ही नहीं, बल्कि ग़ैर ज़िम्मेदाराना बर्ताव है. उन्हें चाहिए कि तत्काल रोहिन का निलंबन वापस लिया जाए. एक छात्र के लिए इससे अधिक पीड़ादायक कुछ और नहीं हो सकता. आईआईएमसी के मौजूदा एवं पूर्व छात्रों को भी इस घड़ी में रोहिन के साथ खड़ा होना चाहिए. मैं IIMCAA यानी भारतीय जनसंचार संस्थान पूर्व छात्रसंघ की गंभीरता के बारे में कुछ भी कहना व्यर्थ है, क्योंकि छात्रहित के नाम पर गठित यह पूर्व छात्रसंघ नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से एक गैर सरकारी संगठन (NGO) है जो आईआईएमसी का नाम लेकर, आईआईएमसी के भ्रष्ट अधिकारियों की सरपरस्ती में सिर्फ़ और सिर्फ़ आयोजनों के नाम पर सरकारी और निजी कंपनियों से प्रायोजन के नाम पर धन उगाही करता है.

जिस तरह किसी मंदिर और मठ में चंद महंथ होते हैं, उसी तरह यहां भी कुछ स्वयंभू मठाधीश बैठे हैं. यह संगठन सब कुछ करता है, सिवाय छात्र हित के. सवाल चाहे ढाई दशकों से बंद पड़े लड़कों के लिए छात्रावास का हो. या फिर हर साल प्रवेश परीक्षा में बढोतरी की जाने वाली राशि हो या कोर्स फीस की. इन तमाम बुनियादी सवालों से IIMCCAA के हाकिमों को सख्त परहेज़ है. उनके मुताबिक़, ये तमाम सवालात आईआईएमसी के आंतरिक मसले हैं. ज़नाब-ए-आली फिर आप हर रविवार को आईआईएमसी के वातानूकुलित मीटिंग रूम और ऑडिटोरियम किस हैसियत से प्रयोग करते हैं? नियमानुसार आपसे इसका किराया वसूला जाना चाहिए? यह संगठन आईआईएमसी के प्रतीक चिन्ह यानी लोगो का ग़लत इस्तेमाल करता है. यह भी आपत्ति का विषय है, क्योंकि यह संगठन एक तिजारती यानी कारोबारी संगठन है जिसका एक ही उद्देश्य है व्यापार करना और धन जमा करना.

रोहिन वर्मा के पक्ष में इनसे किसी प्रकार की उम्मीद न करें. मेरा एक सुझाव है अगर चाहें तो इस पर अमल कर सकते हैं. रोहिन का निलंबन वापस होना चाहिए. इस बाबत एक छात्रों का शिष्टमंडल संस्थान के महानिदेशक से मिले उनसे वार्ता करे और एक सप्ताह का समय दे निलंबन की वापसी के लिए. अगर उसके बाद भी इस दिशा में संस्थान कोई पहल नहीं करता है, तब उस परिस्थिति में मौजूदा एवं पूर्व छात्रों को विरोध-प्रदर्शन करना चाहिए. क्योंकि यह सवाल सिर्फ रोहिन का नहीं है अगर आज विरोध के स्वर नहीं निकलेंगे, तो कल कोई और छात्र इसका शिकार होगा!

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल और अभिषेक रंजन सिंह की एफबी वॉल से.

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