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Abhishek Srivastava : पेड़े कटहर ओठे तेल...! अभी मुख्‍यमंत्री तय हुआ नहीं और जनता सेटिंग-गेटिंग में जुट गई। लखनऊ में मार मची है पत्रकारों की। कोई मनोज सिन्‍हा की उम्‍मीद में डेरा डाले हैं तो कोई राजनाथ रामबदन का बगलगीर होने की फि़राक़ में है। किसी को ज़मीन छ़ुड़वानी है, किसी को ज़मीन लिखवानी है, किसी को विज्ञापन लेना है, किसी को ठेका चाहिए, कोई गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप का मारा है तो कोई अपने स्‍कूल की मान्‍यता के लिए छटपटा रहा है।

सबसे मज़ेदार हालत उन पत्रकारों-संपादकों की है जो साइकिल से चल रहे थे और मुलायम समाजवाद का झंडा ढो रहे थे। समाजवाद पार्ट टू में इन सब ने अखिलेश का दाम थाम लिया था। लगातार अपनी पत्र-पत्रिकाओं से गठबंधन की जीत की मुनादी करते रहे लेकिन कोई दवा काम न आई। अब ये सभी अपने पुराने संघी रिश्‍तों को खंगाल रहे हैं। शुक्रवार की नमाज़ सोमवार की शिव चर्चा में बदल गई है। बहनजी के इर्द-गिर्द तो वैसे भी पत्रकार कम ही रहते हैं। उनके लाभार्थी भी शायद मीडिया में खोजे न मिलें। फिर भी जिन्‍होंने उनकी जीत की भविष्‍यवाणी की थी, वे सबसे अक्‍खड़ निकले। सब ईवीएम पर लपटे हुए हैं और किसी ने भी अपना ईमान नहीं बेचा है। एक यही अच्‍छी बात है।

एक और अच्‍छी बात यह है कि कुछ मित्रों ने लाभ तो लिया यूपी सरकार से लेकिन मंच पर बैठाया केंद्र सरकार के लोगों को, इसलिए वे पांच साल और आराम से काटेंगे। अपने मीडिया में छोटे-छोटे हेमंत तिवारी बहुत भरे पड़े हैं जो हर जगह एडजस्‍ट कर लेते हैं। जाति नहीं तो क्षेत्र ही सही, कोई भी वाद हो। फिलहाल मुझे गुलाबी कोट वाले फ्रैंक हुजूर की याद आ रही है। मुलायम को फिदेल और अखिलेश को चे ग्‍वारा बताने वाले सोशलिस्‍ट फैक्‍टर का क्‍या हुआ भाई? लखनऊ से कोई ख़बर दे।

मीडिया विश्लेषक अभिषेक श्रीवास्तव की एफबी वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख इस प्रकार है....

अजात अभिषेक : हुजूर फर्जी डाटा के भरोसे अखिलेश को कोर्ट में बेइज्जत कराने वाले थे लेकिन शायद किसी समझदार आदमी ने सही समय पर अखिलेश को ऐसा करने से रोक दिया।

Vishnu Narayan : ई फैक्टर त बम्मई तक पहुंच जाता है...

Majid Ali Khan : अब फुर्सत में बिल्लियों से खेलेंगे हुज़ूर भाई

Abhishek Srivastava : बिल्‍ली शेर की मौसी है और शेरवा का राज आ गया है। वो भी फटकने नहीं देगी फ्रैंक यादव को।

Majid Ali Khan : फ्रैंक भाई ने बहुत सारी बिल्लियां पाली हुई थी, मैं गया हूं उनके रिहाइश पर दिलकुशा कालोनी में

Abhishek Srivastava : अब सारी बिल्लियां अपने भांजे के यहां भाग जाएंगी कालिदास मार्ग

नवनीत चतुर्वेदी : वाह, अभिषेक जी गजब लिखहड़ है आप, एक ठो यशभारती देना चाहिए आपको, कसम से हम दे देते यदि देना हाथ में होता तो। लिखते रहिये..

Abhishek Srivastava : आप खाली बात करते हैं महराज। यश भारती तो दूर, अपने प्रोग्राम में एक बार भी नहीं बुलाए जो आपके हाथ में है। महीने का कुछ खर्चा ही निकाल देते इसी बहाने।

Manoj Pandey : यशभारती लायक बता कर नई सरकार को ईशारा किया जा रहा है अभिषेक भाई.....नवनीत जी चिन्हावत हवे...

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