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Surya Pratap Singh :   'भ्रष्टाचारों' पर मज़े की बात... नॉएडा/ग्रेटर नॉएडा/यमुना इक्स्प्रेस्वे अथॉरिटिज़.... वर्तमान सरकार द्वारा भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए किए जा रहे 'अश्वमेघ यज्ञ' के असली (भ्रष्ट) घोड़ों को कौन पकड़ेगा... इन घोड़ों ने प्रदेश की अस्मिता को रौंदा है.... जेल की ऊँची दीवारें व बेड़ियाँ प्रतिक्षरत हैं...... सीबीआइ की गिरफ्त में भ्रष्ट इंजीनियर यादव सिंह इन दिनों सीबीआइ का मुजरिम हैं और जेल में निरुद्ध हैं। जिस रमा रमण आईएएस ने यादव सिंह का निलम्बन बहाल किया और प्बिना डिग्री प्रोन्नति देकर तीनों नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेस अथारिटी में इंजीनियर-इन-चीफ़ बनाया, उसका बाल भी बाँका नहीं।

सीबीआई की जाँच के अंतर्गत यादव सिंह द्वारा सम्पादित 229 अनुबंधों लागत रु. 433 करोड़ के स्वीकृति/ अधिकार प्रतिनिधायन किसने किया? रामा रमण ने ....यह महाशय इतना बड़ा मैनेजर निकला कि उच्च न्यायालय व सीबीआई को ऐसे मैनेज किया है कि वह न केवल जेल से बाहर है अपितु वर्तमान सरकार के कुछ प्रभावशाली लोगों को भी मैनज करने की जुगत लगा रहा है ताकि पिछली सपा-बसपा सरकारों की तरह इस सरकार में भी नॉएडा/ग्रेटर नॉएडा/यमुना इक्स्प्रेस्वे में क़ाबिज़ रह सके।

यादव सिंह पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेस अथारिटी में तैनाती के दौरान अकूत संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं। उसने विभिन्न प्रोजेक्ट्स के 229 अनुबंधों पर 433 करोड़ का कार्य संपादित करवाया, जिसमे बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी होने का इल्जाम लगा है... 1.5 किलो हीरों का मालिक है ये... इसका असली मुलाजिम अर्थात यादव सिंह को सभी अधिकार देने वाला स्वीकृतिकर्ता तो रामा रमण ही है ...इसके अलावा बिना टेंडर प्लॉट आवंटन, बिल्डर्ज़ जो नॉएडा इक्स्टेन्शन में दिए लाभ, ब्याज/दंड माफ़ी, नक़्शा पारित करने की अनिमितताएँ, ठेका/टेंडर के घपले, IAS फ़ार्म घोटाला, निर्माण कार्य घोटाले तमाम मामले तभी सामने आएँगे जब नॉएडा के मठाधीश 'रमा रमण' को वहाँ से रुख़सत किया जाएगा....

यादव सिंह प्रकरण में सीबीआई द्वारा इन बिंदुओं पर जांच आवश्यक है:

- विभिन्न स्तरों पर यादव की पदोन्नतियों में निर्धारित प्रक्रिया व मापदंडों का पालन हुआ है या नहीं।

- विनिर्माण से संबंधित दिए गए ठेकों में निर्धारित प्रक्रिया और मापदंडो का अनुपालन हुआ या नहीं।

- नॉएडा के अन्य बड़े भ्रष्टाचार और वहाँ तैनात रहे आईएएस अधिकारियों के आचरण की जांच।

नयी सरकार के लिए पिछली दो सरकारों में भ्रष्टाचार के प्रतीक मठाधीश १५ अधिकारियों को तत्काल हटा कर उनकी जाँच आवश्यक है ...

वरिष्ठ और चर्चित आईएएस अधिकारी रहे सूर्य प्रताप सिंह की फेसबुक वॉल से.

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