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वाराणसी : भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी के नाम पर वास्तु विहार कंस्ट्रक्शन कंपनी लगातार ठगी का खेल जनता के साथ खेल रही है... लोग मनोज तिवारी का चेहरा देखकर फंस रहे हैं और ठग कंपनी मालामाल होती जा रही है.. आपको बता दें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में इस ठग कंपनी ने अपना जाल बिछा रखा है और लगातार भोले भाले लोगों को शिकार बनाया जा रहा है.

मिली जानकारी के मुताबिक विनय तिवारी के स्वामित्व वाली इस ठग कंपनी 'वास्तु विहार कंस्ट्रक्शन' ने 10 अलग-अलग जगहों पर अपना दफ्तर खोलकर लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाला है. कंपनी कम कीमत पर फ्लैट देने का झांसा देकर उगाही का खेल खेलती है लेकिन तय वक्त गुजर जाने के बाद भी किसी को आशियाना नसीब नहीं हुआ.. पीड़ित जनता जब फ्लैट मांगने या फिर अपनी जमा रकम पाने के लिए कंपनी के दफ्तर पर पहुंचती भी है तो उन्हें झूठे आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिलता है..

इस फ्रॉड कंपनी के झांसे में आने वाले कहते हैं कि वो तो कंपनी के ब्रांड एंबेस्डर मनोज तिवारी के लगे पोस्टर और उनके नाम-शोहरत को देखकर एक अदद आशियाने की आस में धोखे का शिकार हो गए.. असल में शिकार हुए लोग मनोज तिवारी को ही वास्तुविहार का मालिक समझ बैठे और विनय तिवारी की इस ठग कंपनी का छलावा देखिए कि ये महज एक रुपये में ही बुकिंग का दावा करती है.. लोग कहते हैं कि भले ही विनय तिवारी कंपनी चला रहे हों लेकिन कंपनी में जरूर अघोषित हिस्सा मनोज तिवारी का है. तभी तो वह तन मन से कंपनी के हर काम में शामिल रहते हैं और इसके दस्तावेजी प्रमाण भी हैं.. उदाहरण के तौर पर मनोज तिवारी के द्वारा बकायदा भूमि पूजन भी कराया जाता है.. भूमिपूजन उस तस्वीर को कंपनी अपने पोर्टल पर शेयर करती है...

मनोज तिवारी ने खुद को आगे करके वास्तु विहार कंस्ट्रक्शन को अरबों-खरबों दिलाए लेकिन जो निवेशक फ्लैट मांगने जाता है या पैसा वापस चाहता है तो उसे टका सा जवाब मिलता है और इंतजार करने को कहा जाता है. ऐसे में वह ठगा सा निवेश सोचता है कि उसे मनोज तिवारी और उनके गुर्गों ने लूट लिया... इस कंपनी में कोई निवेशक जब फंस जाता है तो वह कंपनी का शिकार हो चुका होता है... जब शिकार फंस जाता है तो उसके पास तिल-तिल घुटने के सिवाय कोई और चारा नहीं बचता है..

इस संदर्भ में जब भी पीड़ित कंपनी के सीएमडी विनय तिवारी को पीड़ित फोन करते हैं तो वे फोन तक नहीं उठाते हैं.. मान लीजिए अगर कभी गल्ती से फोन उठा भी लें तो झूठा भरोसा देकर फोन काट देते हैं.. वैसे वास्तुविहार की धोखाधड़ी के शिकार लोगों ने मनोज तिवारी से भी कई बार संपर्क किया तो वो अब ये कह कर पल्ला झाड़ गए कि कंपनी उनकी नहीं है, वो तो सिर्फ ब्रांड एंबेस्डर हैं.. लेकिन सवाल उठता है कि अगर कोई कंपनी उनके नाम का इस्तेमाल कर मजबूरों को ठग रही है, वे खुद कंपनी के भूमिपूजन में शामिल हो रहे हैं और उसकी तस्वीर कंपनी अपने पोर्टल से लेकर होर्डिंग तक में प्रकाशित कर रही है तो वो कैसे किनारा कर सकते हैं.. कैसे वो अपने नाम का इस्तेमाल करने दे रहे हैं...

क्या भ्रष्टाचार मुक्त देश का दावा करने वाले प्रधानमंत्री मोदी के वादे का वो माखौल नहीं उड़ा रहे हैं... या वो खुद को सबसे उपर समझ रहे हैं... सवाल उठता है कि यदि उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है तो वो खुद को बेदाग कैसे कह सकते हैं... आखिर तिवारी अपनी नैतिक जिम्मेदारी से क्यों भाग रहे हैं... उन्होंने कंपनी से अपना नाता क्यों नहीं तोड़ा और छले गए निवेशकों को फ्लैट या पैसे क्यों नहीं दिला रहे हैं... अभी हाल में ही मोदी सरकार ने संसद में कानून पारित किया है जिसमें विज्ञापन करने वालों को भी ठगी के दायरे में मानने की बात कही गई है... तो क्या मनोज तिवारी एक तरह से ठगों के संरक्षक के रूप में नजर नहीं आ रहे हैं...

बनारस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे बीएचयू के पढ़े हैं और मनोज तिवारी का पोस्टर देखकर मान लिया कि यह प्रोजेक्ट ठीकठाक रहेगा, इसलिए निवेश कर दिया. उनका काफी पैसा फंस गया है... वे जब कंपनी से फ्लैट देने या पैसे लौटाने की बात करते हैं तो वे लोग टालते रहते हैं... उन्होंने भड़ास4मीडिया टीम से अपील की कि पूरे प्रकरण को मनोज तिवारी के समक्ष ले जाया जाए ताकि वे पीड़ित निवेशकों को न्याय दिला सकें.

देखिए कुछ तस्वीरें...

बनारस से सुजीत सिंह प्रिंस की रिपोर्ट. संपर्क : 9451677071


अगर आप भी वास्तु विहार कंस्ट्रक्शन कंपनी और इसके प्रवर्तकों / संरक्षकों द्वारा ठगे गए हैं तो पूरी जानकारी पर मेल कर दें. आपके अनुरोध करने पर आपका नाम पहचान पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा. -संपादक, भड़ास4मीडिया

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