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लखनऊ, 15 अप्रैल 2017 :  साल 2011 में भारत की सुरक्षा से सम्बंधित दस्तावेज लीक कर किये गये 200 करोड़ के घूसकांड के मास्टरमाइंड भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव IAS सदाकांत की प्रतिनियुक्ति को रद्द करते हुए तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार  ने यूपी को वापस भेज दिया थाl यूपी की मायावती सरकार और अखिलेश सरकार में अपनी रीढ़विहीनता और भ्रष्टाचारी होने के गुणों के चलते दागी सदाकांत मलाईदार विभागों के मुखिया बने रहेl इधर सूबे में सत्ता परिवर्तन होते ही दागी सदाकांत ने योगी सरकार में भी मलाईदार पद पर बने रहने के लिए एक बार फिर अपनी रीढ़विहीनता के गुण का भौंडा प्रदर्शन करते हुए ऐसे-ऐसे आदेश जारी किये मानो कि अब तक सदाकांत के आवास विभाग और लोक निर्माण विभाग में अब तक गुंडे-मवालियों के मार्फत लूट हो रही थी और अब सदाकांत सब कुछ सही करने के लिए कमर कास चुके हैं।

आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने आरटीआई से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर उत्तर प्रदेश के आवास एवं शहरी नियोजन विभाग तथा लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव सदाकांत पर कूटरचित पत्र तैयार कर सरकारी आवास आवंटन कराने का आपराधिक कृत्य करने  का आरोप लगाते हुए सीएम योगी को पत्र लिखकर सदाकांत को तत्काल निलंबित करते हुए सदाकांत के खिलाफ प्रशासनिक कार्यवाही एवं प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करा कर वैधानिक कार्यवाही कराने की मांग कर दी हैl

उर्वशी ने योगी को पत्र लिखकर बताया है कि सदाकांत ने दिनांक 20-07-11 को उत्तर प्रदेश शासन के राज्य संपत्ति अधिकारी को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखकर बताया था कि लखनऊ में उसका कोई निजी आवास नहीं था और इसी आधार पर उसने राज भवन कॉलोनी, दिलकुशा कॉलोनी अथवा अन्य किसी कॉलोनी में सरकारी आवास पर अपना दावा ठोंका था जबकि सदाकांत ने दिनांक 31-12-2010 की स्थिति के आधार पर अचल संपत्तियों का जो विवरण दिनांक 18-04-11 को हस्ताक्षरित करके भारत सरकार को दिया था उसके अनुसार लखनऊ के कुर्सी रोड स्थित विकास नगर कॉलोनी में लगभग 50 लाख कीमत का MIG मकान नंबर 2/29 सदाकांत के अपने नाम में था जो सदाकांत द्वारा अपने निजी इस्तेमाल में लाया जा रहा थाl

इससे स्वतः सिद्ध हो रहा है कि सदाकांत ने असत्य अभिकथन करने वाला कूटरचित पत्र दिनांक 20-07-11 उत्तर प्रदेश शासन के राज्य संपत्ति अधिकारी को भेज इसके आधार पर  राज्य संपत्ति अनुभाग-2 के कार्यालय ज्ञाप संख्या आर- यू०ओ०आर०-25 / 32-2-2011-4 / 4 / 2011टी.सी.-8 द्वारा आवास आवंटन नियमावली 1980 के नियम 23 के अंतर्गत नियमों में शिथिलता  प्राप्त करते हुए सरकार की आँखों में धूल झोंकते हुए 3 दिन के अन्दर आवास आवंटन का सरकारी लाभ प्राप्त कर लिया l

सदाकांत को उच्च पदासीन लोकसेवक बताते हुए उर्वशी ने  ऐसे उच्च पद पर आसीन IAS अधिकारी द्वारा ऐसी टुच्ची हरकत करने से पूरी की पूरी IAS बिरादरी का मुंह काला होने की बात भी उर्वशी ने अपने पत्र में लिखी हैl उर्वशी ने कहा कि वे योगी जी को बताना चाहती हैं कि ऐसी टुच्ची हरकत करने वाला यह IAS अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार कर प्रदेश को जो नुक्सान पहुँचा रहा होगा वह निश्चित ही अकल्पनीय होगाl सदाकांत को भ्रष्टाचार करने की आदत से मजबूर अधिकारी बताते हुए उर्वशी ने योगी को आगाह किया कि भविष्य में सदाकांत उनकी और बीजेपी की ईमानदार छवि को भी गंभीर खतरा बनेगाl

उर्वशी ने योगी से अपील की है कि वे विस्तृत लोकहित में सदाकांत को तत्काल निलंबित करते हुए सदाकांत के खिलाफ प्रशासनिक कार्यवाही करें और सदाकांत के खिलाफ  प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करा कर वैधानिक कार्यवाही भी करेंl  उर्वशी ने बताया कि उनको पूरा विश्वास है कि यूपी को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की मुहिम को पूरा करने के लिए सीएम की कुर्सी पर बैठे योगी उनकी गुहार सुन यूपी को दागी और 420 सदाकांत से मुक्ति अवश्य दिलायेंगेl

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