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ताजमहल को बने 350 साल से ज्यादा हो चुका है. उम्र ज्यादा होने से ताज के रॉयल गेट में लगे कीमती पत्थर अब गिरने लगे हैं. ताजमहल की कोई अनुमानित आयु तो नहीं है लेकिन कोई ऐतिहासिक स्मारक जहां हर रोज बीस हजार से ज्यादा पर्यटक आते हों, उसकी आयु साढ़े तीन सौ साल बीतने के बाद कम तो होने ही लगती है. ताज के साथ भी कुछ ऐसा हो रहा है जिसके चलते इसकी पच्चीकारी अब गिरने लगी है. इसी के चलते कहा जा रहा कि अब ताज अब बूढ़ा हो चला है.

बूढ़े ताजमहल के चलते रॉयल गेट और मुख्य गुंबद के कीमती पत्थर निकलंने लगे हैं. इसके पीछे सैलानियों की भी हरकत है जो इनसे छेड़छाड़ करते हैं. भारतीय पुरातत्व विभाग ने इनकी मरम्मत शुरू करा दी है. ताज में घुसते ही रॉयल गेट पड़ता है जहा शाहजहाँ ने कीमती पत्थर विदेशों से मंगा कर लगाए थे. समय के साथ ये निकलने लगे हैं इसलिए दोबारा एएसआई ने इन पत्थरों को लगाने का काम शुरू किया ताकि पर्यटकों को ताज के पुराने सौंदर्य को देखने का मौका मिले.  भारतीय पुरातत्व के अधीक्षण अभियंता भुवन विक्रम ताज को लेकर कई बाते बताते हैं जिसे इस वीडियो में सुना जा सकता है. नीचे क्लिक करें...

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