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संदीप ठाकुर


प्रेस क्लब आफ इंडिया ने एनडीटीवी के मालिक प्रणव रॉय और राधिका रॉय के
यहां पड़े सीबीआई छापे के विरोध में शुक्रवार यानी 9 जून यानि आज प्रोटेस्ट
मीटिंग बुलाई है। क्लब का मानना है कि सीबीआई की कार्रवाई देश के चौथे
स्तंभ यानी मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला है। क्या वाकई ऐसा है। सीबीआई
का छापा क्या किसी खबर को लेकर मारा गया था या फिर प्रणव राय की कई
कंपनियों में से एक कंपनी की करतूत की जांच के सिलसिले में मारा गया था।
आगे लिखने से पहले चंद उदाहरण...

1. बंगाल का Saradha Scam। सुदिप्तो सेन एक Ponzi Scheme चला लाखों गरीब
लोगों का 6000 करोड़ से ज़्यादा डकार गया। इस रकम से उसने Saradha Media
House की भी स्थापना की थी। उसका एक News Channel और एक अखबार भी निकलता
था । सुदिप्तो सेन आज जेल में है। ये कानूनी कार्यवाही प्रेस के खिलाफ
कार्यवाही मानी जायेगी क्या?

2. सहारा समूह के मालिक सुब्रत राय News Channel और अखबार चला रहे हैं और
20 हजार करोड़ के गबन में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जेल में हैं। सुब्रत
राय के खिलाफ कार्यवाही प्रेस के उपर हमला माना जाएगा क्या?

3. न्यूज एक्सप्रेस चैनल का मालिक बालाजी भापकर परिवार सहित जेल में है।
चिट फंड कंपनी का मालिक था। करोड़ों का घोटाला किया। क्या यह प्रेस पर
हमला है?

4. लाइव इंडिया चैनल का मालिक महेश मुत्तेवार जो चिटफंड कंपनी चलाता
था, इन दिनों जेल में है। क्या यह भी प्रेस पर हमला है?

5. तहलका मैग्जीन का समूह संपादक तरुण तेजपाल सेक्सुअल हैरासमेंट में जेल
गया, क्या यह भी प्रेस पर हमला था?

6. सुदर्शन news का मालिक सुरेश चह्वाणके पिछले दिनों बलात्कार के आरोप में
गिरफ्तार हुआ था, क्या इसे भी प्रेस पर हमला कहेंगे?

7. देशभक्ति पर भाषण देने वाला जी न्यूज का एंकर सुधीर चौधरी 100 करोड़ की
वसूली के चक्कर में गिरफ्तार हुआ था, क्या यह भी प्रेस पर हमला था?

8. Star News का सीईओ रहा पीटर मुखर्जी अपनी बेटी की हत्या के जुर्म में
पत्नी इंद्राणी मुखर्जी के साथ जेल में बंद है, क्या यह भी फ्री प्रेस पर
हमला है?

9. कुबेर टाइम्स, जेवीजी टाइम्स नामक अखबार लाने वाले मालिकों को भी
चिटिंग व फॉड के मामले में गिरफ्तार किया गया था, क्या यह भी प्रेस पर
हमला था?

10. चैनल पी7, शुक्रवार और बिंदिया पत्रिका का मालिक निर्मल सिंह भंगू
28 हजार करोड़ के घोटाले में जेल में है। क्या इसे मीडिया के खिलाफ
कार्रवाई कहेंगे?

फेहरिश्त काफी लंबी है वैसे लाोगों की जो मीडिया की आड़ में अपना उल्टा
सीधा धंधा चलाते हैं और जब इन पर कोई कानूनी कार्रवाई होती है तो उसे
मीडिया पर हमला बता शोर मचाने लगते हैं। प्रणव राय के मामले में भी यही
हो रहा है।

एडिटर्स गिल्ड से लेकर प्रेस क्लब आफ इंडिया तक प्रेस की
आजादी के नाम पर रॉय के साथ खड़ा नजर आ रहा है। वैसे वर्तमान सरकार में
मीडिया भोंपू का काम कर रहा है। मानता हूं। साथ ही यह भी मानता हूं कि
एनडीटीवी भोंपू चैनलों से थोड़ा अलग है। लेकिन वह भी कोई दूध का धुला
नहीं। प्रणव राय के खिलाफ 7 मामले दर्ज हैं। क्या इन मामलों में होने
वाली हर कार्रवाई के बाद प्रेस क्लब विरोध मीटिंग बुलाएगा? प्रेस क्लब
पत्रकारों का क्लब है, न कि मालिकों का। जब पत्रकारों की नौकरी जाती
है तब प्रेस क्लब क्यों नहीं आगे आता है। आज तक कितने पत्रकारों की
नाौकरी के लिए प्रेस क्लब लड़ा है? जरा सोचिए।

लेखक संदीप ठाकुर प्रेस क्लब आफ इंडिया के सदस्य हैं और दिल्ली के कई अखबारों चैनलों में वरिष्ठ पद पर कार्य कर चुके हैं. उनसे संपर्क के जरिए किया जा सकता है.

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