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तीन साल पहले उन दिनों जब 'अच्छे दिन' का नारा दिया गया था, किसान, नौजवान सब खुश थे क्योंकि घोटालेबाज कांग्रेस सरकार के जाने और नई मोदी सरकार के आने की उम्मीद सबको लगने लगी थी। लेकिन मोदी सरकार ने जो कुछ था ठीकठाक उसे भी तबाह कर डाला। सवाल यह उठता है कि ये देश सिर्फ कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं या भक्तों भर का है जो क्षण क्षण में देशद्रोही, उपद्रवी का प्रमाण पत्र बांटते फिरते हैं या ये सवा सौ करोड़ वासियों का देश है जहाँ 80 करोड़ लोग बेरोजगार हैं। 60 करोड़ लोग भूखे हैं। लेकिन भक्त मण्डली ये भजन करती है कि गरीब निक्कमे हैं, काम नहीं करते। फ्री में खाना चाहते हैं। अरे भैय्या आपके पास ऐसा कौन सा काम है जो सवा सौ करोड़ वासियों को रोजग़ार देने का वादा करते हैं। जो वादा सरकार नहीं कर पा रही है वह भक्त मंडली कर रही है।

कितना भयावह है भविष्य : देश में ब्लैक मनी का कारोबार ढाई लाख करोड़ से ज्यादा था। जब यह बंद हुआ तो 4 करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए। इन्हें रोजगार देने के कोई विकल्प तैयार नहीं किये गए। बल्कि हायर एंड फायर को क़ानूनी मान्यता देने के प्रयास किये जाने लगे। नतीजन लोग खेती की तरफ भागे। नोटबंदी के बाद जो नीतियां बनी वह भी गला घोंटने वाली थी।

देश में चौतरफा घाटा : अब सरकार की नीतियों के कारण जीडीपी में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। 15 लाख करोड़ रुपये टैक्स के रूप में पाने वाली भारत सरकार इस साल 12 से 13 लाख करोड़ ही पा सकती है। अब इसे 15 लाख करोड़ करने के प्रयास में कानून का शिकंजा कसेगा, पुलिस की अवैध उगाही बढ़ेगी। नतीजन जनता में आक्रोश फैलेगा। ऊपर से 10 लाख करोड़ का npa एक तो करेला दूजे नीम चढ़ा वाली कहावत चरितार्थ करेगा। इसके बावजूद भी भारत सरकार को दूसरे देश में बसे लोगों के पेट की चिंता सता रही है। नतीजन पड़ोसियों को सस्ता कर्ज, विदेशों से हथियार खरीदी पर फ़ोकस किया जा रहा है। और विदेशी भारत को बड़ी दुकान के रूप में देख रहे हैं। तो हथियारों की अवैध तस्करी तेज हो सकती है। एक अव्यवस्था की खीझ हर तरफ पड़ती है। और इसका असर सीमा पर जवानों पर भी पड़ने की आशंका है। जो भयावह हो सकता है।

महंगाई नहीं बढ़ेगी : चूँकि गैर कानूनी तरीके से की गई नोटबंदी के बाद लोग कृषि की तरफ पलायन कर गए हैं इसलिए खूब पैदावार होने की संभावना है। इसलिए महंगाई तो नहीं बढ़ेगी। लेकिन व्यापारी एक गणित लगा रहे हैं कि किसी तरह ऐसे जिंसों को एक साथ खरीद लिया जाये। जिससे बाजार में इसकी भारी कमी हो जाये। और सरकार उनसे यही फसल दोगुने दाम पर खरीदने को मजबूर हो।

समाधान क्या है : समाधान एक ही है कि यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम लागू की जाय जिसके तहत हर माह हर नागरिक को न्यूनतम 3 हजार की इनकम निश्चित की जा सके। तभी इस भयावह महामारी पर काबू पाया जा सकता है नहीं तो गृह युद्ध से कोई नहीं रोक सकता है।

महेश्वरी प्रसाद मिश्र

पत्रकार

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