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भड़ास के एडिटर यशवंत अपने गांव गए तो सबसे गरीब ब्राह्मण परिवार के सबसे बेटे बिग्गन महराज की असमय मौत के घटनाक्रम को सुन-देख कर उन्होंने एक श्रद्धांजलि पोस्ट फेसबुक पर लिख दी और बाद में उसे भड़ास पर भी अपलोड करा दिया. इस श्रद्धांजलि पोस्ट को बड़े पैमाने पर पसंद किया गया और सैकड़ों लाइक कमेंट्स मिले. आइए इस स्टोरी पर आए कुछ चुनिंदा कमेंट्स पढ़ते हैं. मूल स्टोरी नीचे बिलकुल लास्ट में, कमेंट खत्म होने के बाद है, 'श्रद्धांजलि : दोस्त, अगले जनम अमीर घर ही आना!' शीर्षक से.

Sanjaya Kumar Singh

टीआरपी और लाइक की होड़ में आज बिग्गन महाराज जैसों की खबर कुछ सेकेंड या लाइन भी नहीं पाती है। आपने याद किया तो समाज में मौजूद ऐसे कई लोगों की बरबस याद आ गई। पेट भरा होता तो ये भी कहते रहते 10-10 बच्चे पैदा करो। पर जैसा कि आपने लिखा है - उनके जाने से परिवार को भी फर्क (भावनात्मक छोड़कर) नहीं पड़ेगा। गनीमत यही है किगरीबी में जीने वाले लोग वोट की राजनीति नहीं करते वरना अपने जैसे कई और बनाकर जाते।

Rajesh Agrawal

कलम के बड़े धनी हैं आप, आपने पूरा दुख-दर्द अपनी लेखनी में समेट दिया है। एक साधारण व्यक्ति की मृत्यु की असाधारण व्याख्या है यह।

Nimish Kumar

बाबा..तेरी लेखनी को सलाम..गजब लिखे हो..दिल चीर दिए हो...बहुत शानदार...हम-तुम जैसे कलम के सिपाही किसी को ऐसी ही श्रद्धांजलि दे सकते हैं...सैलूट, इस हरामखोर समाज का सच लिखने के लिए..जो किसी इंसान को सिर्फ पैसे से आंकता है..उसके इंसान होने से नहीं...

Nahid Fatma

Aise laga jaise Sab apni aankho se dekha !!! Ishwar aapke dost k jaane par aapko sabr de !!! Ye to ek Biggan the jinke baare me pta chal gya aise bohut saare Biggan roz jaate hen jinka pta hi nhi chalta...

Madhav Krishna

यशवंत भैया। यह पढ़ने के बाद अब मुझे आपकी 'जानेमन जेल' का इंतज़ार है

Vinay Shrikar

तुमको तो कथाकार होना चाहिए था। था, क्या हो! क्या ही मर्मस्पर्शी और हृदयविदारक कथारस है एक-एक कथन में ! What a sharp observation of smallest things of life ! What a peculiar and sensitive way of narration ! Biggan Maharaj's sad story will always haunt our minds and memories for long!

Vikas Mishra

भाई बिग्गन महाराज की कथा पढ़कर भीतर से कुछ कचोट सी महसूस हुई। गजब लिखा है आपने, बिग्गन महाराज गांजा पीते हुए, मां से पैसे के लिए झगड़ते हुए, शांत भाव में चिर निद्रा में सोते हुए और अंतिम संस्कार के तौर पर गंगा में प्रवाहित होते हुए दिखने से लगे।

Arun Kumar Roy

मैं भी दो साल पहले अपने गांव गया था. पास के टोले के लम्बी दाढ़ी केश वाले बाबा को पहचान कर बचपन के हमउम्र के नाते मित्रवत बाते करने लगा तो पता चला ऊनकी मजबूरी भी कुछ इस ही तरह की थी. तभी उन्होंने मुझे औरों की ही तरह आदर पूर्वक सम्बोधन करने का आग्रह किया. तब कम, अब अधिक समझा, आपके insightful post के मनन के बाद. साधुवाद!

Manoj Anuragi

ये सच कहानी बहुत मार्मिक है और एक ख़ास तरह की जीवन की जद्दोजहद को दर्शाती है, आपने बहुत सुंदर भाषा शैली में लिखी है जी करता है कि पत्रिका में छाप दूँ क्या अनुमति है महोदय

Neelesh Misra

कितना सशक्त और मार्मिक चित्रण एक ऐसी शख़्सियत का जिस से कभी मिले नहीं, मिलेंगे नहीं, लेकिन लगता है बरसों से मिलते रहे हों। बहुत ही बढ़िया लिखा है, यशवंत। अनेकों बधाइयाँ! अपनी रचनात्मकता के इस पक्ष को सँवारें। ख़ूब, ख़ूब लिखें! 'गाँव कनेक्शन' में छाप सकते हैं इसे यशवंत?

Vinay Oswal

"मेरे दोस्त, अगले जनम किसी अमीर घर ही आना"। इस तरह धारा की तरह प्रवाहमान आलेख मुझे बहुत प्रिय लगते हैं। जिनमें कहीं ठहराव नहीं। बस जो अपने साथ यात्रा कराते हैं, माहौल की बारीक से बारीक हलचल के बोध के साथ। मानवीय संवेदनाओं को उकेरते हुए, जीवंत बनाते हुए, बढ़ते जाते हैं लक्ष्य की ओर...!!!!

JP Tripathi

लिखावट में ऐसी जान फूंक दी आपने कि दिल अब तक कचोट रहा है। श्रद्धांजलि

Sudha Singh

मृतक को श्रद्धांजलि और इस बेहतरीन याद को सलाम।

Onkar Singh

बिग्गन महराज के साथ आपको भी निष्ठावान साथी के असमय और विस्मय कूच पर कंजूसी के लिए नमन,ये तो मृत्यु कथा थी जिन्दगी की कहानी में मर्दवा आप तो साझीदार थे.

Manu Laxmi Mishra

बिग्गन महाराज की कथा पढ़कर जीवंत चलचित्र आँखों के सामने जीवित हो उठा,बहुत लोग ग़रीबी के मारे अपना चोला बदल लेते हैं,अपनी इच्छाओं का दमन कर लेते हैं

Prateek Chaudhary

यशवंत भैया. बिग्गन महाराज का जीवन हमारे समाज का ही एक हिस्सा है। अत्यंत मर्मस्पर्शी।

Santosh Singh

भाई जी...आँखे नम हो गयी आपके लिखने के अंदाज से. क्या जीवंत चित्रण किया है

Dhyanendra Tripathi

बेहद मार्मिक और इस क्रूर दुनिया का मर्मान्तक सच. कितनी साफगोई से आपने लिखा है.. बिग्गन महराज को विनम्र श्रद्धान्जलि..

Suresh Neerav

यशवंत भाई श्रद्धांजलि भी सोचपरक ढंग से दी जा सकती है, यह आपने सिद्ध कर दिया।

Devendra Verma

विग्गन महराज समाज की जीवन्त लीला के यशस्वी पात्र थे चरित्र जीवन्त रहेगा सिर्फ पात्र बदलते रहेगे तमाम विग्गन महराज काल कलवित हो गये और कितने होने के लिए कतार मे है...सामाजिक कुव्यवस्था के कारण न जाने कितने लोग विग्गन महराज बनने के लिए विवश होते रहेंगे

Niranjan Sharma

बिग्गन महाराज की जय हो ! आपकी भावपूर्ण श्रद्धांजलि में हम भी शरीक हैं!

Lambu Ji

बिग्गन महराज big आदमी थे...आपके संस्मरण ने उन्हें अमर कर दिया.

Maharshi Kumar Tiwari

हमारे समाज में मौत पर चर्चा कोई नही करता ऐसे जी रहे है जैसे हमेशा इस ग्रह पर रहना हो ।

Divakar Singh

बेहद मार्मिक श्रद्धांजलि। ऐसे फक्कड़ों से ईर्ष्या होती है, जो हमारी आपकी तरह न जीकर असल ज़िन्दगी जी लेते हैं।

Sarang Upadhyay

बिग्गन महाराज केवल आपके गांव के नहीं रहे। वे अब सदा के लिए...! नमन..!

A.k. Roy

आज के समाज और समय को देखते हुए, आपका सटीक, सामयिक विश्लेषण है।

Pramod Kumar Pandey

आपके दोस्त बिग्गन महाराज को श्रद्धांजलि। मार्मिक लिखा है आपने।

Manoj Kumar

बेहद मार्मिक और मर्मान्तक सच। बिग्गन महराज को विनम्र श्रद्धान्जलि..

Jayesh Agarwal

गांव हो या शहर.. गरीब और गरीबी का कोई हमदर्द, दोस्त कहां होता है.. जीवंत लेखन..

Prakash Bhushan Singh

वैसे भी गरीब और गरीबी के हमदर्द-दोस्त होते कहां हैं? अनदेखे अंजाने बिग्गन महराज को विनम्र श्रद्धांजलि!

Rajesh Somani

Lost true freind however he was better than town freind

Ashok Das

उनको श्रद्धांजलि। उनके साथ बचपन की कुछ और यादें साझा करिये।

Ajay Singh

बेहतरीन संस्मरण!

Ashok Anurag

दोस्त...अगले जन्म अमीर घर ही आना......

Kamal Sharma

गांव में गरीब और गरीबी के हमदर्द-दोस्त होते कहां हैं. सही बात है भाई.


उपरोक्त कमेंट्स जिस पोस्ट पर आए हैं, उसे यहां पढ़ सकते हैं :

यशवंत की एफबी पोस्ट पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें :

Yashwant Singh Facebook Post of Biggan Mahraj

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