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Sheetal P Singh : अनुभवी लोग... अहमद पटेल पर बन आई तो अब बहुतों को लोकतंत्र याद आ रहा है .........आना चाहिये पर शर्म भी आनी चाहिये कि जब बीते ढाई साल यह बुलडोज़र अकेले केजरीवाल पर चला तब अजय माकन के नेतृत्व में कांग्रेसी राज्यपाल के अधिकारों के व्याख्याकारों की भूमिका में क्यों थे? जब एक बेहतरीन अफ़सर राजेन्द्र कुमार को सीबीआई ने बेहूदगी करके सिर्फ इसलिये फँसा दिया कि वह केजरीवाल का प्रिंसिपल सेक्रेटरी था तब भी लोकतंत्र की हत्या हुई थी कि नहीं? जब दिल्ली के हर दूसरे आप विधायक को गिरफ़्तार कर करके पुलिस और मीडिया परेड कराई गई तब भी यमुना दिल्ली में ही बह रही थी! तब कांग्रेसी बीजेपी के साथ टीवी चैनलों में बैठकर केजरीवाल को अनुभवहीन साबित कर रहे थे! अब अनुभव काम आया?

मोदी जी व अमित शाह की जोड़ी इस देश के हर मानक को चकनाचूर करके एक तानाशाह राज्य के चिन्ह स्थापित कर रही है। इनकम टैक्स ई डी सीबीआई आदि नितांत बेशर्मी से स्तेमाल किये जा रहे हैं। फिलवक्त इनकम टैक्स ने कर्नाटक के उस मंत्री के यहाँ छापा मारा है जिसके यहाँ गुजरात के कांग्रेसी विधायकों को पोचिंग से बचाकर रक्खा गया है! इंदिरा / संजय की तानाशाही का भी एक दौर था! कांग्रेस को वहाँ तक पहुँचने में कई दशक लग गये थे ये डिजिटल पार्टी है सो बुलेट स्पीड से हर पड़ाव पार कर रही है।

पत्रकार से उद्यमी फिर आम आदमी पार्टी के नेता बने शीतल पी. सिंह की एफबी वॉल से.

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