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असीम की लड़ाई लड़ रहे पत्रकार मयंक और मंडली को प्रणाम कह साथ दीजिए

पत्रकारिता की जो नई पौध है, उसमें कई लोग ऐसे हैं जो करते कहते वही हैं जो उनका दिल-मन करता है, दबाव-पेट-दिक्कत आदि जैसी मजबूरियों से अपनी ज़िंदगी की दिशा नहीं तय करते. यह अंदाज उन्हें धीरे-धीरे अन्याय के खिलाफ लड़ने वाला जांबाज आदमी बना देता है. मयंक सक्सेना की उम्र ज्यादा नहीं है, और लंबाई भी. पर इरादे बड़े बड़े पत्रकारों और संपादकों से बुलंद है. पत्रकार होने का असली मतलब मयंक को पता है, तभी तो वह सरोकार और सच्चाई के लिए लिखता जीता कहता लड़ता रहता है.

पिछले दिनों मयंक ने कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के मुद्दे को अपनाया. असीम से कई राउंड मयंक ने बात की. भ्रष्टाचार विरोधी कार्टून बनाने के कारण असीम की वेबसाइट पुलिस द्वारा बैन कराए जाने और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाए जाने का मुद्दा बहुत बड़ा मसला है. पर हमारे पत्रकारों संपादकों को यह कहां समझ में आता है. उनके प्राण तो टीआरपी, प्रसार, बिजनेस, बजट, स्टाफ, मैनेजमेंट जैसे मुद्दों ने पी रखे हैं. ऐसे में मीडिया के लोगों को सचमुच जिन लड़ाइयों को लड़ना चाहिए, वे दोयम हो चुके हैं, सेकेंडरी हो गए हैं.

असीम त्रिवेदी का मसला बहुत बड़ा मसला है. इसे सिर्फ और सिर्फ मीडिया के साथी ही लड़-जीत सकते हैं. पर दुर्भाग्य ये कि कोई भड़ास4मीडिया असीम के बारे में खबर छाप देता है, कोई अखबार एकाध खबर छाप देता है, कोई चैनल एकाध बहस करा देता है और फिर मुद्दा खत्म. लेकिन मयंक ने असीम की लड़ाई को अपनी लड़ाई मान लिया है. उन्होंने सिर्फ फेसबुक के जरिए एक आह्वान कर डाला कि सभी लोग राजघाट पहुंचे और बापू के सामने असीम को कार्टून बनाकर साइट बैन किए जाने का विरोध करते देखें. मयंक के आह्वान पर दर्जनों लोग राजघाट पहुंचे. असीम ने कार्टून भी बनाए.

फेसबुक पर राजघाट के आयोजन की तस्वीर मयंक समेत कई ने आपस में टैग किया हुआ है, जिसमें तस्वीर के नीचे लिखा है-

''असीम त्रिवेदी एक कार्टूनिस्ट है, कला से भरे हुए इंसान है, भ्रष्टाचार से हर इंसान परेसान है और अपने अपने तरीके से इसका विरोध भी कर रहा है, असीम एक कार्टूनिस्ट हैं तो इन्होंने अपने कार्टून्स के जरिये भ्रष्ट ताकतों पर हमला बोला, आप यकीन मानिये उनके कार्टून्स के बाद उनकी वेबसाइट 'कार्टून्स अगेंस्ट करप्सन' को बंद कर दिया गया और असीम पर देशद्रोह का मुकदमा भी चलाया गया है.... क्या यही हमारा मौलिक अधिकार है और अभिव्यक्ति की आज़ादी है जिनका हमारी सरकारें ओर नेता ढोल पिटते है. कल असीम और उनके साथियों ने राजघाट पर यही सवाल 'बापू' से पूछा और वहीं बैठकर कार्टून्स भी बनाये.''

अगर आप भी असीम और मयंक की लड़ाई को अपनी लड़ाई बनाना चाहते हैं तो देर किस बात की, ये हैं तरीके इनसे संपर्क करने के....

फेसबुक पर असीम http://www.facebook.com/cartoonistaseem

असीम का मोबाइल 09336505530

फेसबुक पर मयंक http://www.facebook.com/mailmayanksaxena

मयंक का मोबाइल 09711482565

कापीराइट (c) भड़ास4मीडिया के अधीन.

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