Category: इवेंट, पावर-पुलिस, न्यूज-व्यूज, चर्चा-चिट्ठी... Published Date Written by B4M
यशवंतजी, भाई साहब का नाम है अनुपम शशांक. झारखण्ड के स्वनामधन्य पत्रकारों में शुमार किये जाते है. पत्रकारिता के मार्फ़त कई चीज़ हासिल कर चुके है. सो अब सूचना आयुक्त बनने की इच्छा रखते हैं. पत्रकार रहते अपना बायो-डाटा कार्मिक विभाग को सौंप आये थे. बात तब खुली जब प्रभात खबर ने उन सब लोगों का लिस्ट छाप दिया, जो चुपके-चुपके बायो डाटा जमा कर आये थे. भाई को उनके दोस्तों ने ही धोखा दे दिया.
सूचना आयुक्त नहीं बन पाए, सो खिसियाये हुए थे. इकोनामिक्स टाइम्स में काम करते थे, लेकिन जब वहां दाल नहीं गली तो वापस पायनियर के झारखण्ड ब्यूरो प्रमुख बन कर लौट आये. उसी अख़बार में, जिसके मालिक चन्दन मित्रा को पानी पी-पी कर गाली देते फिर रहे थे कुछ महीनो पहले तक. अब अख़बार की कमान हाथ में मिली है तो, पायोनियर के सहारे ही अपनी दुकान चमकाने में लग गए है. २४ तारीख को पायनियर के झारखण्ड संस्करण, जिसका खुद को मालिक बताते फिरते हैं, में राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त का बड़ा सा इंटरव्यूव करवाया. शीर्षक था "More Information Commissioner required: CIC". अब बेचारे रिपोर्टर की दुर्गति देखिये. अजेंडा साहब का, फँस गया रिपोर्टर संतोष नारायण. संतोष पूछते हैं कितने आयुक्त चाहिए, तो सीआईसी साहब का जवाब आता है "दो". बेचारे संतोष फिर पूछते है, "सिर्फ दो से काम हो जायेगा? या और चाहिए?" लगे रहो अनुपम भाई!
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.