Category: यूपी-यूके इलेक्शन 2012 Published on Thursday, 09 February 2012 14:05 Written by शेष नारायण सिंह
: मुलायम सिंह ने बाबरी मस्जिद ढहाने वालों को इज्जत दी : नई दिल्ली : कांग्रेस के महासचिव और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव अभियान में लगे दिग्विजय सिंह ने कहा है कि अब उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी से है. उन्होंने दावा किया कि अब तक चुनाव में सक्रिय रही बहुजन समाज पार्टी अब तीसरे स्थान पर खिसक गयी है. अपने इस दावे के साथ दिग्विजय सिंह ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के ऊपर सीधा हमला बोला और कहा कि मुलायम सिंह यादव ने अपने जीवन में एक बार भी आरएसएस के खिलाफ कभी कोई बयान नहीं दिया है.
लखनऊ में मौजूद दिग्विजय सिंह ने आज चुनाव के पहले दौर के दिन टेलीफोन पर इस संवाददाता को बताया कि उत्तर प्रदेश में सेकुलर जमातें पूरी तरह से कांग्रेस के साथ हैं. राज्य की जनता ने साम्प्रदायिक राजनीति के नुकसान को देखा है. अब वह किसी भी साम्प्रदायिक जमात को सत्ता में नहीं आने देगी. इसी वजह से बीजेपी यूपी की लड़ाई से बाहर हो गयी है. बीजेपी की मदद से कई बार मुख्यमंत्री बन चुकी मायावती भी अब जनता के गुस्से का सामना कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी भी कई बार आरएसएस और बीजेपी से मदद ले चुकी है. उनका कहना था कि २००३ में मायावती को हटाकर जो सरकार मुलायम सिंह यादव ने बनाई थी उसे बीजेपी का समर्थन मिला हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया कि मुलायम सिंह मुसलमानों के दोस्त नहीं हैं. उन्होंने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के मामले में सुप्रीम कोर्ट से दिन भर की सज़ा पा चुके कल्याण सिंह को अपने साथ लिया, उनको बुलंदशहर से लोकसभा का चुनाव जीतने में मदद की और अपनी पार्टी के आगरा अधिवेशन में कल्याण सिंह के जिंदाबाद के नारे लगाए. जबकि कल्याण सिंह बाबरी मस्जिद के विध्वंस के केस में अभियुक्त हैं.
दिग्विजय ने कहा कि इसी तरह से एक अन्य अभियुक्त साक्षी महाराज को मुलायम सिंह यादव ने राज्य सभा का सदस्य बनवाया. जब उनको याद दिलाया गया कि उनकी पार्टी की सरकार केंद्र में थी और बाबरी मस्जिद को ज़मींदोज़ कर दिया गया तो दिग्विजय सिंह बोले कि वह कांग्रेस पार्टी के नेता और प्रधान मंत्री पीवी नरसिम्हा राव से चूक हुई, वे कल्याण सिंह और बीजेपी को ठीक से समझ नहीं पाए. कांग्रेस पार्टी की सेकुलर छवि को उसके बाद बहुत नुकसान हुआ जिसका खामियाजा आज तक भुगता जा रहा है. उन्होंने दावा किया राजनीति में सक्रिय होने के बाद कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी, महासचिव राहुल गांधी और पार्टी के अन्य नेताओं ने उस भूल को ठीक करने की कोशिश की है. २००४ में जब केंद्र में यूपीए की सरकार बनी उसके बाद सच्चर कमेटी बनी, रंगनाथ मिश्रा कमीशन बना और अल्पसंख्यक मंत्रालय बनाया गया. इस सारे संगठनों का मकसद मुसलमानों को इंसाफ़ देना ही है. कांग्रेस ने पिछड़े मुसलमानों के लिए साढ़े चार प्रतिशत का आरक्षण दिया. दिग्विजय सिंह को उम्मीद है कि अब मुसलमान कांग्रेस की ६ दिसंबर १९९२ की भूल को भूल चुके हैं और उत्तर प्रदेश में मुसलमानों सहित सभी सेकुलर ताक़तें कांग्रेस के साथ हैं.
लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्ठ पत्रकार तथा जनसंदेश टाइम्स के रोविंग एडिटर हैं.