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मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया डॉट कॉम. यह पोर्टल अपनी विशिष्टता, बेबाकी, ईमानदारी, साहस, जन सरोकार के लिए जाना जाता है. भड़ास4मीडिया एक ऐसा न्यू मीडिया प्लेटफार्म है जो विशेष तौर पर मीडिया के अंदरखाने चलने वाले स्याह-सफेद को उजागर करता है, आम मीडियाकर्मियों के दुख-सुख का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही मुख्य धारा की कारपोरेट मीडिया द्वारा दबाई-छिपाई गई खबरों को प्रमुखता के साथ प्रकाशित प्रसारित कर पूरे मीडिया जगत का माइंडसेट तय करता है.

इस पोर्टल के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ( संपर्क: ) हैं जो करीब डेढ़ दशक तक दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे अखबारों में कार्यरत रहे. यशवंत ने मीडिया के भीतर के भ्रष्टाचार को उजागर करने हेतु वर्ष 2008 में इस पोर्टल को लांच किया. पत्रकारिता के मिशनरी तेवर को कायम रखने के उद्देश्य से अस्तित्व में आए इस हिंदी पोर्टल के साथ देशभर के हजारों अनुभवी, ईमानदार और सचेत मीडियाकर्मियों की टीम जुड़ी है जो खबरें भेजने से लेकर अपडेट करने तक का आनलाइन काम करते हैं. भड़ास4मीडिया न सिर्फ मीडिया जगत से जुड़ी सूचनाएं, खबरें, विश्लेषण प्रकाशित करता है बल्कि उन खबरों को भी तवज्जो देता है जिन्हें मुख्यधारा की कारपोरेट मीडिया अपने स्वार्थी हितों और भ्रष्टाचारियों से गठजोड़ के चलते दिखाता छापने से इनकार कर देता है.

भड़ास के संचालक यशवंत को इस बेबाक पोर्टल के संचालन के कारण दर्जनों धमकियों, मुकदमों, थाना-पुलिस के मामलों को झेलना पड़ा और एक बार 68 दिनों तक डासना जेल में बंद रहना पड़ा. अपनी जेल यात्रा पर यशवंत ने 'जानेमन जेल' नामक किताब लिखी जो बेहद लोकप्रिय हुई. भड़ास को बंद कराने के वास्ते मीडिया माफियाओं, नेताओं, नौकरशाहों, पुलिस, न्यायपालिका के बीच में गहरी सांठगांठ हुई जिसके बाद भड़ास के आफिसों पर छापे पड़े, कंप्यूटर जब्त कर लिए गए, यशवंत समेत उनके कंटेंट एडिटर को जेल भेज दिया गया. इन तमाम दमनात्मक कार्रवाइयों के बावजूद भड़ास टीम का हौसला पस्त नहीं हुआ. भड़ास पहले से ज्यादा तेवर में सच्ची और मिशनरी पत्रकारिता के रास्ते बढ़ चला है.

भड़ास का संचालन जनधन समर्थन के आधार पर किया जाता है. पब्लिक और शुभचिंतकों से मिले डोनेशन के जरिए भड़ास को जिंदा रखने का उपक्रम होता रहा है. पिछले आठ वर्षों से चंदे, डोनेशन और आर्थिक मदद के जरिए संचालित यह चर्चित पोर्टल खबरों को लेकर कभी किसी के सामने न झुका, न डरा. आर्थिक संकट की स्थिति आने पर किसी पूंजीपति, किसी भ्रष्ट अफसर, किसी भ्रष्ट नेता, किसी भ्रष्ट मीडिया हाउस के यहां गिड़गिड़ाने की बजाय अपने पाठकों से मदद की अपील करना ज्यादा बेहतर समझा. और, भड़ास से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सैकड़ों शुभचिंतकों ने त्वरित मदद कर संकट टालने का काम किया. आप खुद के स्तर पर अगर एक रुपये भी भड़ास को डोनेशन देते हैं तो यह समर्थन हमारे लिए बड़ा नैतिक समर्थन होता है. अगर आप भड़ास को इसी तेवर के साथ जिंदा रखना चाहते हैं तो अपनी क्षमतानुसार आर्थिक मदद करें. भड़ास का एकाउंट नंबर यूं है:

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Delhi-96,
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अगर आप भड़ास को आर्थिक सपोर्ट करते हैं तो इसकी जानकारी भड़ास के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह को उनकी निजी मेल आईडी पर जरूर भेजें. भड़ास तक आप कोई सूचना या जानकारी या खबर पहुंचाना चाहते हैं तो पर मेल भेजें. खबर भेजने वालों का नाम उनके अनुरोध को देखते हुए गोपनीय रखा जाता है.

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