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मुंबई। दैनिक दक्षिण मुंबई के मालिक ने यह अखबार अपना रौब और धाक जमाने के लिए शुरू किया था लेकिन कर्मचारियों को पैसे न देने और सर्कुलेशन मैनेजर संजय देसाई की गुंडागर्दी की नीति इस अख़बार को लील गई। देसाई किसी भी कर्मचारी को रख लेता है और बिना पैसा दिए भगा देता है। आलम यह है कि देसाई अपने आप को किसी मूर्धन्य संपादक से कम नहीं समझता है।

बताया जाता है कि देसाई ही मालिक को पत्रकारों के खिलाफ भड़काता है और उसी की चापलूसी की वजह से कर्मचारियों को बिना पगार दिए भगा दिया जाता है। यहाँ तक कि वह हाथापाई पर भी उतर आता है। वहींं कर्मचारियों को कई महीनों तक न तो ज्वाइनिंग लेटर दिया जाता है और न ही उन्हें सैलरी दी जाती है।

देसाई विज्ञापन दाताओं को भी गुमराह करता है। बताया जाता है कि अख़बार की बमुश्किल 4 -5 हज़ार कॉपी प्रकाशित होती है। लेकिन उन्हें 1 लाख से ऊपर कॉपी बताई जाती है। एक विज्ञापनदाता ने इस मामले में अख़बार मालिक के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कहीं है। बताया जाता है की देसाई कंपनी द्वारा स्ट्रिंगरों को दिवाली गिफ्ट के रूप में 500 -500 रुपए दिए गए थे। देसाई अपने चहेते लोगों को तो पैसा दे दिया लेकिन कुछ लोगों के पैसों को डकार गया।

देसाई को चमचा पालने का बहुत शौक है। अखबार में कुछ लोग सिर्फ उसकी चमचागिरी के कारण ही सैलरी पाते हैं। निकम्मे चमचों ने पूरे अखबार का बड़ा गर्क कर दिया है। देसाई जैसे अनुभवहीन लोगों ने की वजह से अख़बार की हालत खस्ता है।

दक्षिण मुंबई अखबार में कार्य कर चुके युवा पत्रकार श्याम दांगी की रिपोर्ट. संपर्क:

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