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वर्धा : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के स्त्री अध्ययन के विभागाध्यक्ष व सुप्रसिद्ध साहित्य आलोचक डॉ. शंभु गुप्त को वर्ष 2011 का ‘अर्जुन कवि जनवाणी पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने का निर्णय हुआ है। 1991 में सर्वाधिक दोहा रचने वाले कवि अर्जुन का नाम गिनीज बुक में दर्ज है, उनकी स्मृति में यह सम्मान दिया जा रहा है। आगामी 17 दिसम्बर को डॉ. शंभु गुप्त को जयपुर में आयोजित विशेष समारोह में 11 हजार नगद राशि, सम्मान चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, शॉल श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। साहित्यिक जगत के भगवान दास, आलोचक राजाराम भादू, कथाकार चरणसिंह पथिक अर्जुन कवि जनवाणी सम्मान के ज्यूरी कमिटी में थे।
गौरतलब है कि सन 1954 में राजस्थान के भरतपुर जिले के हलैना गांव में जन्मे डॉ. गुप्त ने आगरा विवि से उच्च शिक्षा ग्रहण की। करीब तीन दशक से अध्यापन कार्य करते हुए उन्होंने कलम को समाज के शोषण के प्रति हथियार के रूप में प्रयोग किया। यही कारण है उनके लेखन का सरोकार समाज के हाशिये के लोगों के साथ है। उनकी मार्क्सवादी आलोचना दृष्टि रूढ़ नहीं अपितु गतिशील है, वस्तुत; हिंदी में भूमंडलीकरण का प्रभाव व प्रतिरोध की तीव्रता और तीक्ष्णता यदि वे महसूस करते हैं तो यह साहित्य के प्रति उनका गहरा अनुराग है। समकालीन आलोचना की चुनौतियों को परखते हुए उनका यह प्रयास रहता है कि कैसे हिंदी आलोचना को बाजारवादी प्रवृतियों से उबारकर समाज सापेक्ष बनाया जाय। ‘मैंने पढ़ा समाज’, कहानी: समकालीन चुनौतियां’, ‘दो अक्षर सौ ज्ञान’ आदि पुस्तकों सहित तकरीबन दो सौ से अधिक आलेख लिखने वाले डॉ. गुप्त वर्ष 1994 में अभिव्यक्ति पत्रिका द्वारा युवा आलोचक पुरस्कार, 2008 में रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान, 2009 में स्पंदन आलोचना सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं।
डॉ. गुप्त को अर्जुन कवि जनवाणी पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति व सुप्रसिद्ध साहित्यकार विभूति नारायण राय ने अपने बधाई संदेश में कहा कि डॉ. शंभु गुप्त अपने समय के महत्वपूर्ण आलोचक हैं। उनकी आलोचना में समय के संघर्ष और चुनौतियां साफ-साफ दिखाई देती हैं। उनके सरोकार मानवीय पक्षधरता को लेकर है। उन्हें यह सम्मान मिलना न केवल उनकी आलोचना की पहचान के लिए महत्वपूर्ण है अपितु हमारे विश्वविद्यालय के लिए भी यह एक गौरवपूर्ण क्षण है। विवि के अध्यापक, कर्मी व शोधार्थी तथा विद्यार्थियों ने डॉ. गुप्त को बधाई दी है।