Category: आवाजाही, कानाफूसी, सुख-दुख, इंटरव्यू... Published on Thursday, 02 February 2012 17:03 Written by B4M
दैनिक जागरण में जाने क्या हो गया है कि जगह जगह इसके पत्रकार आपस में लड़ते भिड़ते दिख रहे हैं. इलाहाबाद आफिस में जमकर लड़ाई हुई. पटना से भी लड़ाई होने की खबर आई. अब सूचना है कि दैनिक जागरण के नोएडा आफिस में भी जमकर तूतूमैंमैं हो गई है. दैनिक जागरण के अंग्रेजी पोर्टल जागरणपोस्ट के एडिटर अविनाश झा और यहीं काम करने वाले अंजनी के बीच किसी बात को लेकर तकरार हो गई. सूत्रों के मुताबिक अंजनी के कामकाज को लेकर अविनाश झा खुश नहीं रहा करते हैं. उन्होंने किसी बात पर उन्हें डांट दिया. कहने वाले कहते हैं कि उन्होंने गाली दे दी. इससे अंजनी भड़क गए और अविनाश पर बरस पड़े.
यह सब सबके सामने हुआ. संजय गुप्ता और प्रगति गुप्ता की केबिन के आसपास हुए इस घटनाक्रम ने इतना तूल पकड़ा कि अंजनी ने अविनाश को पकड़कर संपादक की केबिन की ओर ले जाने लगे. किसी तरह से दोनों को शांत कराया गया. सूत्रों के मुताबिक जागरण में शीर्ष पदों पर बैठे लोग अपने अधीनस्थों से ठीक व्यवहार नहीं करते, इस कारण असंतोष पैदा होता है. उधर, कई ऐसे लोगों की सिफारिश से नियुक्ति कर दी जाती है जिन्हें काम अच्छा नहीं होता लेकिन सिफारिशी होने के कारण उन्हें उनका इंचार्ज अपने यहां से हटा भी नहीं सकता. इस कारण दोनों में असंतोष पैदा हो जाता है और अंदरुनी टकराव चलता रहता है.
प्रबंधन जहां अपने प्रभारियों से अच्छा रिजल्ट चाहता है, लेकिन वो यह नहीं देखता कि उनके प्रभारियों के पास जो टीम है, उसमें जाने कितने लोग सिफारिशी हैं जिन्हें काम ठीक से नहीं होता. पैर छूने वालों, रिश्तेदारों, नजदीकी लोगों, सिफारिशियों को नौकरी देने और उन्हें संरक्षण प्रदान करने के चलन से डेस्क इंचार्जेज व प्रभारियों को ऐसे उच्च स्तरीय संरक्षण प्राप्त लोगों से काम लेना मुश्किल हो जाता है. उधर, कहने वाले यह भी कहते हैं कि अधिकार मिल जाने के कारण कई बार प्रभारी व इंचार्ज भी बेलगाम हो जाते हैं और अपने अधीनस्थों से गुलामों जैसा व्यवहार करने लगते हैं. कम से काम बोलचाल में तो शालीनता बरतनी चाहिए. गालीगलौज की भाषा के कारण अधीनस्थ आपा खोकर अपने प्रभारी से भड़ जाते हैं. जो भी हो, फिलहाल जागरण के कर्ताधर्ता अपनी यूनिटों में आए दिन होने वाले झगड़ों-बवालों से काफी परेशान हैं.