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Umashankar Mishra : सक्रिय पत्रकारिता के 11.6 वर्षों के सफर में से 6.6 साल अमर उजाला के साथ गुजारे और अब अनुभवों की वह गठरी लेकर एक नए पड़ाव की ओर बढ़ रहा हूं। इस बीच बहुत से लोगों ने एहसास दिलाने की कोशिश कि पहचान पद और पैसे से जुड़ी होती है, मैं नजरंदाज कर काम करता रहा। करीब आठ साल से नया घर खरीदना चाहता था।

सही वक्त और किस्मत के फैसले का इंतजार किया और पिछले साल सितंबर में वक्त ने साथ दिया, तो घर भी ले लिया। कल एक दोस्त ने कहा कि संघर्ष का एक अध्याय खत्म हो गया, तो लगा कि वास्तव में ऐसा ही है शायद, वर्ना मैं तो कल पहली बार नए दफ्तर गया और हर रोज की तरह काम करता रहा। किसी ने कहा सेल्फी तो भेजो, वह भी न भेज सका। खुशी इस बात की थी कि पांच बजे छुट्टी होगी तो ढलती हुई शाम देखूंगा। बहरहाल, विज्ञान प्रसार (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार) में एक नई पारी की शुरुआत।

उमाशंकर मिश्रा की एफबी वॉल से.

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