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मीडिया खबर -
कहिन
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Written by यशवंत सिंह
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Monday, 17 November 2008 10:58 |
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थैंक्स दोस्तों! शुक्रिया साथियों!! धन्यवाद आपका!!! भड़ास4मीडिया को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचाने के लिए। इस साल 22 जून से शुरू हुए इस पोर्टल की उम्र पांच माह होने में अभी पांच रोज बाकी है लेकिन इसने एक रिकार्ड कायम कर लिया है। यह रिकार्ड है पांच महीनों में 12 लाख पेज हिट्स पाने का। औसत के लिहाज से बात करें तो इस पोर्टल के हिस्से में हर माह लगभग सवा दो लाख पेज हिट्स आते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इतने कम समय में, बिना किसी ब्रांडिंग, मार्केटिंग व अन्य तकनीकी बाजागरी के, इस रिकार्ड को हासिल करने का श्रेय हिंदी पोर्टलों में केवल भड़ास4मीडिया को जाता है।
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मीडिया खबर -
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Written by आलोक नंदन
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Sunday, 16 November 2008 01:22 |
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जालंधर में अमर उजाला की लैबोरेटरी से
भाग (1), (2), (3), (4), (5), (6), (7), (8) से आगे सुबह तीन बजे ट्रेन जालंधर प्लेटफार्म पर रुकी। ट्रेन से बाहर निकलते ही हवा में ठंडक का अहसाह हुआ। सामान के नाम पर एक छोटा सा बैग था। सांसों में गर्मी लाने के लिए मैं प्लेटफार्म पर ही एक चाय की दुकान की ओर बढ़ चला। प्लेटफार्म पर दैनिक जागरण के बड़े-बड़े होर्डिंग चारों तरफ दिखाई दे रहे थे, अमर उजाला का कहीं नामो-निशान नहीं था। |
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मीडिया खबर -
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Written by आलोक नंदन
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Sunday, 09 November 2008 05:10 |
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(1), (2), (3), (4), (5), (6), (7) से आगे..
कारगिल की चोटियों पर भारतीय सेना और घुसपैठियों के बीच लड़ाई शुरू हो चुकी थी। इसका स्पष्ट प्रभाव दिल्ली में चारो तरफ दिखाई दे रहा था। बरखा दत्त का नाम इसी समय मनीष सिन्हा के मुंह से सुना। उसने उत्साह से बताया था, 'बरखा भारतीय सैनिक ठिकाने से बाहर निकल कर रिपोर्टिंग करने लगी थीं। एक सैनिक ने उसे खींचकर अंदर किया।' मेरे मुंह से निकला, 'यदि उस सैनिक की जगह मैं होता तो उसे सीधे घाटी में फेंक देता।' |
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मीडिया खबर -
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Written by अशोक कुमार
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Saturday, 08 November 2008 03:29 |
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आज जब लिखने बैठा हूं तो गोरखपुर पहुंच चुका हूं। इलाहाबाद के अनुभवों से शुरुआत करता हूं। प्रयाग की पावन भूमि पर उतरने के बाद हम लोग बचपन के मेरे मित्र और आईसीआईसीआई बैंक में कार्यरत देवेंद्र त्रिपाठी के यहां जाकर रुके। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हस्ताक्षर शिविर सुबह 10 बजे लग गया। यह 2 बजे तक चला। छात्रों ने भरपूर सपोर्ट दिया। हस्ताक्षर करने के बाद एक लड़की हमारे साथी अमित चौधरी के पास आई। उसने कहा- बहुत अच्छा काम कर रहे हैं आप लोग। मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। भगवान आपको जरूर कामयाबी देगा। उसने बेस्ट आफ लक कहा और चली गई। ऐसी ही ढेरों शुभकामनाएं साथ लेकर हम लोग 7 नवंबर की सुबह काशी के लिए रवाना हो गए। चलते वक्त मेरे मित्र देवेंद्र ने मेरी जेब में 'चंदा है' कहते हुए एक बड़ा नोट डाल दिया। |
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Written by अशोक कुमार
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Friday, 07 November 2008 01:30 |
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जब हम 3 नवंबर को सुल्तानपुर स्टेशन पर उतरे तो स्टूडेंट फेडरेशन आफ इंडिया के सदस्य हमारा इंतजार कर रहे थे। उनमें भी वही जोश दिखा जो हम 1 नवंबर को अलीगढ़ से लेकर चले। राज ठाकरे के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान में हमें यहां 1000 सिगनेचर मिले। पर इन एक हजार हस्ताक्षरों में से मेरे लिए दर्जन भर हस्ताक्षर ज्यादा महत्वपूर्ण थे। जानते हैं क्यों? इन दर्जन भर लोगों ने कलम की बजाय अंगूठे से साइन किया। इन अपढ़ लोगों ने अपनी जिम्मेदारी को समझा, हमारी संवेदना को समझा, हमारी मुहिम को स्वीकारा। |
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