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'बाबा जलते रहे और पत्रकार फिल्म बनाते रहे'

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बाबा की समाधि का दृश्यधन्य है यह देश और इसके पत्रकार : मध्य प्रदेश के मुरैना में बाबा की समाधि ने लोगों के अंधविश्वास की सीमा को पार कर दिया है। आत्महत्या करना एक अपराध है, फिर वो चाहे किसी भी रूप में क्यों न हो। लेकिन मुरैना के लोगों ने बाबा की समाधि को जलते हुए देखा पर कोई भी आग बुझाने नहीं आया। यहां तक कि वहां पर पुलिसकर्मी भी मौजूद थे और पत्रकार भी। पुलिस वाले मूकदर्शक बने हुए थे और पत्रकार जलते हुए बाबा की फिल्म बना रहे थे। पत्रकारों के लिए खबर करना कर्तव्य है लेकिन जब पूरा कुनबा अंधविश्वास में लिप्त हो तो कम से कम पत्रकारों को इस अंधविश्वास से दूर करते हुए बाबा की अग्नि को बुझाने का प्रयास करना चाहिए था। लेकिन ऐसा किसी ने भी नहीं किया। पुलिसकर्मियों में तो कुछ ऐसे भी थे जो बाबा की समाधी को जलते हुए देखकर हाथ जोड़ कर प्रणाम कर रहे थे। साथ-साथ उनकी अपने मोबाइल से फिल्म बना रहे थे।

पुलिस का पहला कर्त्तव्य था कि तुरंत बाबा की आग को बुझाते लेकिन इन अंधविश्वासियों ने तो बाबा के शरीर को पोस्टमार्टम के लायक भी नहीं छोडा। ऐसी शर्मनाक घटना ने वास्तव में ये तो ज़रूर बता दिया है कि आज भी भारत में अंधविश्वास के जड़ कितने गहरे हैं। धन्य है यह देश और धन्य है इस देश के पुलिसवाले और पत्रकार।

-सैय्यद आमिर हुसैन

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