इंटरव्यू : एडवोकेट अजय मुखर्जी 'दादा' : एक ही जगह पर तीन तीन तरह की वेतन व्यवस्था : अखबारों की तरफ से मुझे धमकियां मिलीं और प्रलोभन भी : मालिक करोड़ों में खेल रहे पर पत्रकारों को उनका हक नहीं देते : पूंजीपतियों के दबाव में कांट्रैक्ट सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है : जागरण ने अपने पत्रकारों का काशी पत्रकार संघ से जबरिया इस्तीफा दिलवा दिया :
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: साहित्य में शोषितों की आवाज मद्धिम पड़ी : अब कोई पक्ष लेने और कहने से परहेज करता है : अंधड़-तूफान के बाद भी जो लौ बची रहेगी वह पंक्ति में स्थान पा लेगी : समाज को ऐसा बनाया जा रहा है कि वह सभी विकल्पों, प्रतिरोध करने वाली शक्तियों से कट जाए :
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इंटरव्यू : हृदयनाथ मंगेशकर (मशहूर संगीतकार) : मास एक-एक सीढ़ी नीचे लाने लगता है : जीवन में जो भी संघर्ष किया सिर्फ ज़िंदगी चलाने के लिए किया, संगीत के लिए नहीं : आदमी को पता चलता ही नहीं, सहज हो जाना : बड़ी कला सहज ही हो जाती है, सोच कर नहीं : इतने लोगों से सीखा है कि अगर सबका गंडा बांध लेता तो हाथ भर जाता मेरा : लता मंगेशकर की सफलता से मेरा कोई संबंध नहीं है, मैं कभी उसका हाथ पकड़ कर चला ही नहीं : राज ठाकरे का निर्माण मराठियों ने नहीं, मीडिया ने किया है : अगर मेरे पिता जीवित रहते, हमारा बचपन अनाथ न होता तो हमारे परिवार में कोई भी प्ले बैक सिंगर नहीं हुआ होता, लता मंगेशकर भी नहीं : छः साल छोटी है दीदी से आशा, फिर भी आवाज़ मोटी हो गई है, दीदी की वैसी ही है जैसी पहले थी : ढाई हज़ार से अधिक बंदिशें याद हैं, इन्हें सहेज कर रख जाना चाहता हूं :
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इंटरव्यू : मुकेश कुमार (वरिष्ठ पत्रकार और निदेशक, मौर्य टीवी) : टेलीविज़न में ज़्यादातर काम करने वालों के पास न तो दृष्टि होती है न ज्ञान : 'सुबह सवेरे' की लोकप्रियता का आलम ये था कि हर दिन बोरों मे भरकर पत्र आते थे : सहारा प्रणाम के चक्कर में प्रभात डबराल जी से बोलचाल बंद है : लाँच के वक्त सुब्रत रॉय का संदेश चलने के बजाय उनके मेकअप के शाट्स चलने लगे : विजय दीक्षित ऐसे लोगों के चंगुल में फँस गए जिन्होंने चैनल को ठिकाने लगा दिया : वीओआई में मालिकान ने तय किया कि ख़बरों का धंधा कराना है तभी मैंने इस्तीफा देने का फैसला कर लिया : टीआरपी की वजह से कंटेंट घटिया हुआ, मीडिया की साख गिरी है, पत्रकार-पत्रकारिता बदनाम हुए हैं : मीडिया की सबसे बड़ी खराबी है समाज-सरोकारों से हटना : मुझमें सबसे बड़ी बुराई है साहस की कमी : हिंदी का अंतरराष्ट्रीय स्तर का अंतरराष्ट्रीय चैनल शुरू करना-चलाना चाहता हूँ :
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इंटरव्यू : एनके सिंह (वरिष्ठ पत्रकार) : ईटीवी की व्यूवरशिप बहुत है पर टीआरपी नहीं, ऐसा फाल्टी टीआरपी सिस्टम के कारण : ईटीवी से अलग होना मेरा खुद का फैसला, नाराजगी बिलकुल नहीं है : मैं बहुत डिसीप्लीन्ड आदमी हूं :
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इंटरव्यू : सुप्रिय प्रसाद (न्यूज डायरेक्टर, न्यूज 24) : पार्ट 2 : जिद छोड़िए, खबरों की बदलती दुनिया को समझिए : कई गड़बड़ियां मुझसे भी हुई हैं, इसे मैं स्वीकार करता हूं : कुछ लोगों को अब भी लगता है कि खबरें वैसे ही दिखाई जानी चाहिए जैसी पंद्रह बीस साल पहले दिखाई जाती थीं : चाहे टीआरपी का दबाव हो या न हो, सरकारी कोड़ा हो या न हो, समय के साथ खबरें तो बदलेंगी ही : किसी एक चैनल की गड़बड़ी से पूरे मीडिया को गैर-जिम्मेदार नहीं बताया जा सकता : जिन लोगों ने मेरे साथ काम किया है, वे आज भी मेरे साथ काम करना चाहते हैं : सुबह घर से निकलता हूं तो दिन भर का रनडाउन दिमाग में तय करके जाता हूं : हमारे चैनल का डिस्ट्रब्यूशन और मार्केटिंग कुछ हद तक उस तरीके से नहीं हो पाया जैसे दूसरों का है : न्यूज कंटेन्ट के मामले में राजीव शुक्ला जी का कोई दखल नहीं है : 24 घंटे के न्यूज चैनल का कामयाब प्रोड्यूसर तो मुझे उदय शंकर जी ने बनाया : टीवी पूरी तरह से एक टीम वर्क है और टीम वर्क में सभी को साथ काम करना होता है :
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इंटरव्यू : सुप्रिय प्रसाद (न्यूज डायरेक्टर, न्यूज 24) : पार्ट 1 : टीवी न्यूज इंडस्ट्री के ऐसे धुरंधर हैं सुप्रिय प्रसाद जो बेहद कम समय में सफलता की उस उंचाई पर पहुंच गए जहां जाने की हसरत हर एक टीवी जर्नलिस्ट पाले होता है। आईआईएमसी से पास किया और सीधे आजतक में घुस गए। धीरे-धीरे इतना बढ़ गए कि पूरे आज तक को कंट्रोल करने लगे। कौन-सी खबर चलनी है, किसे गिरा देना है, इसका मंत्र सुप्रिय देने लगे। किस खबर से टीआरपी आएगी, किससे नहीं, इसका वाचन सुप्रिय करने लगे। कैसे दूसरे न्यूज चैनलों को आगे न बढ़ने दिया जाए, इसकी रणनीति सुप्रिय तैयार करते। सुप्रिय ने एसपी, नकवी, उदय शंकर जैसे कई दिग्गजों से बहुत कुछ सीखा तो अपने से ज्यादा अनु्भवी व उम्रदराज कई दिग्गजों को बहुत कुछ सिखाया भी।
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इंटरव्यू : सुभाष राय : वरिष्ठ पत्रकार और संपादक (विचार), डीएलए : भाग दो : कई मामलों पर असहमतियों के कारण मुझे शशि शेखर से अलग होना पड़ा था : गलत लोग हर दौर में आगे बढ़े पर वे नष्ट भी हुए : कई बार ऐसा लगता है कि शब्द से भी आगे जाने की जरूरत है : मीडिया के लिए कठिन समय, पत्रकार को नयी भूमिका तलाशने का वक्त है : तब लगता था कि हम वही काम कर रहे हैं जो कभी भगत-सुभाष-चंद्रशेखर ने किया : गुरु चंद्रनाथ योगेश्वर ने तांत्रिक दीक्षा दी, मिथुन भाव वर्जित था पर मद्य, मांस, मत्स्य, मुद्रा के प्रयोग की इजाजत : मैं नाथ पंथ का योगी 'सुभाषानंदनाथ' घोषित हो गया : इलाहाबाद ने मेरे जेहन से संघ के प्रभाव को खत्म कर दिया : फिर तो लगा कि उनके शरीर से एक मधुर विद्युत धार मेरे शरीर में प्रवेश कर रही है : मैं बहुत सक्रिय और आलसी प्रवृत्ति का हूं : ज्यादा भगदड़ व भागदौड़ पसन्द नहीं करता : मैं पूरी दुनिया घूमना चाहता हूं, धीमी गति से चलने वाले वाहन से : सफलता के लिए जीवन में हमेशा असंतुष्ट रहने की सोच अधकचरी : खाने और पीने में न किसी को पकड़ा है और न किसी को छोड़ा है :
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