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यूपी के बंटवारे पर उठे सवालों को दरकिनार किया मायावती ने

: सवाल का सामना नहीं, नजीर चाहती हैं मायावती : उत्‍तराखंड के गठन वाली प्रक्रिया अपनाने की मांग : लखनऊ: यूपी की मुख्‍यंत्री मायावती ने आज प्रदेश के बंटवारे पर उठे सवालों का जवाब न देने की ठान ली है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा प्रदेश के विभाजन पर पूछे गये सवालों को दरकिनार करते हुए मायावती ने कह दिया कि इस बारे में विधानसभा द्वारा भेजे गये प्रस्‍ताव को उसी तरह लागू किया जाना चाहिए, जैसा उत्‍तराखंड के गठन के समय हुआ था। केंद्र से लौटाये गये प्रस्‍ताव पर बौखलायी मुख्‍यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीयत ठीक नहीं है।

गौरतलब है कि केंद्र ने प्रदेश सरकार के इस प्रस्‍ताव को वापस करते हुए करीब एक दर्जन सवाल दागे थे, जिनमें खासतौर पर यह सूचना चाही गयी थी कि यूपी के मत्‍थे चढ़े करीब तीन लाख करोड़ के कर्ज की अदायगी की प्रक्रिया क्‍या होगी। मसलन प्रदेश विभाजन के समय किस क्षेत्र पर कितना कर्ज अदा करने का जिम्‍मा सौंपा जाएगा। नौकरशाही के बंटवारे पर भी सवाल दागे गये थे। जाहिर है कि यह सवाल मायावती के गले में हड्डी की तरह ही फंस गये हैं। ऐसे में वे इन सवालों का जवाब दे पाने की हालत में ही नहीं हैं। कारण यह कि चुनावी माहौल में वे कर्ज अदायगी की बात का खुलासा अगर कर देती हैं तो उनके लिए पहले से ही टेढ़ी खीर बनता जा रहा यह चुनाव सारा कुछ गुड़गोबर कर देगा।

ऐसे में अपनी जान छुड़ाने के लिए मायावती ने आज आननफानन बुलायी गयी एक प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि केंद्र ने यह सवाल मामला लटकाने के लिए पूछा है और इसका मसौदा प्रेस को जारी करने के पीछे केंद्र का मकसद केवल प्रदेश में गलतफहमियां पैदा करना ही है। उनका आरोप है कि प्रदेश का विभाजन न करके केंद्र सरकार विकास की जरूरतों पर लापरवाही बरत रही है। मायावती अब चाहती हैं कि उनसे इस बारे में सवाल पूछने के बजाय केंद्र सरकार सीधे वह तरीका अपनाये जो उत्‍तराखंड के मसले पर सन 1997 में अपनाया गया था।

लखनऊ से कुमार सौवीर की रिपोर्ट

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