A+ A A-

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सरकारी विज्ञापनों के लिए आवंटित राशि हासिल करने की खातिर कथित तौर पर 'फर्जीवाड़े और गबन' में शामिल होने को लेकर 277 प्रकाशनों के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई शुरु करने का फैसला किया है. विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) द्वारा मौके पर की गयी जांच में प्रकाशन एवं प्रसार संबंधी आंकड़ों में व्यापक अनियमितताएं मिलने के बाद लखनऊ और दिल्ली के करीब 277 प्रकाशन मंत्रालय के निशाने पर हैं.

एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि यह जांच दिल्ली और लखनऊ में की गयी तथा पता लगा कि इन प्रकाशनों द्वारा मुहैया कराए गए ब्यौरे बड़े स्तर पर गुमराह करने वाले हैं. उन्होंने कहा कि मंत्रालय का मानना है कि ये 277 प्रकाशन सरकारी राशि के गबन और धोखाधड़ी में शामिल हैं. सूत्रों ने कहा कि दिलचस्प है कि मंत्रालय के निशाने पर जो 277 प्रकाशन हैं उनमें से 70 एक ही प्रिंटिंग प्रेस से प्रकाशित होते हैं.

उन्होंने कहा कि इस बात की पूरी आशंका है कि इन प्रकाशनों ने डीएवीपी से सरकारी विज्ञापनों की राशि हासिल करने के लिए अनुचित तरीकों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और उन प्रकाशनों से राशि वसूलने के प्रयास किए जाएंगे. सूत्रों ने कहा कि इसके साथ ही, जांच के आधार पर इन प्रकाशनों के स्वामियों, मुद्रकों और प्रकाशकों के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज कराने के लिए डीएवीपी को भी निर्देश दिए गए हैं.

समझा जाता है कि सरकारी विज्ञापनों के प्रचार के लिए 2015-16 में इन प्रकाशनों को करीब 1.95 करोड़ रुपए दिए गए जबकि 2016-17 में करीब 1.19 करोड़ रुपए दिए गए.

Leave your comments

Post comment as a guest

0
Your comments are subjected to administrator's moderation.
terms and condition.
  • No comments found

Latest Bhadas