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मजीठिया वेतनमान पाने के लिए सबसे पहले आपको श्रम विभाग में आवेदन करना पड़ेगा। इसके लिए सीए रिपोर्ट तो और अच्छी बात है नहीं तो खुद ही अपना शेष बकाया निकाल कर श्रम विभाग में निवेदन कर सकते हैं। हालांकि 17 (1) के तहत आवेदक को कही-कही श्रम विभाग निर्धारित प्रारूप में आवेदन मांगता है। कोशिश करें कि यहां प्रकरण का निराकरण हो जाए, कोर्ट ना जाए। कोर्ट प्रकरण तब जाता है जब किसी बात ऐसा विवाद हो जाता है जिससे क्लेम की विश्वसनियता या कर्मचारी ना होने या किसी अनसुलझे मुद्दे पर विवाद हो जाता है।

यदि आप नौकरी कर रहे हैं तो बेहतर होगा कि खुद क्लेम ना लगाकर किसी जर्नलिस्ट संगठन के माध्यम से क्लेम लगवाएं। गु्रप में जाने पर श्रम अधिकारी पर दबाब बनेगा। चूंकि श्रम विभाग भ्रष्टाचार का गढ़ है ऐसे में विभाग की आडिट रिपोर्ट, कैश पंजी आदि को आरटीआई के माध्यम से मांग कर श्रम अधिकारी पर अपना दबाब बनाए रखे। और कोशिश करें कि श्रम पदाधिकारी आपके पक्ष में रिकवरी आर्डर जारी कर दे। और उसके बाद तय समय के बाद कलेक्टर से मिलकर आरआरसी अर्थात् वसूली पत्रक जारी करा ले। इसके बाद कुर्क कराने में भी कलेक्टर व तहसीलदार से मिलते रहे।

फिर भी यदि श्रम कोर्ट मामला पहुंचा तो यहां भी श्रम न्यायालय कार्यालय में आरटीआई लगाकर जज को डराकर रखें। कोर्ट की आरटीआई में आप फैसले पर आपत्ति छोड़कर कुछ भी पूछ सकते हैं। जैसे 17 (2) के तहत प्रकरण के निराकरण की सीमा, अपने केस में देरी क्यों हो रही है। यहां भी आडिट रिपोर्ट पूछ सकते हैं। यदि जज भ्रष्टज्ञचार लगे तो केस अन्य न्यायालय में ट्रांफर करा ले। इसके लिए आवेदन लिखकर दें कि आपसे मुझे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है इसलिए प्रकरण अन्य न्यायालय में स्थानांतरित करने की अनुमति प्रदान करें। इससे जिले में पास के लिए में प्रकरण ट्रांसफर हो सकता है।

हालांकि यह कदम अंत में उठाया जाता है क्योंकि ऐसा लिखकर देने से जज की नौकरी संकट में आ सकती है। कोर्ट में इस बात का भी ध्यान रखें कि आप जो आवेदन या निवेदन कर रहे हैं उसे नोटसीट में लिखा जा रहा है या नहीं। कई बार जज आपके महत्वपूर्ण बात को इंगनोर कर अनावेदक को लाभ देने का प्रयास करते हैं। हांईकोर्ट जाने रजिस्टार जनरल से शिकायत करने की चेतावनी से निचली कोर्ट के जज डरते हैं।

ध्यान रखें कि ऐसे कदम उठाए जो सशक्त हो और खुद को नुकसान ना पहुंचे इसलिए गुमनाम से क्लेम लगाना, संगठन के माध्यम से क्लेम लगाना ज्यादा हितकर होगा। सीधे न्यायालय ना जाए यहां आईडी एक्ट के तहत पहले श्रम विभाग जाने की सलाह देते हुए आपका आवेदन निरस्त किया जा सकता है वह भी दो साल बाद। इसलिए पहले श्रम विभाग जाए।

maheshwari mishra

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