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बरेली से बड़ी खबर आ रही है कि उपश्रमायुक्त ने हिन्दुस्तान के महाप्रबंधक और स्थानीय संपादक के खिलाफ मजीठिया बेज बोर्ड के अनुसार तीन कर्मचारियों के वेतन व एरियर की बकाया वसूली के लिए आरसी जारी कर जिलाधिकारी को भेज दी है। हिन्दुस्तान प्रबंधन को सोमवार को श्रम न्यायालय में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस खबर से हिन्दुस्तान के उच्च प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। हालांकि हिन्दुस्तान प्रबंधन सोमवार को आरसी का आदेश रिसीव होने तक उसे रुकवाने के लिए आला अफसरों के जरिये दबाव बनाने में लगा रहा।

हिन्दुस्तान बरेली के चीफ रिपोर्टर पंकज मिश्रा, सीनियर कॉपी एडिटर मनोज शर्मा, सीनियर सब एडिटर निर्मलकांत शुक्ला, चीफ कॉपी एडिटर सुनील कुमार मिश्रा, सीनियर कॉपी एडिटर रवि श्रीवास्तव, पेजीनेटर अजय कौशिक ने माह सितम्बर, 2016 में श्रमायुक्त को शिकायत भेजी थी कि उनको मजीठिया बेज बोर्ड के अनुसार वेतन भत्ते आदि नहीं मिल रहे हैं।

इस शिकायत को श्रमायुक्त ने निस्तारण के लिए उपश्रमायुक्त बरेली को भेज दिया। नोटिस जारी होने पर प्रबंधन की धमकियों और दबाव के चलते सुनील मिश्रा, रवि श्रीवास्तव और अजय कौशिक ने डीएलसी के समक्ष उपस्थित होकर शिकायत वापस ले ली जबकि बरेली से मजीठिया की लड़ाई की रणनीति सुनील मिश्रा ने तैयार की थी और शिकायत करने के लिए लोगों को प्रेरित किया था।

चार माह तक चली सुनवाई के दौरान प्रबंधन की ओर से क्लेमकर्ताओं को डराया व धमकाया भी गया लेकिन क्लेमकर्ता इस लड़ाई से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इसी बीच सीनियर सब एडिटर राजेश्वर विश्वकर्मा भी मजीठिया की लड़ाई में उतर गए। हालात यह हैं कि हिन्दुस्तान बरेली में मजीठिया की आग अंदर ही अंदर धधक रही है। लगभग 50 फीसदी कर्मचारी अपना क्लेम बनवाकर पूरी तैयारी में हैं और लगातार मजीठिया की लड़ाई लड़ रहे लोगों के सम्पर्क में हैं।

सुनवाई की पिछली तारीख 25 मार्च को भी प्रबंधन की ओर से मौजूद एचआर मैनेजर सत्येन्द्र अवस्थी ने मामले को लंबा खींचने के लिए तमाम कोशिशें कीं लेकिन क्लेमकर्ताओं के आगे उनकी एक न चली। डीएलसी ने उसी दिन प्रबंधन को साफ कर दिया कि आपका पक्ष सुन लिया गया है और भी कुछ कहना है तो आज ही पत्रावली पर लिखा दीजिए। इस पर प्रबंधन के प्रतिनिधि सत्येन्द्र अवस्थी ने लिखित बयान दिया कि अब प्रबंधन की ओर से इस प्रकरण में कुछ भी कहना शेष नहीं है। डीएलसी ने सुनवाई पूरी घोषित कर फाइल को आदेश पर ले लिया।

सोमवार को डीएलसी ने दोनों पक्षों को बुलवाकर अपना फैसला सुना दिया। डीएलसी रोशन लाल ने अपने फैसले में प्रबंधन के इस तर्क को अमान्य करार दिया कि क्लेमकर्ता वर्किंग जर्नलिस्ट नहीं बल्कि प्रबंधकीय व प्रशासकीय कैडर के हैं। डीएलसी ने क्लेमकर्ताओं के दाखिल क्लेम को सही करार देते हुए चीफ रिपोर्टर पंकज मिश्रा के पक्ष में 25,64,976 रूपये, सीनियर कॉपी एडिटर मनोज शर्मा के पक्ष में 33,35,623 रूपये और सीनियर सब एडिटर निर्मलकांत शुक्ला के पक्ष में 32,51,135 रूपये की वसूली के लिए हिन्दुस्तान बरेली के महाप्रबंधक/यूनिट हेड और स्थानीय संपादक के नाम आरसी जारी करके जिला अधिकारी, बरेली को भेज दी है।

डीएलसी का फैसला आने के बाद हिन्दुस्तान के उच्च प्रबंधन में हड़कंप मच गया। हिन्दुस्तान के आला अधिकारी रविवार शाम से ही बरेली में डेरा डालकर गुप्त बैठकें करके ऐनकेन प्रकारेण आरसी जारी होने से से रूकवाने के लिए रणनीति बनाते रहे लेकिन डीएलसी का फैसला आते ही उनके चेहरे लटक गए। दूसरी ओर, हिन्दुस्तान बरेली के सीनियर कॉपी एडिटर राजेश्वर विश्वकर्मा के दाखिल क्लेम पर उपश्रमायुक्त ने मंगलवार को संपादक को सुनवाई के लिए तलब किया है।

पूरे मामले को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें...

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  • Guest - के के चौहान

    शशि शेखर बह आदमी है जो पहले अमर उजाला को बर्बाद कर चुका है अब हिंदुस्तान को बर्बाद कर देगा

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