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भारत में मीडिया पर मोदी राज के खौफ को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाएं शुरू हो गई हैं. न्यूयार्क टाइम्स ने लिखा है कि 2014 में जबसे मोदी ने सत्ता संभाली, भारत के पत्रकारों को काफी दबाव का सामना करना पड़ रहा है. न्यूयार्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकालमें भारत के मीडिया में एक नए तरह का खौफ है. इन छापों ने भारतीय मीडिया के लिए खतरे की घंटी बजा दी है.

सबसे हास्यास्पद बात ये है कि न्यूयार्क टाइम्स के आरोपों का जवाब केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने दिया है, जो खुद सरकारी तोता के नाम से कुख्यात है. सीबीआई ने न्यूयार्क टाइम्स को पत्र लिखकर कहा है कि भारत को न्यूयार्क टाइम्स से प्रेस की आजादी के बारे में पाठ पढ़ने की जरूरत नहीं है. इस पूरे प्रकरण को कई अंग्रेजी-हिंदी अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है. नीचे राजस्थान पत्रिका अखबार में प्रकाशित खबर की कटिंग दी जा रही है. साफ साफ पढ़ने के लिए न्यूज कटिंग के उपर ही क्लिक कर दें....

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  • Guest - mk pramod

    This all the ruckus is being managed by ndtv which proprietor is involved in gross violation of law. Recently, some senior journalists like arun shouri had gathered in delhi press club and condemned raid on ndtv owner houses in delhi and dehradun but none of them said that if ndtv has not done any wrong then why it is afraid of. All this clamouring in foreign media is being managed by lobbyist media of India whose dhandha of dominance is at stake. They think that they are above law so they are now saying is that present govt is intolerant with media. But what about Lalu who attacked Republic TV journalists for asking a legit question. Is Indian media means only ndtv whose owner is allegedly involved in money laundering.

    from Punjab, India

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