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सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के प्रिंट मीडिया के कर्मियों को निराश किया है। मजीठिया वेज बोर्ड मामले में आज दिए फैसले में सारे चोर मीडिया मालिक साफ साफ बच गए। सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी मीडिया मालिक को अवमानना का दोषी नहीं माना। वेजबोर्ड के लिए लड़ने वाले पत्रकारों को लेबर कोर्ट जाने और   रिकवरी इशू कराने की सलाह दे डाली।

एक तरह से ऐसा लग रहा जैसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह मीडिया मालिकों के पक्ष में एकतरफा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद देश भर के मजीठिया क्रांतिकारियों में मायूसी छाई है। अब सबको अपनी अपनी निजी लड़ाई लेबर कोर्ट जाकर लड़नी पड़ेगी। जजों ने लंबे चौड़े फैसले में मीडिया मालिकों को अवमानना का दोषी न मानने के पक्ष में लंबी चौड़ी दलीलें पेश की हैं लेकिन मीडियाकर्मियों के खून के आंसू इन न्यायाधीशों को नहीं दिखे। कहा जा सकता है कि आज मीडियाकर्मी नहीं हारे बल्कि लोकतंत्र हारा है, कानून की हार हुई है, न्याय व्यवस्था की हार हुई है, हक़ के लिए लड़ाई की हार हुई है। फैसले पर मीडियाकर्मियों के वकीलों ने भी निराशा जाहिर की है।

इस लड़ाई के अंजाम के बारे में भड़ास संपादक यशवंत ने पिछले साल अगस्त में ही ये लिख दिया था...

आज के फैसले को लेकर कुछ अन्य खबरें यूं हैं...

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  • Guest - Nand kishore singh

    कर्मशीलता की हार हुई है ।भ्रष्टाचार की जीत की जश्न मनाएं सभी कर्मयोगी पत्रकार।न्याय की हार की पराकाष्ठा है ।वहां न्याय नही एक व्यक्ति बैठा होगा जिसने प्रेस मालिकों को बरी किया ।

    from Purnea, Bihar, India
  • Guest - ashish kumar

    ये फैसला कंपनियों में मालिकों को शोषण का अधिकार देता है। वाह रे सुप्रीम कोर्ट खुद तय नही कर पाया कि फैसला किसे कहें। सब बिके हैं। कोर्ट, कानून, शासन, प्रशासन।

    from Bhopal, Madhya Pradesh, India
  • Guest - Neeraj

    Muje to avi take samjh nahi aaya suchhi khabar konsi h bhadas kind ya Jo Google par chal raha wo please such kayak h wo bataye.

  • Guest - pravin

    yeh andha kanoon nahi gandha kanoon hai......

    from Nagpur, Maharashtra, India