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26. अधिनियम के प्रावधानों में या वेजबोर्ड अवार्ड की शर्तों में ऐसा कुछ नहीं है, जो हमें अवार्ड के लाभ देने के लिए अनुबंध या ठेका कर्मचारियों को छोड़ कर, नियमित कर्मचारियों तक सीमित करेगा। इस संबंध में हमने अधिनियम की धारा  2(सी), 2(एफ) और 2(डीडी) में परिभाषित समाचारपत्र कर्मचारी, श्रमजीवी पत्रकार और गैरपत्रकार कर्मचारियों की परिभाषा पर ध्यान दिया है। जहां तक वेरिएबल-पे का संबंध है, इस पर पहले ही उपरोक्त पैरा 7 में ध्यान दिया गया है और सारगर्भित किया गया है, जब यह न्यायालय वेरिएवल-पे की अवधारणा पर चर्चा की, तो विचार किया कि इस राहत का मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड में उचित और न्यायसंगत निरुपण किया गया है। इसलिए वेरिएबल-पे के संबंध में कोई अन्य विचार लेकर इस लाभ को दबाने/रोकने का कोई प्रश्र नहीं उठता है। वास्तव में अवार्ड के प्रासंगिक भाग का एक पठन यह दर्शाता है कि वेरिएबल-पे की अवधारणा, जो अवार्ड में लागू की गई थी, छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट में निहित ग्रेड-पे से ली गई है और इसका उद्देश्य अधिनियम के दायरे में आने वाले श्रमजीवी पत्रकार और गैरपत्रकार कर्मचारियों को याथासंभव केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समतुल्य लाना है। जहां तक कि भारी नकदी हानि की बात है, हमारा मानना है कि बिलकुल वही भाव स्वयं इंगित करता है कि वह वित्तीय कठिनाइयों से अलग है और इस तरह की हानि प्रकृति में पंगु होने की सीमा से अलग, अवार्ड में निर्धारित समय की अवधि के अनुरुप होने चाहिए। यह तथ्यात्मक सवाल है जिसे केस टू केस या मामला दर मामला निर्धारित किया जाना चाहिए।

27. इस मामले में सभी संदेहों और अस्पष्टताओं को स्पष्ट करते हुए और यह मानते हुए कि किसी भी समाचार पत्र प्रतिष्ठान को, हमारे समक्ष मामलों के तथ्यों में, अवमानना करने का दोषी नहीं ठहरया जाना चाहिए, हम निर्देश देते हैं कि अब से मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड को लागू न किए जाने या अन्यथा के संबंध में सभी शिकायतों को अधिनियम की धारा 17 के तहत मुहैया करवाए गए तंत्र के अनुसार निपटाया जाएगा। न्यायालयों के अवमानना क्षेत्राधिकार या अन्यथा के इस्तेमाल के लिए दोबारा न्यायालयों से संपर्क करने के बजाय अधिनियम के तहत मुहैया करवाई गई प्रवर्तन/इन्फोर्समेंट और उपचारकारी मशीनरी द्वारा ऐसी शिकायतों का समाधान किया जाना अधिक उचित होगा। 

28. जहां तक कि तबादलों/ बर्खास्तगी के मामलों में हस्तक्षेप की मांग करने वाली रिट याचिकाओं के रूप में, जैसा कि मामला हो सकता है, से संबंध है, ऐसा लगता है कि ये संबंधित रिट याचिकाकर्ताओं की सेवा शर्तों से संबंधित है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय के अत्याधिक विशेषाधिकार रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल इस तरह के सवाल के अधिनिर्णय के लिए करना न केवल अनुचित होगा परंतु ऐसे सवालों को अधिनियम के तहत या कानूनसंगत प्रावधानों(औद्योगिक विवाद अधिनियमए 1947 इत्यादि), जैसा कि मामला हो सकता है, के तहत उपयुक्त प्राधिकारी के समक्ष समाधान के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए।

29. उपरोक्त राशनी में, सभी अवमानना याचिकाओं के साथ-साथ संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई रिट याचिकाओं का उत्तर मिल गया होगा और उपरोक्त संबंध में इनका निपटारा किया जाता है।

नई दिल्ली
19 जून, 2017

अनुवाद : रविंद्र अग्रवाल, धर्मशाला
संपर्क: 9816103265

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