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लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक तरुणमित्र ने आर्थिक दबाव के कारण 20 से अधिक मीडिया कर्मियों को नमस्ते कह दिया है. डीएवीपी ने फाइलों में छपने वाले समाचार पत्रों को हटाने के चक्कर में उन अखबारों को भी पैनल से हटा​ दिया है, जहां सैकड़ों मीडियाकर्मियों की रोजी रोटी जुड़ी हुई थी.

मजेदार बात तो यह है कि फाइल में छपने वाले अखबार आज भी पैनल में बने हुए हैं. लखनऊ से प्रकाशित लगभग ऐसे 25 अखबार होंगे जहां सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन केन्द्र सरकार ने उन्हें भी फाइल का अखबार मानते हुए विज्ञापन पैनल से हटा दिया. इससे ये अखबार आर्थिक दिक्कतों में आ गए जिसके कारण इन्हें अपने यहां छंटनी करनी पड़ रही है.

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