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बनारस से छप कर हिंदुस्तान अखबार गाजीपुर पहुंचता है. बनारस के संपादक हैं विश्वेश्वर कुमार. बेहद विवादित शख्सियत हैं. जहां रहें, वहीं इनके खिलाफ लोगों ने विद्रोह का बिगुल फूंका. भागलपुर में तो लोगों ने इनके खिलाफ लिखकर सड़कों को पोस्टरों बैनरों से पाट दिया था. ये समाचार छापने में राग-द्वेष का इस्तेमाल करते हैं. ये 'तेरा आदमी मेरा आदमी' के आधार पर आफिस का कामकाज देखते हैं. ताजी हरकत इनकी ये है कि इन्होंने अपने ही अखबार के रिपोर्टर को एक पूर्व मंत्री द्वारा धमकाए जाने की खबर को अखबार में नहीं छापा.

विश्वेश्वर कुमार के लिए शर्म की बात ये है कि दूसरे अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से छाप दिया है. अब या तो विश्वेश्वर कुमार को संपादक पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर चुल्लू भर पानी लेकर इसमें अपनी पत्रकारिता को डुबो कर मरने के लिए छोड़ देना चाहिए. अगर विश्वेश्वर कुमार को प्रधान संपादक शशिशेखर ने खबर छापने से रोका है तो उन्हें इसका खुलासा करना चाहिए. उन्हें उन हालात के बारे में लिखना चाहिए, बताना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर, किसके कहने पर, किस विवेक से इस खबर को छापने से मना कर दिया. आखिर जब आप अपने रिपोर्टर के मुश्किल वक्त में नहीं खड़े हो सकते तो आप काहें के संपादक और कहां के मनुष्य.

हिन्दुस्तान अखबार के पीड़ित पत्रकार की खबर अमर उजाला गाजीपुर एडिशन में फर्स्ट पेज पर छपी है. दैनिक जागरण के गाजीपुर संस्करण में भी ये खबर छपी है. लेकिन हिन्दुस्तान पेपर ने अपने ही पत्रकार को धमकाने की खबर को गाजीपुर एडिशन में प्रकाशित नहीं किया. हिंदुस्तान गाजीपुर के रिपोर्टर अजीत सिंह को करप्शन से संबंधित खबर छापने के कारण एक पूर्व मंत्री द्वारा धमकाए जाने के बाद गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक ने एक सुरक्षा गार्ड प्रदान किया है. साथ ही पत्रकार की तहरीर पर पूर्व मत्री ओम प्रकाश सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

हिंदुस्तान बनारस के संपादक विश्वेश्वर कुमार को बताना चाहिए कि उन्होंने पत्रकारिता के किस नियम का संज्ञान लेकर अपने ही रिपोर्टर को धमकाए जाने, उसकी तहरीर पर पूर्व मंत्री के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने की खबर का प्रकाशन नहीं किया. क्या उन्हें उनके गाजीपुर कार्यालय ने इससे संबंधित कोई खबर दी ही नहीं? अगर ऐसा है तो नाकारा गाजीपुर ब्यूरो को बर्खास्त कर देना चाहिए. अगर गाजीपुर ब्यूरो ने खबर भेजी तो उसे किसने किस हैसियत में रोका और किस कारण से रोका? पत्रकारिता तो पारदर्शिता का नाम है. उम्मीद है विश्वेश्वर कुमार का जमीर जगेगा और वे इन सवालों का जवाब कम से कम सोशल मीडिया पर ही देंगे ताकि लोग उनकी विश्वसनीयता पर भरोसा कर सकें. अगर वो जवाब नहीं देते हैं तो फिर हर कोई उनके बारे में एक राय कायम करने को स्वतंत्र हैं कि वो किस श्रेणी के संपादक रह गए हैं.

गाजीपुर से सुजीत कुमार सिंह 'प्रिंस' की रिपोर्ट. संपर्क : 9451677071

मूल खबर...

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