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एक पत्रकार को खुद को ही रोज पराजित करना होता है : कमर वहीद नकवी

हिंदी दैनिक कल्‍पतरु एक्‍सप्रेस के चौथे वर्ष में प्रवेश के अवसर पर आयोजित मीडिया विमर्श की छठी कड़ी में श्रोताओं को संबोधित करते हुए प्रधान संपादक जयकृष्‍ण सिंह राणा ने कहा कि सफलता के आकांक्षियों को खुद के सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन का आदर्श लेकर चलना पडता है। अखबार में प्रकाशित हो रही सामग्री के बारे में लोगों की क्‍या राय बन रही है उससे खुद को जोडना होगा। सामाजिक चेतना को प्रभावित करने वाले बिंदुओं पर ध्‍यान देते हुए हमें अपना स्‍वमूल्‍यांकन और आत्‍मचिंतन करते रहना होगा। उद्देश्‍य की परिपूर्ति के लिए जो निरंतर प्रयासरत होंगे, सफलता का स्‍वाद वही ले पाएंगे। श्री राणा ने कहा कि किसी भी कार्य को करने के पूर्व आत्‍मचिंतन की आवश्‍यकता होती है। उसी के आधार पर आकलन करें, फिर योजना का क्रियान्‍वयन करें तभी सफलता प्राप्‍त हो सकती है।

समचार पत्र की तीसरी वर्षगांठ के इस अवसर पर कल्‍पतरु एक्‍सप्रेस द्वारा हर माह आयोजित होनेवाले मीडिया विमर्श की छठी श्रृंखला के अन्‍तर्गत टीवी टुडे, आजतक, तेज, दिल्‍ली आजतक और हेडलाइन्‍स टुडे के पूर्व समाचार निदेशक कमर वहीद नकवी विशिष्‍ट अतिथि के तौर पर आमंत्रित थे। श्री नकवी ने अपराह्न में, अपना व्‍याख्‍यान दिया और उपस्थित पत्रकारों के प्रश्‍नों का उत्‍तर दिया।

कमर वहीद नकवी ने कल्‍पतरू परिवार के सदस्‍यों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता में कभी परफेक्‍शन नहीं होता, परफेक्‍शन मौत है। हमें हमेशा देखना होगा कि कल के किये में आज क्‍या नया सुधार किया जा सकता है। एक पत्रकार को खुद को ही रोज पराजित करना होता है। कल की लकीर कल की थी, यहां रोज एक नयी और पहले से बडी लकीर खींचनी होती है। कल की लकीर से बडी लकीर। श्री नकवी ने कहा कि पत्रकार के लिए जरूरी नहीं कि वह किसी विषय का विशेषज्ञ हो इसके विपरीत उसे हर विषय की जानकारी होनी चाहिए। उसे जैक ऑफ ऑल ट्रेड होना चाहिए।

श्री नकवी ने कहा कि हमेशा बड़ा सोचिए। सामान्‍य सोचेंगे तो सामान्‍य बने रहेंगे मतलब अपनी आस पास के माहौल को बेहतर बनाएंगे तो आप बेहतर होते जाएंगे। कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता। मेहनत, पढाई, गलतियों से सीखना होगा, कोई दूसरा नहीं सिखा देगा। हिन्‍दी के पत्रकारों की आलोचना करते उन्होंने कहा हिन्‍दी वालों की दुनिया हिन्‍दी तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। उसे अंग्रेजी भाषा में क्‍या लिखा जा रहा है और बाकी देश दुनिया में क्‍या हो रहा है उसके प्रति भी सतर्क रहना चाहिए।

आपके पास अपनी विश्‍व दृष्टि होनी चाहिए और आपको बिजनेस का अखबार भी पढना चाहिए। बिजनेस का अखबार पढे बिना आप अच्‍छे पत्रकार नहीं हो सकते। एक पत्रकार को अपने एथिक्‍स और बिजनेस की आवश्‍यकता पर साथ साथ ध्‍यान देना होता है। अन्‍य संदर्भ में उन्‍होने यह भी कहा कि अंग्रेजी का कचरा हिंदी में अनुवाद कर हम अपनी दुनिया नहीं बदल स‍कते।

बडी तस्‍वीरों के प्रयोग का तर्क देते श्री नकवी ने कहा कि फोटो अपने आप में बडी पत्रकारिता है और एक शब्‍द की भी बडी हे‍डिंग सकती है। प्रिंट मीडिया और टीवी की पत्रकारिता पर बोलते हुए उन्‍होंने कहा कि गंभीर पत्रकारिता का सुख प्रिंट में ही है, पर टीवी की गंभीरता अलग है उसे प्रिंट नहीं ला सकता। ग्‍यारह सांसदों को घूस लेते टीवी ही दिखला सकता है प्रिंट नहीं। पर अखबार के पास जैसी ताकत होती है वह टीवी के पास नहीं होती। अखबार एक बार में आपको तीन सौ के करीब खबरें दे सकता है, पर टीवी एक बार में एक ही खबर दे सकता है। वह जंची तो ठीक है नहीं तो दर्शक रिमोट का बटन दबाने को स्‍वतंत्र है। इसलिए प्रिंट के पास टीवी की तरह मजबूरी नहीं होती।

हर मीडिया की अपनी सीमा होती है और अपना एडवांटेज होता है। टीवी को थोड़ा तमाशा थोड़ा नयनसुख चाहिए ही, इसके लिए वह अभिशप्‍त है। स्टिंग आपरेशन पर बोलते हुए श्री नकवी ने कहा कि यह आपरेशन केवल जनहित में होना चाहिए। इसके अलावे वह दलाली है, ब्‍लैकमेलिंग है। इसे अंतिम विकल्‍प के तौर पर लिया जाना चाहिए। श्री नकवी ने भाषा को लेखन का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा बताया और कहा कि भाषा आम जनता की भावनाओं के साथ फिजिकली भी कनेक्‍टेड होनी चाहिए। इसका अच्‍छा तरीका यह है कि देश दुनिया से जुडी किताबों का अध्‍ययन करें उनके विचारों को जानें।

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