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विष्णु नागर के नेतृत्व में 'शुक्रवार' मैग्जीन की तरफ से 'साहित्य वार्षिकी-2012'

शुक्रवार (हिंदी साप्ताहिक पत्रिका) ने निस्संदेह पिछले एक वर्ष में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और लोकप्रियता के नये शिखर छुए हैं। 'शुक्रवार' ने एक और नई ऊंचाई छूते हुए नव वर्ष में 'साहित्य वार्षिकी-2012' प्रस्तुत की है। दो सौ पृष्ठों के इस अंक में 10 प्रसिद्ध कथाकारों की कहानियां हैं, दो उपन्यासकारों के उपन्यास-अंश हैं, 14 ख्यातनामा लेखकों के संस्मरण और यात्रा वृत्तांत हैं, छह लोकप्रिय व्यंग्यकारों के व्यंग्य हैं, पैंतालीस प्रसिद्ध कवियों की कविताएं हैं तथा सर्जनात्मकता की सार्थकता पर विभिन्न विधाओं से जुड़े नौ कलाकारों-लेखकों की बहस है। इसके अलावा भारत के सर्वश्रेष्ठ व्यंग्यकार स्वर्गीय हरिशंकर परसाई की तीन वे व्यंग्य रचनाएं हैं जो उनकी रचनावली में भी संकलित नहीं हुई हैं।

2011 के साहित्य, कला, संगीत तथा फिल्म का आकलन भी है। इतनी सारी सामग्री महज 50 रुपये में उपलब्ध कराई गई है।   'शुक्रवार' के संपादक विष्णु नागर के संपादन में प्रकाशित इस अंक की बाजार में भारी मांग देखी जा रही है। इसमें कृष्णा सोबती, मन्नू भंडारी, विश्वनाथ त्रिपाठी, विनोद कुमार शुक्ल, चंद्रकांत देवताले, ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह, मंजूर एहतेशाम, अशोक वाजपेयी, स्वयं प्रकाश, असगर वजाहत, नरेश सक्सेना, आलोक धन्वा, राजेश जोशी, अरुण कमल, ज्ञान चतुर्वेदी, मधु कांकरिया, अखिलेश, शरद दत्त, राजेंद्र राव, हृषीकेश सुलभ, अमृलाल वेगड़, गगन गिल, लीलाधर मंडलोई समेत करीब 90 लेखकों की रचनाएं हैं। प्रेस विज्ञप्ति

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