Category: प्रिंट, टीवी, वेब, ब्लाग, सिनेमा, साहित्य... Published Date Written by B4M
सुब्रत राय उर्फ सहाराश्री लगातार कुछ न कुछ करते रहने के लिए जाने जाते हैं. कहने वाले कहते हैं कि लोग जहां सोचना बंद करते हैं, वे वहां से शुरू करते हैं. सुब्रत राय को लेकर कई तरह के मिथ हैं. कंपनी चलाने की उनकी प्रशासनिक शैली के भी कई लोग कायल हैं. कब किसको सरताज बना देंगे और कब किसको धूल चटा देंगे, इसका अंदाजा किसी को नहीं रहता. मजेदार यह कि जो धूल चाटता दिखता है वह भी सहाराश्री के गुण गाता है और जो सरताज रहता है वह तो हर वक्त उनकी जय जय करता ही है.
फिलहाल सुब्रत राय का जिक्र हम यहां उनके कामकाज के तरीके के लिए नहीं कर रहे हैं बल्कि इसलिए कर रहे हैं कि उन्होंने एक नई पहल की है. देश के कोने कोने में फैसे सहाराकर्मियों के दिल का हाल जानने के लिए वे खुद तो हर जगह नहीं जा सकते इसलिए उन्होंने दो विश्वस्त महिलाओं को यह कार्यभार सौंपा है. ये कौन हैं और वे क्या करेंगी, इसका उल्लेख उस आंतरिक आदेश में किया गया है जिस पर सहारश्री के हस्ताक्षर हैं और इसे हर आफिस के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया गया है. पढ़ें और बूझें... इस आदेश के निहितार्थ क्या हैं...

