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पीएम नरेंद्र मोदी का एक नया झूठ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उन्होंने कहा हुआ है कि सीमेंट की एक बोरी 120 रुपये में मिल रही है. एबीपी न्यूज द्वारा चलाई गई ऐसी खबर का स्क्रीनशाट लगाकर लोग लिख रहे हैं कि अब मोदी जी ही बता दें कि वो दुकान कहां है जहां पर इतने सस्ते रेट पर सीमेंट की बोरी मिल रही है.

फेसबुक पर Gulshan Kumar Arora ने एबीपी न्यूज के स्क्रीनशाट का फोटो चिपकाकर लिखा है: ''झूठ के अतिरिक्त इस व्यक्ति के मुंह से आप कभी और कुछ नहीं सुन पाएंगे..... कहाँ मिल रही है सीमेंट की एक बोरी १२० रुपये में? जरा आप खुद ही पता कर लें.. प्रधान मंत्री होकर ऐसा सफ़ेद झूठ? शर्म आनी चाहिए... जो कि है ही नहीं.

पत्रकार Surendra Grover लिखते हैं: क्या कोई बताएगा कि 120 रूपये में सीमेंट की बोरी किस शहर में किस दूकान पर मिलती है..? कृपया पता लगाएं..

फेसबुक पर विक्रम सिंह चौहान लिखते हैं - नरेंद्र मोदी की सुबह की शुरुआत ही झूठ से होती है. आज फिर उन्होंने झूठ बोला कि सीमेंट की बोरी अब 120 रूपए में मिल रही है. मेरे नए घर की ढलाई के लिए 200 बोरी सीमेंट की जरूरत पड़ेगी. सोच रहा हूँ पीएमओ को इसी न्यूज़ को आधार मानकर पूछूं कि कहाँ किस कंपनी की सीमेंट इतनी सस्ती मिलती है?शर्म आती है ये आदमी इस महान देश का प्रधानमंत्री बन बैठा है. शर्म उन्हें भी आना चाहिए जिन्होंने इसे वोट किया.

अनीला ने ट्विट किया - आज फेंकने का विश्व रिकोर्ड टुटा सीमेंट की बोरी 120/- रुपए की होगई ?? मोदी जी लीमिट में फेंकिए।

योगेश शर्मा जर्नलिस्ट ने भी पूछ लिया कि लो भई मोदी जी ने आज कह दिया है कि सीमेंट की बोरी 120 रूपए में हो गई है।  इससे ज्यादा कोई मांगे तो मत देना दुकानदार को....चाहे कुछ भी हो जाए, आपको पता नहीं हो तो मोदी जी से पूछ लेना। 120 रूपये में सीमेंट की बोरी किस शहर में किस दूकान पर मिलती है..?

Mohammad Anas लिखते हैं: नरेंद्र मोदी द्वारा सिमेंट का दाम 270 रूपए के बजाए 120 बताना कुछ और नहीं जनता का उनकी सरकार के प्रति घटता विश्वास है। जनता दिमाग तक पर असर कर जाती है। कुछ दिनों बाद वे यह भी कह सकते हैं कि डीजल 5 रूपए लीटर मिलता है। वैसे सच कहूं तो प्रधानमंत्री पद की गरिमा को जिस तरह मोदी जी ठेस पहुंचा रहे हैं उतना पहले कभी नहीं पहुंचा था। वे वाकई में पहले पीएम हैं। शायद अब पहले भारतीय भी बन गए।

इससे पहले भी नरेंद्र मोदी के झूठ मिडिया की सुर्खियों में रहे हैं। उन्होंने कहा था कि चीन अपनी जीडीपी का 20 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करता है, लेकिन भारत सरकार नहीं। हकीकत यह है कि चीन अपनी जीडीपी का महज 3.93 प्रतिशत ही शिक्षा पर खर्च करता है। वहीं भारत में एनडीए सरकार के कार्यकाल में शिक्षा पर 1.6 प्रतिशत खर्च हुआ और यूपीए के कार्यकाल में सालाना जीडीपी का 4.04 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च हुआ है। मोदी ने कहा था कि सिकंदर महान को गंगा नदी के तट पर बिहारियों ने हराया था। सिकंदर महान 326 ई.पू. तक्षशिला से होते हुए पुरु के राज्य की तरफ बढ़ा, जो झेलम और चेनाब नदी के बीच बसा हुआ था। राजा पुरु से हुए घोर युद्ध के बाद वह व्यास नदी तक पहुंचा, परन्तु वहां से उसे वापस लौटना पड़ा। उसके सैनिक मगध (वर्तमान बिहार) के नन्द शासक की विशाल सेना का सामना करने को तैयार न थे। इस तरह से सिकंदर पंजाब से ही वापस लौट गया था। 

मोदी ने कहा था कि विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला या टेक्सिला विश्वविद्यालय बिहार में था। तक्षशिला प्राचीन भारत में शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था। तक्षशिला वर्तमान समय में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रावलपिंडी जिले की एक तहसील है। मोदी ने कहा था कि एनडीए की कार्यकाल में भारत की विकास दर 8.4 प्रतिशत थी, जबकि एनडीए के कार्यकाल में भारत की विकास दर मात्र 6 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा था कि गुजरात में देश में सबसे अधिक विदेशी पूंजी निवेश होता है, जबकि आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2000 से 2011 तक गुजरात में 7.2 बिलियन डॉलर का विदेशी पूंजी निवेश हुआ है और इसी अवधि में महाराष्ट्र में 45.8 बिलियन डॉलर और दिल्ली में 26 बिलियन डॉलर का विदेशी पूंजी निवेश हुआ है।

मोदी ने कहा था कि नर्मदा पर बांध बनने पर लोगों को मुफ्त बिजली मिलेगी। अब तक कभी ऐसा नहीं हुआ है कि किसी प्रदेश में नदियों पर बांध बनने से मुफ्त में लोगों को बिजली मिली हो। राष्ट्रीय बिजली नियामक आयोग के अनुसार बिजली के लिए पैसा देना ही होगा। लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी ने कहा था कि उनके पटना भाषण के बाद सरकार ने टीवी मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की नीयत से मीडिया एडवाइजरी जारी की। हकीकत उल्टी है। नरेन्द्र मोदी ने 27 अक्टूबर को पटना में भाषण दिया था, जबकि सूचना प्रसारण मंत्रालय की एडवाइजरी इससे एक सप्ताह पहले 21 अक्टूबर को ही जारी कर दी गई थी। यह एडवाइजरी सूचना प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट पर भी मौजूद है। एक बड़े अखबार के इंटरव्यू के बाद मोदी का एक और 'झूठ' सुर्खियों में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरदार पटेल की अंत्येष्टि में पंडित जवाहर लाल नेहरू शामिल नहीं हुए थे। 

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