Bhadas4Media

Switch to desktop Register Login

शैक्षिक चैनलों को एनओसी देने को तैयार नहीं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

 

नई दिल्ली : सूचना संचार तकनीक ने पूरी दुनिया में पढ़ाई-लिखाई की राह भले ही आसान कर दी हो, लेकिन भारत में यह अब भी कम बड़ी चुनौती नहीं है। तभी तो सरकार चाहकर भी सेटेलाइट के जरिये उच्च शिक्षा, खासतौर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की कोशिशों को हकीकत में नहीं बदल पा रही है। आलम यह है कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 50-60 शैक्षिक टीवी चैनलों को शुरू करने की मुहिम प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल के बाद भी अब तक परवान नहीं चढ़ सकी है। 
 
सूत्रों के मुताबिक, शैक्षिक चैनलों के जरिये देश के दूरदराज इलाकों तक में उच्च शिक्षा पहुंचाने की मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय की लगभग आठ महीने की कोशिशें सिर्फ इसलिए मुकाम नहीं हासिल कर सकी, क्योंकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय उसे चैनल शुरू करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) देने को तैयार नहीं है। मंत्रालय का इरादा फिलहाल पायलट के तौर पर लगभग पांच दर्जन शैक्षिक चैनल शुरू करने का है, जबकि आगे चलकर वह इसे वह एक हजार तक पहुंचाना चाहता है। बताते हैं कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अपने राष्ट्रीय शिक्षा सूचना संचार प्रौद्योगिकी मिशन के तहत इंजीनियरिंग की लगभग पूरी पढ़ाई का ई-कंटेट तैयार करा चुका है। यह पाठ्य सामग्री छात्रों को सरकारी पोर्टल के जरिये तो उपलब्ध होगी ही, शैक्षिक चैनलों के जरिये उसे और विस्तार दिया जाएगा। 
 
बताते हैं कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय शैक्षिक चैनलों को शुरू करने की इजाजत महज इसलिए नहीं दे रहा है, क्योंकि वह सिर्फ कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत किसी कंपनी को (प्राय: निजी क्षेत्र व मुनाफा कमाने वाली) ही चैनल चलाने की मंजूरी देता है। एचआरडी मंत्रालय कंपनी नहीं है। सूचना-प्रसारण मंत्रालय के इस तर्क के बाद एचआरडी मंत्रालय ने अपने किसी निकाय को चैनल चलाने की मंजूरी की पैरवी की, लेकिन वह उस पर भी नहीं तैयार हुआ। सूत्रों की मानें तो इसी साल जनवरी में खुद एचआरडी मंत्री कपिल सिब्बल ने इस मामले को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी के सामने भी उठाया था। बात नहीं बनी तो यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया। पीएमओ के दखल के बाद ही मामला अंतरिक्ष, दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, सूचना एवं प्रसारण और वित्त मंत्रालय (व्यय) के सचिवों की समिति को सौंप दिया गया। सूत्र बताते हैं कि अंतरिक्ष मंत्रालय तो एचआरडी मंत्रालय के प्रस्ताव से सहमति जताते हुए उसे दो ट्रांसपोंडर देने को राजी है, लेकिन सूचना प्रसारण मंत्रालय अब भी चुप्पी साधे हुए है। चैनलु का लाइसेंस दूरसंचार मंत्रालय को देना है, जो सिब्बल के ही पास है। साभार : जागरण 

कापीराइट (c) भड़ास4मीडिया के अधीन.

Top Desktop version