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बिहार में जी ग्रुप ने रीजनल चैनल शुरू किया ज़ी पुरवइया लेकिन चैनल सिर्फ स्ट्रिंगरों का खून चूस रहा है। 16 जनवरी 2014 को चैनल की शुरआत हुई थी। स्ट्रिंगरों को सैलरी का पेमेंट जून 2014 से दिया गया। छह माह तक स्ट्रिंगरों को मंगनी में खटवाया गया। 

आश्वासन के तौर पर उस समय जी ग्रुप के पुरवइया चैनल प्रबंधन ने स्ट्रिंगरों से यहा कहा था कि इन छह महीनों की उनकी सैलरी का पेमेंट निकट भविष्य में कर दिया जाएगा तब से स्ट्रिंगर अपने वेतन का बकाया नहीं पा सके हैं। मौजूदा समय में एक बार फिर वही शोषण की दास्तान नये तरीके से दुहराई जा रही है। बीते छह महीनों से किसी भी जिले के स्ट्रिंगर का पेमेंट नहीं दिया गया है।  

चैनल प्रबंधन की इस मनमानी से स्ट्रिंगरों में गहरा असंतोष और रोष है। चैनल के पटना मुख्यालय में बैठे आकाओं की अपनी सैलरी समय पर आ जाती है लेकिन बाकी जो रीढ़ की हड्डी हैं, उन स्ट्रिंगरों को ठेंगा दिखाकर काम कराया जा रहा है।  

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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