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पत्रकारिता में फ्लाप शो साबित हो चुके पत्रकार अनुरंजन झा राजनीति से भी निपट गए. इस बार वह बिहार विधानसभा के लिए चुनाव लड़े थे लेकिन बुरी तरह हार गए.  अनुरंजन 11 सुगौली विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े थे और उनका चुनाव चिन्ह अलमारी था. पर दुर्भाग्य ऐसे पीछे पड़ा हुआ है कि अलमारी भर नहीं पा रही है.

मजेदार है कि जैसे पत्रकारिता में रहते हुए अनुरंजन झा मालिकों से लेकर पत्रकारों तक को भांति भांति की पट्टी पढ़ाया करते थे, उसी तरह ये राजनीति में उतरने के दौरान ही जनता को पट्टी पढ़ाने लगे. इन्होंने अपने पोस्टर में दावा किया था कि ढेर सारे भ्रष्टाचारियों को ये जेल भिजवा चुके हैं. इस दावे पर लोग कई सवाल खड़े करने से बाज नहीं आ रहे. कुछ लोगों का कहना है कि सुपारी पत्रकारिता और निहित स्वार्थी पत्रकारिता करने वाले अनुरंजन झा को ऐसे बड़बोले किस्म के हास्यास्पद दावे करने से बचना चाहिए. पर आदत जो न कराए.

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