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  • Published in दिल्ली

एक कहावत है अति भक्ति, चोरस्य लक्षणम्। यानी बहुत विनम्र इंसान, घातक
होता है। अरविंद केजरीवाल इस कहावत के लिए बिल्कुल सटीक उदाहरण बन गए
हैं। कैसे ? जनता को ऐसा लगता है कि उन्होंने जो कहा, वह किया नहीं।
मसलन, बेहद लाचार व शरीफ बन कर बार बार खांसते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार
और नेताओं की मनमानी से अजिज आ चुकी दिल्ली की जनता को कहा कि हम लाल
बत्ती वाली गाड़ी नहीं लेंगे। सरकारी मकानों में नहीं रहेंगे।
सुरक्षाकर्मियों का घेरा नहीं रखेंगे। जनता का पैसा बर्बाद नहीं करेंगे।
लाेकपाल लाएंगे। सरकार के कामकाज में पारदर्शिता लाएंगे। शीला दीक्षित
काे जेल पहुंचवाएंगे। आैर क्या क्या गिनवाएं..आप खुद ही गिन लीजिए।
दिल्लीवाले उनके झांसे में आ गए।

केजरीवाल ने किया क्या? सीएम बनते ही घोड़ा, गाड़ी, बंगला सब ले लिया।
बच्चों को पढ़ने विदेश भेज दिया। न तो लोकपाल लाए और न ही किसी नेता
को जेल भिजवा पाए। जनता दरबार लगाना बंद कर दिया। लोगों से सीधे संवाद
के सभी रास्ते बंद। अपने विधायको का वेतन बढ़ाया व उन्हें मंत्रियों वाली
सुख सुविधाएं देने के लिए संसदीय सचिव के पद सृजित किए ताकि सबको
दूध-मलाई का इंतजाम होता रहे। उनके मंत्रियों ने क्या किया। मारपीट करते
रहे। रिश्वत लेते, ब्लू फिल्म बनाने के चक्कर में पड़ने से लेकर जाली
डिग्री तक होने के चक्कर में जेल गए। लाल बत्ती वाली गडियां ली। बढिया
भवन, मकान आवंटित करवाए। अपने घरों में दर्जनों एसी लगवाए। बिना राज्यपाल
की अनुमति के विदेश यात्राएं की। केंद्र सरकार से टकराव कर दो साल गुजार
दिए और दिल्ली 10 साल पीछे चली गई।

ऐसे में 23 अप्रैल को होने जा रहे निगम चुनाव में क्या केजरीवाल जीत
पाएंगे? जवाब ना है। 10 कारण हैं जो केजरीवाल का एक्सपोज करने के लिए
प्रर्याप्त हैं। 1.एंटी इन्कंबैंसी। दिल्ली में पिछले दो साल का कार्यकाल
ही आप के खिलाफ चला गया। नतीजतन, रजौरी गार्डन में आम आदमी पार्टी का
उम्मीदवार न सिर्फ हारा है, बल्कि उसकी जमानत तक जब्त हो गई। 2.
बिजली, पानी, सड़क, झुग्गी आदि की राजनीति के बाद सत्ता में आते ही
केजरीवाल ने हर बात के लिए उप राज्यपाल से लेकर पीएम मोदी को व्यक्तिगत
रूप से निशाना बनाना लोगों को पसंद नहीं आया। 3. ईवीएम और इलेक्शन
कमीशन पर उंगली उठाना। पंजाब की आधी और गोवा की पूरी हार के बाद आम आदमी
पार्टी की इस बौखलाहट का लोगों के बीच नकारात्मक असर पड़ा। 4. घोटालों
में फंसना। दिल्ली में सत्ता में आने के तुरंत बाद ही आप के मंत्रियों से
लेकर नेताओं तक पर गंभीर आरोप लगे और उनमें से कई जेल भी गए। 5.शुंगलू
कमेटी की रिपोर्ट से किरकिरी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आप ने पिछले दो
साल में सिर्फ मनमानी की है। किसी भी मामले में उप राज्यपाल की सह‌मति
नहीं ‌ली और किसी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया। 6. दिल्ली से
बाहर अपने प्रचार के विज्ञापन पर 97 करोड़ खर्च कर देना। इसे दिल्ली के
विकास पर खर्च करना चाहिए था। 7. अन्य नेताओं की तरह ही सारी सुख
सुविधाएं ले लेना। 8.साफ सुथरे नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता
दिखाना। योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और आनंद कुमार जैसे साफ छवि के
नेताओं को केजरीवाल ने निकाल दिया, जिससे पार्टी की नकारात्मक छ‌वि बनी।
9. जनलोकपाल का मसला पेडिंग में डाल देना। 10. मीडिया पर अघोषित
सेंसरशिप। जिस मीडिया ने केजरीवाल को बनाया उसे ही न सिर्फ लात मार देना
बल्कि डराना घमकाना।

संदीप ठाकुर
वरिष्ठ पत्रकार
दिल्ली

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