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मध्य प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आइ ए एस अनुपम राजन इन दिनों फिर चर्चाओं में हैं। अनुपम राजन के साथ काम कर रहे जनसम्पर्क विभाग के एक अधिकारी ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनके नक़ल प्रकरण से सम्बंधित दस्तावेज मीडिया को मुहैया करवाये हैं। मध्यप्रदेश जनसम्पर्क आयुक्त अनुपम राजन के बारे में हुए इस खुलासे को आईएएस अफसरों की आपसी राजनीति से जोड़ कर देखा जा रहा है।

अनुपम राजन की कार्यप्रणाली विवादों के घेरे में है। बिना trp वाले समाचार चैनलों और अपराधिक छवि के चैनल मालिकों को इनके कार्यकाल में जमकर खैरात बांटी गई। अपने नए नए जतन से सरकार के लिए मीडिया मैनेजमेंट का इनका प्रयास शिवराज सिंह सरकार की किरकिरी करवा रहा है। जनसम्पर्क विभाग के दो अधिकारीयों को छोड़ दें तो इन्होने सभी के खिलाफ अविश्वास जाहिर किया है और यही वजह है कि जनसम्पर्क विभाग की समाचार शाखा में बैठने वाले एक अधिकारी ने गुप्त रूप से राजन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और दिल्ली, पटना से लेकर भोपाल तक इनके सफर की जानकारी सब को दे रहे हैं । जनसम्पर्क समाचार शाखा के इन अधिकारी का मानना है कि जो खुद विवादस्पद हो वह कैसे सरकार की छवि सुधार सकता है।

वहीं एक अन्य सीनियर आईएएस अफसर ने कहा मुझे कोट मत कीजियेगा, यह झगड़ा अनुपम राजन या जनसम्पर्क का नहीं, यह आईएएस अफसरों का है। यह झगड़ा डायरेक्ट आईएएस और प्रमोटी आईएएस का है। कुछ प्रमोटी आईएएस अनुपम राजन पर हावी होना चाहते हैं लेकिन अनुपम बहुत सोबर और डायनामिक हैं, वह किसी प्रमोटी का दबाव स्वीकार नहीं करेंगे और अपने अंदाज में ही काम करेंगे।

जनसमपर्क विभाग का मुख्यकाम सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को चमकाने का है लेकिन राजन के कारण फिलहाल तो जनसम्पर्क विभाग पर ग्रहण लग रहा है। एक मामले मे तो राजन पर सीबीआई ने धारा 420, 120 बी तथा अन्य धाराओं में मामला भी पंजीबद्ध किया था। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के खिलाफ 420 का प्रकरण दर्ज होना अपने-आपमें मायने रखता है। मामला यह था कि अनुपम राजन ने 1993 में यूपीएसपी की परीक्षा उत्तीर्ण कर 1993 के बैच के आईएएस अधिकारी बने थे।

1992 की यूपीएससी की परीक्षा में अनुपम राजन के साथ उनके मित्र जमाल भी बैठे थे, परंतु जमाल यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए थे। अपने मित्र को आईएएस बनाने के फेर में अनुपम राजन 1993 में आयोजित यूपीएससी की परीक्षा में फिर से दोनों बैठे। उक्त परीक्षा में अनुपम राजन ने जमाल से उत्तर पुस्तिका बदली और उसकी मदद की। उक्त परीक्षा में रोचक मोड़ तब आया, जब जमाल तो पास हो गए, पर अनुपम राजन फैल हो गए। इस मामले ने तूल पकड़ा तो शिकवा-शिकायतें हुईं और जांचें हुईं, जिसमें अनुपम राजन को दोषी पाया गया। सभी का तर्क था कि अनुपम राजन केवल दोस्त को पास कराने के लिए यह सब नहीं कर सकते। इसके पीछे कोई दूसरा कारण था।

आईएएस अनुपम के मामले में जांचों के बाद दिल्ली की मेट्रोपालन मजिस्ट्रेट ने अनुपम राजन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे। अनुपम राजन उक्त आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे। वहां उन्हें उल्टी फटकार मिली।न्यायाधीश विपिन सांघी ने इस बात पर ऐतराज जताया कि मामले को छह माह में जांच कर निर्णय करने को कहा। उपरोक्त निर्णय के विरोध में राजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें देश की सबसे बड़ी अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय बरकरार रखा। जिस पर सीबीआई ने सख्त कार्रवाई करते हुए विभिन्न धाराओं में मामला पंजीबद्ध कर लिया है।बीस साल पहले घटे इस घटनाक्रम पर न्यायालय ने निर्णय तब दिया, जब अनुपम राजन आधे से ज्यादा नौकरी कर चुके हैं। कई जिलों में कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण ओहदे पर रह चुके हैं। न्याय प्रक्रिया में देर होती है, परंतु इतनी देर होती है, यह ताजा और चर्चित उदाहरण है।

सच जो भी हो इस प्रसंग की वजह से अनुपम राजन हमेशा चर्चाओं में रहे हैं और अब उन्हीं के जनसम्पर्क विभाग के एक आला अधिकारी उनके खिलाफ गुपचुप मोर्चा खोले हुए हैं। किसी ज़माने से खुद ias बनने का सपना संजोये जनसम्पर्क विभाग की समाचार शाखा के यह अधिकारी अभी खुल कर सामने आना नहीं चाहते हैं। इनका कहना है फर्जी टाइप के और अपराधिक छवि के न्यूज़ चैनल मालिकों को कैसे करोड़ों रूपया बांटा गया है वह इसका खुलासा भी दासस्तवेजों के साथ कर सकते हैं। यह अधिकारी चाहते हैं क़ि करोड़ों की बंदरबांट का यह मामला पहले लोकायुक्त दर्ज कर ले उसके बाद वे इसका परत दर परत खुलासा करेंगे।

भोपाल से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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