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मित्रों, जब भी कभी पत्रकार भवन को लेकर श्रमजीवी पत्रकार संघ के विरुद्ध कोई फैसला आता है तो संघ के अध्यक्ष साथी शलभ भदौरिया के कुछ शुभचिंतक शोर मचाने लगते हैं। हाल ही में भोपाल संभाग के अपर आयुक्त श्री एन पी डहेरिया ने पत्रकार भवन की लीज़ के मामले में श्रमजीवी पत्रकार संघ की अपील ख़ारिज कर दी। बस फिर क्या था श्री शलभ भदौरिया के शुभचिंतक सक्रीय हो गए और अपनी जीत का जश्न मनाने लगे, अति उत्साह में आकर श्री भदौरिया पर भद्दे - भद्दे   आरोप भी लगाने लगे। अक्सर देखने में आता है कि जिन लोगों के पास तथ्य नहीं होते वो ऐसा ही करते हैं। चलो इस बहाने उनकी मानसिकता और चरित्र तो उजागर हुआ।

अपर आयुक्त के फैसले पर हम लगों को कोई आश्चर्य इस लिए नहीं हुआ क्योंकि अपर आयुक्त हमें पहले ही विनम्रता के साथ बता चुके थे कि उन पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री एस के मिश्रा का बहुत दबाव है इस कारण वह चाहकर भी श्रमजीवी पत्रकार संघ के साथ न्याय नहीं कर सकते। मित्रों आपको याद होगा 2 फरबरी 2015  को जब कलेक्टर भोपाल ने पत्रकार भवन की लीज़ निरस्त करने का आदेश किया था, तब उन्होंने अपने आदेश में इस बात का उल्लेख किया था कि पत्रकार भवन की लीज़ निरस्त करने के लिए जनसंपर्क आयुक्त श्री एस के मिश्रा ने पत्र लिखा है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि अपर आयुक्त ने निर्णय मुख्यमंत्री के सचिव श्री एस के मिश्रा के दबाव में लिया गया है, ना कि उभय पक्षों द्वारा प्रस्तुत दलीलों और तथ्यों पर।

मित्रों अपर आयुक्त के फैसले से हम बिलकुल भी विचलित नहीं हैं, क्योंकि कलेक्टर का फैसला हो या कमिश्नर का कोई भी फैसला अंतिम नहीं होता। लेकिन जिस प्रकार से कतिपय लोगों द्वारा अपर आयुक्त के आदेश की आड़ लेकर हमारे नेता और मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष साथी शलभ भदौरिया की छबि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है वो हमारे लिए चिंता का विषय है। लड़ाई अगर क़ानूनी है तो उसे कानूनी ढंग से लड़ा जाये तो बेहतर होगा।

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ और हमारे नेता साथी शलभ भदौरिया जो लड़ाई लड़ रहे हैं वह केवल पत्रकार भवन की लड़ाई नहीं है बल्कि भोपाल के बुज़ुर्ग पत्रकारों की निशानी को बचाने की लड़ाई है। भोपाल के बुज़ुर्ग पत्रकारों की इस निशानी ( पत्रकार भवन ) को बचाने के लिए मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के सिपाही श्री शलभ भदौरिया के नेतृत्व में आखरी दम तक लड़ेंगे। जहां तक श्री एस के मिश्रा की बात है, निश्चित रूप से वह इस समय प्रदेश सरकार के सर्व शक्तिमान अधिकारी हैं। वो जो चाहते हैं करते हैं। लेकिन समय किसी का भी हमेशां एक जैसा नहीं होता कल किसी और का था, आज श्री एस के मिश्रा का है, कल किसी और का होगा।

मेरा श्री एस के मिश्रा से विनम्र निवेदन है कि यदि उनकी साथी शलभ भदौरिया से कोई व्यक्तिगत खुन्नस या दुश्मनी है तो कृपा करके उसका बदला भोपाल के बुज़ुर्ग पत्रकारों की निशानी ( पत्रकार भवन ) को मिटाने की कीमत पर ना लें। श्री मिश्रा तो सर्व शक्तिमान हैं कुछ भी कर सकते हैं। और अगर पत्रकार भवन को मिटाने की श्री मिश्रा की  ज़िद ही  है तो वह एक मेहरबानी करें। नियम - क़ानून से कार्रवाई होने दें। वैसे भी एक ज़िम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी को यह शोभा नहीं देता कि वह किसी न्यायिक प्रक्रिया में बेजा हस्तक्षेप करे।

धन्यवाद

फानूस बनकर जिसकी हिफाज़त हवा करे
वो शमां क्या बुझे जिसे रोशन ख़ुदा करे

अरशद अली खान
अध्यक्ष
भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ

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