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कलम की कीमत अदा करनी होगी.... साल 2012 में अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार आने के कुछ महीनों के भीतर उत्तर प्रदेश सूचना विभाग ने सरकारी विज्ञापनों का सालाना बजट रुपये 92 करोड़ से बढ़ा कर रुपये 600 करोड़ कर दिया. इस हिसाब से अगले चार सालों में सूचना विभाग ने उत्तरप्रदेश के अखबारों, पत्रिकाओं, चैनलों के संपादकों, मालिकों के बीच 2400 करोड़ रुपये बांटे. जनता की इस गाढ़ी कमाई की लूट का हिसाब लेने का वक्त आ गया है.

ये लूटे-लुटाए गये 2400 करोड़ रुपये हमारे-आपके हैं. इन रुपयों का हिसाब लेने-देने का वक्त आ चुका है. 2400 करोड़ रुपयों खाने वालों के नाम सार्वजनिक करने का समय आ गया है. इस लूट के लिए दोषी नेताओं और अफसरों के खिलाफ कार्यवाई करने-कराने का समय आ गया है. जनता की गाढ़ी कमाई के 2400 करोड़ की इस लूट की सीबीआई से जांच कराने की हम लोग मांग करेंगे. नेताओं और अफसरों को इस लूट का हिसाब जनता को देने के लिए हम लोग बाध्य करेंगे.

आने वाले 17 तारीख दिन सोमवार को सूचना निदेशक कार्यालय, पार्क रोड, निकट हजरतगंज, लखनऊ पर दिन में 11 बजे से "हिसाब दो" धरने का आयोजन है. आप सभी निमंत्रित हैं. आप सभी का स्वागत है. आइये और लूट तंत्र के खिलाफ आवाज उठाइए. सिस्टम पर दबाव बनाइए ताकि बेइमानों के नाम सामने आ सके और लूट तंत्र के हिस्सेदारों को दंडित कराया जा सके.

अनूप गुप्ता
संपादक
दृष्टांत मैग्जीन
लखनऊ

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