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Surya Pratap Singh : यूपी की 63% सड़कें गड्ढामुक्त का भी सच जानना है तो ....केवल एक सड़क ही देख लो, जिसका सीधा सम्बन्ध दो VIP क्षेत्रों से है .... क्यों शर्म नहीं आती, झूठ बोलने में? लोक निर्माण विभाग के मंत्री और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के लोकसभा की सड़क जो प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र की 'बनारस-इलाहाबाद' लिंक मार्ग है, को ही देख लो... स्थानीय लगभग 100 से गाँवो के लिये यह लिंक रोड मुख्यमार्ग है।

यह मार्ग इलाहाबाद शहर से फाफामऊ होते हुए सहसों को जोड़ता है यहाँ सड़क के नाम पर महज गड्ढे ही दिखाई देते हैं सड़क पर बोल्डर पड़े है। इसी मार्ग के 'चकिया' गाँव के लोगो से पूछ कर सच्चाई पता चल जाएगी कि इस मार्ग पर आये दिन कितनी दुर्घटना होती रहती हैं? और कितने लोगो की मौत अब तक हो चुकी हैं?

पूरे प्रदेश में किसी भी जिले में जाकर देख लो .... गड्ढे मुक्ति के नाम पर खानापूरी ही हुई है ....सभी जिलों की सड़कों में अभी भी गड्ढे ही गड्ढे हैं ....यूपी की 63% सड़कें गड्ढामुक्त की बात भी सच नहीं लगती... काग़ज़ी आँकड़े हैं, सब। पीडबल्यूडी विभाग में आज भी अखिलेश के प्रिय दाग़ी अधिकारी इस सरकार को भी भा रहे हैं तो यही हश्र होगा.....क्या PWD विभाग में कमिशनखोरी रुक गयी?

प्रदेश में सड़कें गड्ढा मुक्त तो नहीं हुई परंतु इंजिनीयर्स / अफ़सर / नेताओं के घरों के गड्ढे ज़रूर भर गए होंगे ....जो भी गड्ढे भरे हैं, उनकी पोल बरसात के बाद तो खुल ही जाएगी..... बिना सोचे विचारे, बड़बोलेपन में की गयी घोषणा से सरकार को श्रेय कम....किरकिरी ज़्यादा हुई !!!

नोट : लोकतंत्र में सभी नागरिकों का फ़र्ज़ है कि नेताओं के झूँट को उजागर करें ताकि सरकारें मिथ्या आँकडे प्रस्तुत कर प्रायोजित प्रचार कर लोगों को भ्रमित न कर सकें। यह कोई नेगेटिव सोच नहीं है। लोकतंत्र में अंध भक्ति ठीक नहीं, आलोचना/समालोचना भी सच सामने लाने के लिए अतिआवश्यक है ...ऐसा मेरा मानना है। ऐसा करने पर मेरे व आपके घरों पर गुंडे/माफ़िया के हमले हो सकते हैं... by the way, मेरे घर पर हमला करने वालों का अभी तक कोई सुराग़ नहीं है...

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सड़कों के 'गड्ढे' में खड़ी योगी सरकार...गड्ढामुक्ति अभियान गया 'गड्ढे' में! सीएम योगी ने माना कि 'गड्ढामुक्ति' अभियान धनाभाव के कारण १५ जून तक पूरा नहीं हो पाएगा....बिना पूर्व प्लानिंग के अति उत्साह में वादे व संकल्प करने का हश्र यही होता है..... प्रदेश की सड़कों में से २०-२५ % सड़कें ऐसी है, जो इतनी जीर्णछिर्ण है कि उनको गड्ढामुक्त नहीं अपितु पुनर्निर्माण ही कराना पड़ेगा...पहले सभी सड़कों की मौक़े पर स्थिति का पूर्व सर्वेक्षण होना चाहिए और प्लान कर धन की व्यवस्था की जाती और फिर घोषणा होती तो ऐसी 'वादे/घोषणा' के झूँट के कलंक से बचा जा सकता था। यह सरकार के सलाहकारों व सरकार की अनुभवहीनता दर्शाता है।

प्रदेश को गड्ढा मुक्त करने के लिए कुल रु. ४,५०० करोड़ की आवश्यकता थी और आवश्यकता का १/३ भाग ही अर्थात रु.१,५०० करोड़ ही उपलब्ध हो पाया.... पूर्वांचल व बुंदेलखंड की सड़कों का तो बुरा हाल है ही, प्रदेश के अन्य भागों में भी कमोवेश यही स्थिति है। आधी अधूरी या बिना तैयारी के घोषणा करने से सरकार की किरकिरी होती है और इक़बाल भी कम होता है.... वैसे CM योगी से अधिक पीडबल्यूडी मंत्री की ज़्यादा किरकिरी हुई है। यह टीमवर्क का अभाव भी दर्शाता है.... नौकरशाहों व इंजिनीयर्स की भी नाकामी है। वित्त विभाग व मुख्यसचिव को तो धनाभाव की स्थिति पूर्व ज्ञान होगा ही और इस अभियान की समय-२ पर समीक्षा भी कर रहे होंगे, उन्हें सीएम योगी को अवगत कराके समयसीमा बढ़वानी चाहिए थी ....क्या यह CM योगी को असफल कराने साज़िश तो नहीं.....अनियंत्रित क़ानून व्यवस्था पर टीका टिप्पणी हो ही रही है, अब विकास के वादों को भी झूँठा सिद्ध करने की कवायत है..... किसानों का क़र्ज़ माफ़ी भी अभी तक पूर्णतः हवा हवाई ही है ....यदि योगी जी कड़क हैं, सरकार ढीलीढाली क्यों.... क्यों नौकरशाही नियंत्रण में नहीं आ रही....क्यों योगी जी के मंत्रिमंडल में टीमवर्क का अभाव लगता है ....क्यों पुलिस बात नहीं सुन रही...क्यों यथोचित परिणाम निर्धारित समय सीमा में नहीं आ रही ..,.क्यों भ्रष्टाचार के मामलों में जाँच नहीं की जा रही ? क्या सरकार रिमोट कंट्रोल से चल रही है ? CM योगी की प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं, फिर भी परिणाम क्यों नहीं आ पा रहे?

मैंने वाराणसी जनपद के अपने भ्रमण के बाद २० अप्रेल की अपनी पोस्ट में अपने अनुभव के आधार लिख दिया था कि.....योगी सरकार द्वारा दी गयी 'डेडलाइन' १५ जून तक गड्ढा-मुक्त हो नहीं पाएंगी वाराणसी/काशी की सड़कें, यही हाल मैंने बरेली,बदायूँ और संभल जनपदों के भ्रमण के मैंने देखा था ....मेरा दावा तथ्यों पर आधारित था.....योगी सरकार में एक तो टीमवर्क व अनुभव का अभाव है और ऊपर से भ्रष्ट अधिकारियों/इंजीनियर्स की सरकार के प्रति आधी-अधूरी प्रतिबद्धताएँ है, तो ऐसी किरकिरी आज नहीं कल भी देखने को मिलेगी...... क्या सरकार के सलाहकार दिल्ली से सरकार चला रहे हैं या लखनऊ में कहीं बैठे हैं ?.....सब कुछ ठीक नहीं चल रहा, कुछ तो गड़बड़ है।

यूपी कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से. ज्ञात हो कि सूर्य प्रताप ने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा ज्वाइन कर भाजपा नेता के रूप में सक्रिय कार्य किया और इन दिनों भाजपा सरकारों के चाल चलन की बेबाक समीक्षा के लिए चर्चित हैं.

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