A+ A A-

अजय कुमार, लखनऊ

अयोध्या विवाद (बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद) फिर सुर्खिंया बटोर रहा है। देश की सर्वोच्च अदालत कल (11 अगस्त 2017) से इस एतिहासिक विवाद का हल निकालने के लिये नियमित सुनवाई करने जा रही है। अदालत जो भी फैसला करेगा उसे दोंनो ही पक्षों को मानना होगा, लेकिन देश में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद ऐसा लगने लगा है कि अब इस मसले पर सियासत बंद होगी और कोई फैसला सामने आयेगा। उक्त विवाद करोड़ों हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा हुआ मसला है तो कुछ मुस्लिम संगठन इस पर अपनी दावेदारी ठोेक रहे हैं। करीब पांच सौ वर्ष पुराने इस विवाद ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में गत दिनों उस समय एक नया मोड़ आ गया,जब यूपी के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके अपना पक्ष रखते हुए दावा किया,‘ विवाद खत्म करने के लिए बोर्ड का मत है कि अयोध्या में विवादित स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाई जा सकती है।’ अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद टाइटल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल (11 अगस्त 2017) से सुनवाई होनी है। शिया बोर्ड भी सुप्रीम कोर्ट में एक पार्टी है। ऐसे में यह हलफनामा अहम माना जा रहा है।

यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन की ओर से दाखिल 30 पेज के हलफनामे में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद मीर बकी ने बनवाई थी। वह शिया थे और शिया वक्फ बोर्ड की स्थापना उन्होंने की थी। ऐसे में मस्जिद की प्रॉपर्टी शिया वक्फ बोर्ड की है। मस्जिद सुन्नी वक्फ बोर्ड की नहीं है। ऐसे में मस्जिद के बारे में शिया वक्फ बोर्ड ही बातचीत कर सकता है। इस मामले में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के स्टैंड पर ऐतराज जताते हुए शिया बोर्ड ने यह भी कहा कि तमाम मुद्दों पर समझौते के लिए एक कमिटी बनाए जाने के लिए वक्त दिया जाए।

गौरतलब हो बीते मार्च महीने में सुप्रीम कोर्ट ने भी सुझाव दिया था कि मंदिर-मस्जिद विवाद का कोर्ट के बाहर निपटारा होना चाहिए। इस पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं। बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे,लेकिन इस पर दोनों ही पक्षों की तरफ से कोई सार्थक शुरूआत नहीं की गई,जिस कारण से सुप्रीम कोर्ट अब इस विवाद की नियमित सुनवाई करने जा रहा है।

अभी तक बाबरी मस्जिद के सबसे बड़े पैरोकार हाशिम अंसारी (अब मृत) और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ही विवादित स्थल पर अपनी दावेदारी ठोक रही थी।उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में हलफनामा देकर मुस्लिम सियासत को और गरमा दिया है। मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य इसके औचित्य पर सवाल खड़े कर रहे हैं तो सुन्नी वक्फ बोर्ड का मानना है कि शिया वक्फ को इसका अधिकार ही नहीं है। शिया वक्फ बोर्ड के हलफनामें पर मुस्लिम पक्ष के कुछ पैरोकारों का यह भी मानना है कि इससे सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

शिया वक्फ बोर्ड ने यह हलफनामा ऐसे समय में दिया है जबकि वह सपा सरकार में संपत्तियों के दुरुपयोग जैसे कई आरोपों से घिरा हुआ है। हालांकि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ऐसे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कह रह हैं,‘हम न्यायालय में चल रहे मुकदमे में पक्षकार हैं और अन्य पार्टियों की तरह अपना जवाब रखने का हमें हक है। उससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमने कब अपना पक्ष रखा। यह सुप्रीम कोर्ट देखेगा कि हमने हलफनामा देर में रखा या समय से। दूसरी ओर इस मुकदमे में पैरोकार पूर्व अपर महाधिवक्ता जफरयाब जीलानी मानते हैं कि इस हलफनामे का मुकदमे की सुनवाई पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य सियासी है और यह भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी कहते हैं कि 1946 में यह तय हो चुका है कि मस्जिद पर शिया का हक नहीं है। 71 साल बाद इस मामले को अदालती लड़ाई में उठाना गलत है।

बताते चलें कि 30 सितंबर 2010 को हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ जमीन में से निर्मोही अखाड़े को राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह, रामलला विराजमान को मूर्ति वाली जगह और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बचा हुआ तिहाई हिस्सा देने को कहा था,जिस पर कोई भी पक्ष राजी नहीं हुआ जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुच गया था।

किसने क्या कहा--

यह मस्जिद मीरबाकी ने बनवाई थी, जो शिया था। 1946 तक मस्जिद उनके पास थी लेकिन, अंग्रेजों ने गलत कानूनी प्रक्रिया से इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया। मस्जिद और मंदिर पास-पास नहीं होने चाहिए क्योंकि दोनों समुदाय के लोग लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करते हैं। हम चाहते हैं कि राम जन्मभूमि स्थल से उचित दूरी पर मुस्लिम इलाके में मस्जिद बनवाई जाए। -शिया वक्फ बोर्ड

अयोध्या में विवाद मस्जिद का नहीं, बल्कि भूमि का है। इसे शिया-सुन्नी के विवाद के रूप में नहीं देखा जा सकता। शिया वक्फ बोर्ड का हलफनामा औचित्य से परे है। इसका कोई अर्थ नहीं है। -वरिष्ठ सदस्य आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड खालिद रशीद फरंगी महली

मंदिर और मस्जिद दोनों बनें। मंदिर वहीं बने, जहां वह है। मस्जिद सरयू नदी के दूसरी तरफ बननी चाहिए। -बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी

शिया वक्फ बोर्ड का हलफनामा झूठ के सिवा कुछ नहीं है। चंद बिके लोगों की यह करतूत है। इससे सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। -हाजी महबूब, सुन्नी सेंट्रल बोर्ड

इस हलफनामे से दुनिया भर में बड़ा संदेश गया है। देश में रहने वाला हर राष्ट्रप्रेमी मुसलमान चाहता है कि राममंदिर जन्मभूमि पर बने। -महंत रामदास, निर्मोही अखाड़ा

लेखक अजय कुमार लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं.

Leave your comments

Post comment as a guest

0
Your comments are subjected to administrator's moderation.
terms and condition.
  • No comments found

Latest Bhadas