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आज एक साथ तीन लोगों से बात करने का मान है..! इनमें से न तो कोई किसी सियासी जमात का वार्ड का अध्यक्ष है, न कोई किसी गांव प्रधान या नगर पालिका का मैंबर, न ही कोई पुलिस की वर्दी से मिलती जुलती वर्दी पहनने वाला होमगार्ड। और ये भी साफ करता चलूं, कि किसी सियासी पार्टी का वार्ड का अध्यक्ष, गांव का प्रधान या नगर पालिका का मेंबर और कोई होमगार्ड का पद। न तो किसी से कम होता है, न ही उसकी ज़िम्मेदारी को हल्का करके देखा जा सकता है, लेकिन मैं जिनसे मुख़ातिब हूं, उनमे से एक तो एक राजनीतिक दल के न सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं बल्कि अगर कहा जाए कि अपने आप में सियासत का चलता फिरता स्कूल भी हैं। इतना ही नहीं उनको देखकर लाखों नौजवानों ने न सिर्फ सियासत में क़दम रखा! बल्कि उनके नाम से जुड़ने में आज भी गर्व महसूस करते हैं। साथ ही देश के सबसे बड़े प्रदेश के कई बार ये मुखिया भी रह चुके हैं और देश के रक्षामंत्री तक की ज़िम्मेदारी भरा ओहदा संभाल चुके हैं।       

दूसरे हैं देश के सबसे बड़े प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुखिया चुने जाने का गौरव पा चुके, एक ऐसे नौजवान जो फिलहाल लाखों नौजवानों की ही नहीं बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण बने हुए हैं। उनके सौम्य और नरम स्वभाव को लेकर अक्सर लोग तारीफ ही करते नज़र आते हैं। और इनमें तीसरे और सबसे मह्तवपूर्ण कड़ी के तौर पर फिलहाल जो मौजूद हैं.... वो हैं एक ईमानदार आईपीएस और वर्तमान में पुलिस के इतने बड़े ओहदे और रुतबे पर विराजमान हैं कि कईयों का यहां तक पहुंचने का ख़्वाब ही रहता है।

अब आप भी सोच रहे होंगे कि भला इन तीनों से एक साथ क्यों? जी हां पिछले कई दिनों से जो हो रहा है, उस ड्रामे से। इनमें से एक भी पात्र को बाहर कर दिया जाए तो स्क्रिप्ट के मुताबिक़ प्ले नामुमकिन है।

सबसे पहले एक ऐसे शख़्स से, जिसको लोग प्यार से धरती पुत्र के नाम से भी जानते हैं। इनसे शिकायत इसलिए कि राजनीति में इनकी छवि कुछ अलग होने के साथ साथ इनको देखकर लाखों नौजवान आज भी सड़क पर उतरने को तैयार रहते हैं। और हमदर्दी इसलिए कि इनको देखकर आज भी बहुत से लोग अपनी समस्याओं से निदान की उम्मीद बांधे रहते हैं। ऐसे में इनका वजूद भी जनता की अमानत ही है। तो जनाब आपने कई बार देश के सबसे बड़े सूबे की कई बार कमान संभाली है। इस बार भी कमान तो अप्रत्यक्ष रूप से आपके ही रिमोट से संचालित है। और करोडो लोगों की उम्मीदों और आकाक्षओं की अमानत और ज़िम्मेदारी सभाले आपको इतना तो सोचना होगा कि आख़िर आपके सलाहकार या आप ख़ुद किस तरह से मामलात को डील कर रहे हैं ? माना कि आपके इर्द गिर्द सैंकड़ों आईपीएस हाथ बांधे आपकी आंख के एक इशारे का इंतज़ार करते रहते हों। लेकिन क्या हर आईपीएस एक जैसी मानसिकता और सोच वाला ही होगा ? साथ ही क्या कभी आपने ये सोचा ..? कि जिस जनता ने आपकी आवाज़ पर इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी… उसी की आड़ में आपके ही कुछ लोग न सिर्फ जनता के हितों की अनदेखी कर रहे हैं...? बल्कि वो सब किया जा रहा है जो शायद आपको भी पंसद न हो। इसके अलावा आपके ऊपर अपने परिवार और अपनी बिरादरी के लोगों को प्रमोट करने के आरोप लगते रहे, जनता बहुत उतावली नहीं हुई। मगर जब पत्रकारों की मौत जलने से होने लगे थानों में पुलिस निरंकुश होने लगी, या फिर आपके ही कुछ अधिकारी मनमानी करने लगें और कुछ घुटन महसूस करने लगे... तो भला जनता बेचारी कहां जाए ?

आप शायद भूल गये कि एक कवि सम्मेलन में आपने ही एक दरोगा को सिर्फ इसलिए दे मारा था कि वो जनता की भावनाओं के अनुरूप सुनाई जाने वाली कविता के कवि का अपमान कर रहा था? लेकिन आज आपके कई मंत्री, कई संत्री कई नज़दीकी लोग न सिर्फ जनभावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि बेख़ौफ अपने कृत्यों को प्रचारित भी कर रहे हैं। ऐसा नहीं कि सिर्फ यादव बिरादरी के वोटों से आप की पार्टी सूबे में सत्ता या संसद में कई सीटें हासिल कर पाई है ! लेकिन आप ईमानदारी से सोचें कि सत्ता सुख में यादवों में मुक़ाबले में आपके सलाहकारों की सलाह पर आपने किस किस को क्या दिया? बहरहाल ये शिकायतों का समय नहीं! फिलहाल आपकी पार्टी की सत्ता वाले सूबे के एक आईपीएस अधिकारी से या तो आप नाराज़ है! या वो आपसे शिकायत रखता है! इतने बड़े सूबे को संभालने का अनुभव रखने वाले धरती पुत्र क्या आप अपने ही एक आईपीएस की भावनाओं को नहीं संभाल पा रहे? आप अगर उनको अपने पास बुलाकर या उनके पास जाकर एक बुज़ुर्ग और अभिभावक के नाते समझाने के साथ साथ डांट भी देगें, तो एक पढ़ा लिखा इंसान इतना ज़िद्दी नहीं हो सकता कि उसको डांट और धमकी में फर्क न महसूस हो सके!

रहा सवाल आपको सलाह देने का तो कई साल से आपकी पार्टी की सत्ता है..! साल डेढ़ साल में आपको जनता के दरबार में दोबारा अपने किये पर मोहर लगवाने के लिए जाना है। हाल ही में लोकसभा चुनावों से लेकर पिछले विधानसभा चुनवों में बीएसपी अपने वजूद तक को तरस गई। और पिछले विधानसभा चुनावों में आपकी पार्टी को मिलने वाली सफलता में आपसे ज्यादा खुद बीएसपी की नाकामी भी एक वजह थी। और इसको ही जनता का फैसला कहा जाता है।

और रहा सवाल विपक्ष का..? तो आपने तो उसकी मानों लाटरी ही खुलवा दी। बैठे बिठाए आप उसको मुद्दे दे रहे हैं। बहरहाल आप को सलाह देने की मैं गुस्ताखी तो नहीं कर रहा.... लेकिन इतिहास गवाह है कि जनता का मिज़ाज बदलता है.... तो तख़्त बदलता है और ताज बदलता है। और जिंदगी भर की मेहनत कुछ ही गल्तियों की भेंट चढ़ जाती है...!

दूसरे सज्जन यानि देश के सबसे बड़े सूबे के सबसे कम उम्र मुखिया...जिनकी ज़िम्मेदारियां बड़ीं हैं, आपके कथित हमदर्दों और सलाहकारों की क़तार लंबी है। लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि अपने ही पिता के नाम से पैदा हो रहे कथित विवाद में आपको निजीतौर पर भावुकाता के साथ साथ राजधर्म भी निभाना है.? माना कि आपके पिता या आपके लिए एक आईपीएस की कोई हैसियत नहीं ! लेकिन दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में भी कुछ दिनों तक सलाहकारों की राय और कुछ प्रियजनों का प्रेम बाद में क्या रंग लाया ये सबको याद है!

एक एफआईआर.. जो पुलिस कई माह से दर्ज नहीं कर रही थी... वो आपके पिता पर आरोप के बाद चंद घंटों में दर्ज हो गई.. ! आपके सलाहकार क्या सच में आपके हमदर्द भी हैं...? ज़रा सोचिए...! जनता सब समझती है। पांच साल आपके… और एक दिन जनता का..! बीएसपी की हालत और केंद्र में कांग्रेस की हालत शायद ही कोई भूला हो..! आप बेहद समझदार हैं, ऊर्जावान हैं। लैपटॉप हों या जनहित में लाई जाने वाली स्कीम्स, सत्ता के आख़िरी समय में कुछ सलाहकारों की थोड़ी बहुत गलत सलाह के बोझ में दब गईं तो अफसोस के सिवा कुछ न होगा। सैंकड़ो आईपीएस अफसरों की भीड़ में सबको हाथ बांधे देखने की आदत से बाहर निकलकर कुछ को अलग नज़रिए से देखने से कोई छोटा नहीं हा जाता है। ये आप भी जानते हो कि उस अफसर को जनता भी ईमानदार मानती है.... और माना यही जाता है कि वो अक्सर कुछ गलत लोगों के पीछे पड़ रहता है। ऐसे में उसके खिलाफ की जाने वाली कोई सख्ती उनका ही कद बढ़ा रही है।

इस सबसे अलावा एक बात और.... एक पूर्व सीएम, वर्तमान सीएम के पिता, सासंद ,राजनीति पार्टी के अध्यक्ष और एक वर्तमान सीएम के लिए एक आईपीएस अफसर की क्या हैसियत होती है ये सबको मालूम है। लेकिन जिस ढंग से आज आप के कुछ सलाहकारों की राय और कुछ चहेतों के प्रेम में एक आईपीएस को सामने ला खड़ा किया गया है... उसमें आईपीएस के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं और दूसरे पक्ष को सोचने के लिए बहुत कुछ।    

और हां  तीसरे सज्जन....एक आईपीएस बनने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं ये सबको मालूम नहीं। एक आईपीएस अपने कार्यकाल में नियमानुसार भी जनता का कितना भला कर सकता है...? ये सोचा भी नहीं जा सकता है..! लेकिन श्रीमान जी अगर आप ईमानदार हैं...! तो इसका कतई मतलब ये नहीं कि सारी दुनियां बेईमान है...! और हर मामले में आपको टांग अड़ाने का मानो ठेका मिल चुका है। साथ ही अगर आपको हर मामले में याचिकाएं डालना ही है..? तो कम से कम याचिका के चयन का पैमाना भी तय करना होगा। साथ ही आपकी वर्दी और आपके विभाग का नियम आपका गुलाम कभी नहीं हो सकता। माना कि आप जनता की आवाज़ उठा ही रहे हैं.... तो सच बताइए कितनी जनता को आपके दरबार में खुलेआम आने जाने की इजाज़त है....? साथ ही कितने लोगों को आपने अब तक जोड़ा। सिर्फ हाइप्रोफाइल मामलों को उठाने से कोई जनता का ठेकेदार बने...? ये समझ से परे की बात है।

और हां आपके ही विभाग का एक डीएसपी..? कथित तौर पर एक बाहुबली नेता के हाथों ड्यूटी के दौरान कत्ल करा दिया गया... लेकिन आप....? जो करप्ट नेताओं के खिलाफ खड़े होने का दावा करते हैं....? उस हत्या के बाद अपने विभाग के शहीद अफसर की विधवा के बजाए.... बाहुबली नेता के साथ खड़े देखे गये थे..! क्यों..? ये सिर्फ आप ही जानते हैं...? इसके अलावा….हाल ही में… आपके ही विभाग के एक अफसर ने एक वकील को अदालत में गोली मार दी...! तब भी आप पीड़ित के बजाए आरोपी के साथ खड़े थे। इतना ही नहीं जब झूठे मामलों में फंसे और बेगुनाहों को छोड़े जाने की बात आई...! तब भी आप अपने उस विभाग के साथ खड़े थे...? जिसकी कार्यशैली आप ही नहीं... ! पूरा देश जानता है कि किस तरह झूठे मामलों में लोगों को फंसाना आपके ही विभाग के कई लोगों के बाएं हाथ का खेल हैं ?

और हां आप ही सच्चे मन से अब बता दें...? कि आपके साथ… आपका ही विभाग कितनी मज़बूती से खड़ा है.? इतना ही नहीं आपके खिलाफ एक महिला के साथ बलात्कार करने वाली रिपोर्ट भी आपके विभाग के बहादुर और आपके चहेते अफसरों ने लिखी है।

हो सकता है कुछ दूसरे अफसरों की तरह नौकरी में रहते हुए आप भी राजनीति के लिए राहें हमवार कर रहे हों....ताकि आपकी चहेती कोई सियासी जमात आपको भी अपनी राजनीतिक नय्या में बैठाकर सियासत की सय्याहत करा दे...वैसे आम आदमी पार्टी में जाना और बाहर आना फिलहाल चर्चा का विषय नहीं है।

हम आपकी ईमादारी का सैल्यूट करते हैं। सकंट की इस घड़ी में आपके साथ हैं। हर मोर्चे पर आपकी लड़ाई में साथ हैं। हमने आपके साथ धमकी वाले ऑडियो को दिखाया....आपके पक्ष में लिखा...और सड़क पर भी उतरने को तैयार हैं... लेकिन आपको ये सोचना होगा कि आप एक आईपीएस हैं कोई होमगार्ड नहीं...! जिसको अपनी ताक़त का पता नहीं। कोई पहलवान अगर हॉकी के मैदान में गोल करने को सोचने लगे तो उसकी कामयाबी की उम्मीद करना बेमानी होगा। आपको अपने अधिकार मालूम हैं....! सीट पर रहते हुए आप बहुत कुछ कर सकते हैं। रहा सवाल जनता के मुद्दों को उठाने का....! तो फिर जनता को भी अपने साथ जोड़िए। सिस्टम में ख़राबियां हैं... उसके लिए सिस्टम के बहुत लोग ज़िम्मेदार हैं.... इन सबसे अकेले भिड़ना समझदारी नहीं होगी।

अंत में आप तीनों से ही एक अनुरोध है। जनता के सामने बहुत परेशानियां और मुद्दे हैं..... निजी ज़िद और मूंछ के लड़ाई से ऊपर भी कुछ देखना होगा। संयम और समन्यवय बनाते हुए हर समस्या का हल निकाला जा सकता है। एक नेता, एक सीएम और एक आईपीएस के पास जनता से जुड़े बहुत काम हैं। उन पर नज़र डालें।

और अगर ये सब बातें बेमानी हैं और कोई भी झुकने को तैयार नहीं... तो इस बार....आप तीनों अपनी अपनी ताक़त और पहुंच का ऐसा प्रयोग करें.... कि अगली बार कोई नेता करप्शन न कर सके, और कोई अफसर मनमानी। क्योंकि चैनलों पर बाइट और बहस, या महज़ बयानबाज़ी के बजाए इस बार जनता आर या पार का फैसला देखना चाहती है। 

लेखक एवं टीवी जर्नलिस्ट आजाद खालिद से संपर्क : 9718361007

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