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मामला उत्तराखंड के ऋषिकेश का है. यहां आजतक के लिए कार्यरत एक महिला रिपोर्टर का आडियो वायरल हुआ है. इस आडियो में महिला रिपोर्टर एक बिल्डर से पैसे के लिए सौदेबाजी कर रही है. बिल्डर एक मकान का लेंटर करा रहा है.  माना जा रहा है कि बिल्डर के कार्यों में कोई खामी होगी, जिसे उजागर न करने के एवज में पैसे की मांग की जा रही है. बिल्डर खुलकर बात कर रहा है और दस हजार रुपये टोकन के रूप में तुरंत रखने के लिए अनुरोध कर रहा है.

पूरी बातचीत बीस हजार रुपये में तय हुई थी. महिला रिपोर्टर दबाव बना रही है कि उसे बीस हजार इकट्ठे दे दिए जाएं. इसके लिए वह बिल्डर को उकसाती भी है कि मर्द की जुबान एक होती है. मतलब ये कि बिल्डर बीस हजार रुपये देने का वादा कर चुका है लेकिन वह पहली खेप में केवल दस हजार रुपये देता है. महिला रिपोर्टर चाहती है कि उसे पूरे बीस हजार इकट्ठे दे दिए जाएं. हालांकि बिल्डर यह गारंटी चाहता है कि बीस हजार देने के बाद कोई दूसरा पत्रकार उसके यहां न पहुंचे लेकिन महिला रिपोर्टर का कहना है कि ऐसी कोई गारंटी नहीं ली जा सकती. बिल्डर बार बार कह रहा है कि वह लेंटर होने के बाद बढिया वाली पार्टी कर देगा और फिलहाल दस हजार अभी रख लिया जाए, वह बाद में पार्टी दे देगा, बाद में बाकी दस हजार की रकम भी दे देगा.

यह पूरा प्रकरण चौंकाता नहीं है क्योंकि जिलों में टीवी पत्रकारों की हालत यही है. उनकी रोजी रोटी ब्लैकमेलिंग और उगाही से ही चलती है. बड़ी बात ये है कि आजतक जैसे नंबर वन न्यूज चैनल के रिपोर्टरों को भी जीवन चलाने के लिए उगाही करनी पड़ रही है. सवाल उठता है कि क्या आजतक अपने जिलों के रिपोर्टर को तनख्वाह नहीं देता? अगर देता है तो कितना देता है और किस क्राइटेरिया पर देता है? अगर वह नहीं देता है तो क्या वह अपने रिपोर्टरों को फील्ड से उगाही ब्लैकमेलिंग करके जीवन जीने की खुली छूट देता है? कई सवाल हैं जिसके जवाब आजतक प्रबंधन को देना चाहिए. आजतक में उच्चपदस्थ एक पदाधिकारी ने आफ दी रिकार्ड बातचीत में बताया कि ऋषिकेश की महिला रिपोर्टर का केस प्रबंधन के संज्ञान में है और बहुत जल्द उसे कार्यमुक्त कर दिया जाएगा. टेप सुनने के लिए नीचे क्लिक करें :

भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क :

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