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पतंजलि और बाबा रामदेव के अरबों-खरबों के विज्ञापन तले दबे मीडिया हाउसेज ने एक बड़ी खबर को दबा दिया. भारतीय सेना ने बाबा रामदेव द्वारा सप्लाई किए जा रहे आंवला को घटिया पाया है और इसकी बिक्री पर फौरन रोक लगा दी है. यह खबर दो दिन पुरानी है लेकिन इस मुद्दे पर किसी न्यूज चैनल में कोई चीखमचिल्ली नहीं है. सब बड़े आराम से चूं चूं के मुरब्बा की तरह इस बड़ी खबर को पी गए और देश को बांटने वाले विषयों पर हो-हल्ला जारी रखे हुए हैं.

असल में बाबा रामदेव का पतंजलि ग्रुप आंवला जूस भारतीय सेना को सप्लाई करता है. भारतीय सेना कोई भी प्रोडक्ट अपने यहां आने पर उसका अपने लैब में परीक्षण करती है. इस परीक्षण में बाबा रामदेव का आंवला घटिया पाया गया. यानि जो पैरामीटर भारतीय सेना ने बनाए हैं, उस पर यह प्रोडक्ट खरा नहीं उतरा. इसके फौरन बाद सेना ने इस प्रोडेक्ट को न सिर्फ कैंटीन से हटवा दिया बल्कि आगे से ऐसे प्रोडक्ट्स को लाने पर पाबंदी लगा दी है.

ये तो रही मूल खबर. अब यहां से शुरू होती है मीडिया वालों के हरामीपने की खबर. दिन रात न्यूज चैनलों पर बाबा रामदेव और उनके प्रोडेक्टस का हरिकीर्तन चलता रहता है. जाहिर है सबकी जेबें इस विज्ञापन की रकम से भरी जा रही है. अरुण पुरी हो या रजत शर्मा, सुभाष चंद्रा हो या अवीक सरकार, मुकेश अंबानी के न्यूज चैनल हों या विनोद शर्मा का मीडिया हाउस, सब के सब रामदेव के नोटों के तले दबे हैं. सो इन्हें तो इस खबर को दबा ही देना था. लेकिन क्या इस खबर को एनडीटीवी पर भी नहीं दिखाया गया? बताया जा रहा है कि एनडीटीवी भी बाबाजी के रुपयों रुपी आशीर्वाद तले दबा है, सो प्रणय राय ने भी खबर पर आंख मूंद लेने का फरमान अपने यहां जारी कर दिया.

मतलब कि बाबा रामदेव के एक घटिया प्रोडक्ट ने भारतीय मीडिया के घटिया और घृणित चेहरे का भी पर्दाफाश कर दिया. अखबार हों या न्यूज चैनल, जबसे इनका कारपोरेटीकरण हुआ है, तबसे इनने शीर्ष लेवल के घपले घोटाले दिखाने छापने बंद कर दिए हैं क्योंकि इन घोटालों में या तो इनका कोई करीबी शामिल होता है या फिर इनके मीडिया हाउसों का बड़ा विज्ञापनदाता. हुआ यह भी है कि ये मीडिया हाउसेज सत्ता से लंबी चौड़ी डील कर पैसे उगाह लेते हैं और फिर सत्ता के खिलाफ भी खबरें नहीं दिखाते, जैसा कि आजकल मोदी राज में हो रहा है. दिन रात मोदी और योगी कीर्तन चल रहा है. इसके पहले यूपी की अखिलेश सरकार ने अरबों रुपये लुटाकर को मीडिया को मैनेज कर रखा था.

बंगाल की पब्लिक हेल्थ लैब में आंवला जूस के फेल हो जाने के बाद आर्मी कैंटीन द्वारा इसकी बिक्री पर रोक लगा देने की खबर पर किसी न्यूज चैनल में प्राइम टाइम पर डिबेट न होना शर्मनाक है. नैतिकता का दिन-रात पाठ पढ़ाने वाले मीडिया हाउसों के संपादकों और एंकरों को एक दिन के लिए अपने मुंह पर कालिख पोत कर स्क्रीन के सामने बैठना चाहिए ताकि जनता जान सके कि इनने एक बड़ी खबर विज्ञापनदाता के दबाव में न सिर्फ दबा लिया बल्कि राष्ट्रहित और भारतीय सेना से जुड़े इस मसले पर जनहित में खबर न दिखाकर राष्ट्रद्रोह किया है.

पतंजलि के प्रोडक्ट आंवला जूस पर सेना की कैंटीन में बिक्री पर रोक लगाने की खबर को अपने चैनल पर न दिखाए जाने को लेकर न तो अजीत अंजुम ने कोई ट्वीट या एफबी पोस्ट जारी किया होगा और न ही सुधीर चौधरी इस बड़े विषय पर अपने दर्शकों का ज्ञान सोशल मीडिया पर बढ़ाते पाए गए होंगे.

रक्षा मंत्रालय ने आयुर्वेद पतंजलि को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. इस मामले में रक्षा मंत्रालय ने बाबा रामदेव की कंपनी से जल्द से जल्द जवाब भी मांगा है. लेकिन हमारे महान एंकर और संपादक लोग सो रहे हैं. हमारे महान मीडिया मालिक इस मामले में सेना और राष्ट्र का हवाला देकर छाती बिलकुल नहीं कूट रहे हैं.

खबरों के मुताबिक पतंजलि के इस आंवाल जूस की जांच कोलकाता की सेंट्रल फूड लैबरेटरी में भी जांच कराई गई और वहां भी इसे खाने के लिए ठीक नहीं पाया गया. इसके बाद ही पतंजलि को आर्मी की सभी कैंटीनों से आंवला जूस वापस लेने का निर्देश दिया गया और पतंजलि ने चुपचाप अपना प्रोडक्ट वापस मंगा भी लिया है.

इस पूरे मामले में वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह का कहना है- ''देशभक्ति यही है क्या? फौज को नकली आंवला जूस बेचने के अपराधी रामदेव पर किसी भक्त को अब कुछ नहीं कहना है, क्यों? अब कहां गया राष्ट्र और कहां गया सेना का अभिमान? तीन दिन हो गये किसी चैनल पर सांस तक नहीं आई. गूगल करें. दस स्रोत हैं इस खबर के. तीन दिन से प्रिंट मीडिया में ख़बर है. लेकिन चैनल वाले अभी हिंदू मुस्लिम और केजरीवाल में उलझे हैं.''

वरिष्ठ पत्रकार Jaishankar Gupta का साफ कहना है कि सब के सब मीडिया हाउस पतंजलि के विज्ञापनों के बोझ तले दबे हैं. पत्रकार Kumar Narendra Singh कहते हैं- ''यदि आपके पैसा और पॉवर हो, तो आपका हर कुकर्म देशभक्ति है। लेकिन यदि आप गांठ के पूरे नहीं हैं, तो आप देशभक्त नहीं हो सकते।''

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट. यशवंत से संपर्क ह्वाट्सअप नंबर 9999330099 के जरिए किया जा सकता है.

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  • Guest - Pramod kumar Singh

    बेबाकी के लिये पुनः धन्यवाद । झोलाछाप पत्रकारिता का दौर चल रहा है महाशय!

  • Guest - Shiv Singh

    देश आज के दौर में आडंबरियों के रहमो करम पर है। आज कर्म प्रधान व्यक्ति की छीछालेदर और भ्रष्ट की जयजयकार हो रही है। यह दमघोटू दौर जल्द समाप्त हो इसके लिए क्या किया जाय?

  • Guest - Mahesh

    Sir
    It is very disheartening to note the low quality of many patanjali products, where baba always said that he is running the sansatha with a motto of no profit no loss basis and even to serve the poor people of the country. But in resultant it shows opposite to its own humble thoughts e. g one litre of kachhi ghani sarson oil in market is selling @ rs 75-90 whereas patanjali selling @ rs 130/- per litre. Haryana Punjab UP, MP n Rajasthan have blessed with heavy fasal of sarson whereas due to such big market player, the rate of sarson oil and even many more daily easily available itema are far away from the approach of common man. Matter of hiking price be noticed seriously by all concerned govt departments.

    from Delhi, India