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कई लाला लोग ऐसे होते हैं जो केवल उगाही और साजिश के दम पर पैसा बटारने की ख्वाहिश रखते हैं और इसी मकड़जाल के सहारे अपना वेंचर आगे ला देते हैं. कुछ इन्हीं हालात में 'भास्कर न्यूज' नामक चैनल आ रहा है जो आने को तो कई साल से आ रहा है लेकिन अभी तक टेस्ट सिगनल पर ही है. इस चैनल से खबर है कि यहां सेलरी संकट लगातार जारी है. इस चैनल में कार्यरत करीब सत्तर फीसदी लोगों को सेलरी नहीं मिली है.

धरतेरस और दिवाली जैसे त्योहार होने के बावजूद सेलरी न देने वाली हेमलता अग्रवाल को लोग बददुवाएं दे रहे हैं. मालूम हो कि ये हेमलता अग्रवाल इस चैनल की मालकिन है. इस महिला ने कुछ स्ट्रिंगरों-पत्रकारों के बहकावे-झांसे पर चैनल लाने का ऐलान किया और मार्केट से पैसा फ्रेंचाइजी, माइक आईडी, सेक्युरिटी आदि के नाम पर बटोरने लगी. लेकिन जब चैनल लांच न हो, कंटेंट कोई खास न हो तो भला कोई पैसा कब तक व कितना लगाएगा. सो, चैनल आने के पहले ही बैठता दिख रहा है. धनतेरस और दिवाली के मौके पर एक हीरा कंपनी के मालिक ने अपने इंप्लाइज को गाड़ी, फ्लैट, जेवरात आदि बोनस के रूप में दिए जिसकी चर्चा पूरे देश में है.

वहीं दूसरी तरफ हेमलता अग्रवाल जैसी घटिया सोच वाली मालकिन है जो दिवाली धनतेरस के दिन सिर्फ अपने घर में उजाला देखना चाहती है, अपने इंप्लाइज के घर बिलकुल नहीं. अगर उसे अपने इंप्लाइज से प्रेम होता, उनके दुख-सुख से संवेदना होती तो वह अपने गहने बेचकर इन्हें दिवाली-धरतेरस के मौके पर सेलरी देती. वैसे भी, इंप्लाइज कोई बोनस तो मांग नहीं रहे हैं. वे जानते हैं कि इस कंजूस मक्खीचूस से उनकी ओरीजनल सेलरी मिल जाए, वही बहुत है. सूत्र बताते हैं कि कल भास्कर न्यूज के कई लोग एकाउंट्स में जाकर लड़ पड़े तो उनमें से कुछ को सेलरी दे दी गई. पर अभी भी साठ सत्तर फीसदी लोग ऐसे हैं जो एक एक पैसे को मोहताज हैं. इन्हें पिछले महीने की सेलरी नहीं मिली है. आश्वासन सभी को दिया गया है कि एकाउंट में सेलरी डाल दी जाएगी, लेकिन सभी को पता है कि ऐसा कसमों वादों आश्वासनों का मतलब क्या होता है.

भास्कर न्यूज से जुड़े एक शख्स ने भड़ास को जो सूचना दी है, उसकी कुछ लाइनें इस प्रकार हैं- ''हम लोगों को आज की तारीख तक सितंबर की सेलरी भी नहीं मिली है. हेमलता अग्रवाल हर एक इंप्लाई को मित्तल के साथ मिलकर धमकी दे रही है. बताइए भाई साहब, दिवाली कैसे होगी, हालात बहुत खराब हैं. आज आज कहकर सेलरी लटका रखा है. कुछ आप करो ताकि हमारी आवाज इनकी कानों तक जाए. जो कल सेलरी मांगने गए थे, उनको बुला के आज बोल दिया कि कल के बाद मत आना. आप ही कुछ लिखिए. फेस्टिवल कैसे मनाएं. मैंने तो घर का किराया भी नहीं दिया है अभी तक. त्योहार पर खर्च खुशी की बात ही छोड़ दीजिए.''

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