Category: प्रिंट, टीवी, वेब, ब्लाग, सिनेमा, साहित्य... Published on Friday, 04 November 2011 19:13 Written by B4M
फेसबुक पर रवीश कुमार ने पोसुआ पत्रकारों और महंगाई के बारे में टिप्पणी की है. इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने सत्तापरस्त और भ्रष्ट पत्रकारों की अच्छी खबर ली है. वो लोग जो सरकार की माफिक दलील व तर्क देते हैं, उन्हें अगर पोसुआ पत्रकार कहा जाए तो बिलकुल गलत न होगा क्योंकि उन पत्रकारों को पालन-पाषण का खर्च संभवतः सरकार की ओर से मिलता रहता है. फेसबुक पर रवीश की वाल से पोसुआ पत्रकारों के बारे में उनके दो कमेंट्स को साभार लेकर यहां प्रकाशित किया जा रहा है-
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1- कब से सुनते आ रहे हैं कि महंगाई कम होगी। जब कम नहीं हो सकती तो सरकार क्यों नहीं कहती कि भाई कम नहीं होगी। जब बढ़ती है तभी क्यों कहती है कि हमारे हाथ में नहीं है। फिर किस बूते आश्वासन देती है कि मार्च में कम हो जाएगा, अप्रैल तक कम हो जाएगा। लोग ठूंस कर खा रहे हैं। लेकिन आप सरकार के पोसुआ पत्रकार हैं तो गोली मारिये ऐसे लोगों को जो सरकार की इस मजबूरी को नहीं समझते हैं। पोसुआ पत्रकार बोलेगा कि इकोनोमी नहीं समझते हैं आप। ग्लोबलाइज़ेशन नहीं समझते हैं आप। कांग्रेस के भीतर के लोग कहते हैं कि मर जायेंगे महंगाई की मार से। सांसद मानते हैं। सिर्फ सरकार और पोसुआ पत्रकार नहीं।
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2.ममता तेल के दाम बढ़ने से ही नाराज़ नहीं हुई हैं। वो जानती हैं कि यूपीए की साख इस वक्त अपने निम्नतम स्तर पर है। वो लोकसभा में यूपीए के साथ रहकर नुकसान नहीं उठाना चाहती। वो पूरी कोशिश करेंगे कि यूपीए से नाराज़गी का लाभ लोकसभा चुनावों में लेफ्ट को न मिले। इसलिए ममता के सांसदों ने समर्थन वापस लेने का प्रस्ताव पास किया है। लेकिन अगर सरकार के पोसुआ पत्रकार हैं तो ये सारी बातें ग़लत हैं। सब कुछ अच्छा है।
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...फेसबुक पर आजकल इस कार्टून को लोग खूब पसंद कर रहे हैं...
