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पी7 न्यूज़ चैनल पर सहारा की नालायक टीम का कब्जा!

जबसे प्रेस काऊंसिल आफ इंडिया की कमान जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने संभाली है और उसके बाद उन्होंने भारतीय मीडिया विशेषकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर अपनी टीका टिपण्णी की है, तो सारे टीवी चैनल वाले एकदम से उनके खिलाफ आग उगलने लगे हैं... टीवी चैनल चलाने वालों की मंशा क्या है और उसमें काम करने वाले लोगों की कार्यशैली क्या है.. उसे देखकर मुझे भी मीडिया के बारे में अपनी बात कहने का साहस आ गया है...

मेरी बातें उस बेचारे पी7 न्यूज़ चैनल के बारे में है जिसने अपने चैनल को उठाने के लिए कुछ नए लोगों की भर्ती की.. लेकिन ये नए लोग भी कुछ ज्यादा ही मतलबी दिखाई दे रहे हैं.. इन लोगों ने पी-7 न्यूज़ चैनल की भलाई करने की बजाय अपने ही साथियों को लाभ पहुंचाने के लिए इस चैनल में भर्ती कर लिया और चैनल के पुराने लोगों का काम करना दूभर कर दिया.. पुराने काम करने वालों के लिए अब पी-7 न्यूज़ चैनल की और से कोई पेमेंट भी नहीं मिल रही है.

अगर खुल्ले में बात की जाए तो कहानी की शुरुआत इस तरह से हुई कि सहारा समय चैनल से निकलकर पी-7 न्यूज़ चैनल में राजेश ने इनपुट हैड की और गुरप्रीत सिंह ने असाइनमेंट हैड के रूप में कमान संभाली.. इसके बाद इन्होंने सहारा समय के ही नालायक लोगों को पी-7 न्यूज़ चैनल में भर्ती करना शुरू कर दिया.. ऐसा नहीं कि इस राजेश और गुरप्रीत सिंह की मंशा पी-7 न्यूज़ चैनल को टॉप चैनल की सूची में लाने की रही है.. क्योंकि इन लोगों  ने अपनी मनमानी से पी-7 न्यूज़ चैनल का बंटाधार करके रख दिया है.. इस चैनल में काफी समय से रिपोर्टिंग करने वाले स्ट्रिंगरों को अब तो पिछले कुछ महीनों से पेमेंट नहीं मिल रही और तो और उनसे ख़बरें लेना भी बंद कर दिया गया है.. इतना होता तो सब ठीक रहता ,, अब सहारा समय से निकले राजेश और गुरप्रीत सिंह ने पुराने स्ट्रिंगरों की जगह अपनी मनमानी से सहारा समय के ही कुछ नालायक रिपोर्टर भर्ती कर लिए है.. ऑफिस में बहुत सी पोस्टों पर भी सहारा समय के ही लोगों की भर्ती की जा रही है... ऐसा प्रतीत होता है कि एक तरह से सहारा समय ने राजेश और गुरप्रीत सिंह की आड़ में पी-7 न्यूज़ चैनल पर अपना पूरा कब्जा करने की तैयारी कर ली है.. और अगर पी-7 न्यूज़ चैनल के मालिकों में थोड़ी सी भी समझदारी है तो उन्हें समय रहते ही इस साजिश से खबरदार हो जाना चाहिए..

बदलाव को लेकर कहीं कोई मतभेद नहीं है लेकिन अगर ये बदलाव पी-7 न्यूज़ चैनल को तरक्की के बजाय उसे धरातल में ले जाए तो मेरी राय में यह बदलाव रोक देना चाहिए.. पी-7 न्यूज़ चैनल के मालिक सिर्फ इस बात को देखने का प्रयास करें कि उनकी टीम में जो भी लोग हैं, चाहे नए या पुराने, उनका अनुभव और काम करने की नीयत क्या है ?  क्या पुराने लोगों की टीम यानि स्ट्रिंगर्स ने चैनल का कभी कुछ बुरा किया है ?  असाइनमेंट पर नए भर्ती किये गए गुरप्रीत सिंह को क्या इतनी भी अकल नहीं है कि वो सहारा समय के चुके हुए कारतूसों से जंग का मैदान जीतने निकले हैं ? आज जहां स्टार न्यूज़ और आज तक के बीच में नंबर वन चैनल बनने की भयंकर जंग छिड़ी हुई है, उस समय पी-7 न्यूज़ चैनल को ज़रा संभलकर निर्णय लेने चाहियें.. क्योंकि ज़रा ठंडा करके खाने में ही स्वाद आता है.. आज के जमाने की जनता को भी समझ में आता है कि चैनल क्यों यह खबर दिखा रहा है और आखिर चैनल की मंशा क्या है !  लेकिन पी-7 न्यूज़ चैनल की सबसे बड़ी ताकत उसकी नयी तकनीक है और साथ ही मालिकों की साफ़ नीयत भी, जिसका आजकल पूरा-पूरा फायदा उठाने में व्यस्त है -- राजेश और गुरप्रीत सिंह.. अरे भाई ज़रा पी-7 के मालिकों को कोई जाकर समझा दे कि सहारा समय वाले उनकी नैय्या डुबाने के लिए हर हथकंडा अपनाने में जुट गए हैं.. अभी भी वक्त है संभल जाओ ... बाकी तो खुदा खैर करे... जय राम जी की...

सीमा गर्ग

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कानाफूसी

(लेखिका सीमा गर्ग ने अपने मेल में खुद को एक जागरूक टीवी दर्शक के रूप में बताया लेकिन पत्र की भाषा और अंदरुनी जानकारी से लग रहा है कि वे टीवी दर्शक नहीं बल्कि टीवी कर्मी हैं. और संभव है, उनका नाम भी फेक हो. उनके नाम और उनकी मेल आईडी का प्रकाशन किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने पत्र में अपने नाम और मेल आईडी का प्रकाशन न करने का कोई अनुरोध नहीं किया है)

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